पेपर लीक पर अब सबसे बड़ा प्रहार! 8 साल की जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना… 3 महीने में होगा फैसला, कितना बदल रहा है लोक परीक्षा क़ानून ?



पेपर लीक और संगठित नकल के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश कर दिया है। यह विधेयक 2024 में बने कानून को और अधिक कठोर बनाता है।

पेपर लीक पर जुर्माना

पेपर लीक पर जुर्माना

सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश कर दिया है। यह विधेयक 2024 में बने कानून को और अधिक कठोर बनाता है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य केवल इसके और सख्त बनाना नहीं, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समय पर पूरा करना है, ताकि इससे जुड़े मुकदमे तय समय पर पूरे हों और वर्षों तक मुकदमे लंबित न रहें।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कई मामलों में जेल की अधिकतम सजा 8 वर्ष तक हो सकती है, जबकि आर्थिक दंड को बढ़ाकर ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक करने का प्रस्ताव रखा गया है। यानी यदि कोई संगठित गिरोह या संस्था परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करती है, तो उसके खिलाफ पहले से कहीं अधिक कठोर कार्रवाई होगी।

2 महीने में जांच, 3 महीने में फैसला… सरकार का नया रोडमैप

संशोधन विधेयक में पहली बार स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। कानून के अनुसार अब परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। चाहे जांच राज्य पुलिस करे, केंद्रीय जांच एजेंसी करे या केंद्र सरकार द्वारा गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) सभी के लिए यही समय सीमा लागू होगी।
इतना ही नहीं, हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए जाएंगे। इन अदालतों में सुनवाई रोजाना (Day-to-Day) होगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का लक्ष्य रखा गया है।
विधेयक यह भी कहता है कि कानून लागू होने से पहले के लंबित मामले भी इन्हीं फास्ट ट्रैक अदालतों में स्थानांतरित किए जाएंगे ताकि पुराने मामलों का भी जल्द निपटारा हो सके।

स्पेशल टास्क फोर्स, हाई कोर्ट में अपील… क्या-क्या बदलेगा?

सरकार ने जांच एजेंसियों को और अधिक अधिकार देने का भी प्रस्ताव रखा है। अब आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार किसी भी मामले की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित कर सकेगी और फिर वही एजेंसी जांच पूरी करेगी।
साथ ही प्रत्येक फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किए जाएंगे ताकि मामलों की असरदार पैरवी हो सके।
अपील की व्यवस्था भी बदली गई है। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीधे हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ में अपील की जा सकेगी। अपील का निपटारा भी, जहां तक संभव हो, तीन महीने के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्यों है संशोधन की जरूरत?

विधेयक के Statement of Objects and Reasons में सरकार ने कहा है कि हाल के वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा माफिया और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी की घटनाओं ने सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को गंभीर चुनौती दी है।
सरकार का कहना है कि 2024 का कानून एक मजबूत शुरुआत था, लेकिन अब उसे और प्रभावी बनाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से सजा बढ़ाने, भारी आर्थिक दंड लगाने, समयबद्ध जांच, फास्ट ट्रैक ट्रायल और विशेष जांच तंत्र जैसी व्यवस्थाओं को कानून का हिस्सा बनाया जा रहा है।
यदि यह संशोधन संसद से पारित हो जाता है, तो भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक और संगठित नकल के खिलाफ अब तक का सबसे कठोर कानूनी ढांचा लागू हो जाएगा।

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