PM मोदी इन दिनों न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर हैं। करीब 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच ऑकलैंड में अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, सुरक्षा और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।
न्यूजीलैंड क्यों है खास?
न्यूजीलैंड दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक खूबसूरत द्वीपीय देश है। यह ऑस्ट्रेलिया से करीब 1,600 किलोमीटर दूर है। यहां की आबादी लगभग 53 लाख है। यह दुनिया के सबसे विकसित देशों में गिना जाता है और बेहतर जीवन स्तर, अच्छी शिक्षा, पारदर्शी शासन और मजबूत लोकतंत्र के लिए जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 2026 में न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था लगभग 278 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
भारत और न्यूजीलैंड के रिश्ते
भारत और न्यूजीलैंड के संबंध कई दशकों पुराने हैं। दोनों देश पहले ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे हैं और आज भी कॉमनवेल्थ के सदस्य हैं। दोनों देशों के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंध 1952 में स्थापित हुए थे। इसके बाद से राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते लगातार मजबूत होते गए हैं।
न्यूजीलैंड के लिए भारत क्यों अहम?
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। बड़ी आबादी, विशाल बाजार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भूमिका के कारण न्यूजीलैंड भारत को अपना महत्वपूर्ण साझेदार मानता है। इसी वजह से उसने पिछले कुछ वर्षों में भारत के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है।
किन क्षेत्रों में है सहयोग?
भारत और न्यूजीलैंड व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक, खेल और संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन (WTO) और कॉमनवेल्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सहयोग करते हैं। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध पुराने हैं और अब इन्हें और मजबूत करने की कोशिश हो रही है।
व्यापार और FTA से क्या होगा फायदा?
दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिया है। इसके लागू होने के बाद भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले लगभग सभी उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म हो जाएगा। इससे भारतीय दवाइयों, कपड़ों, मशीनरी, इंजीनियरिंग उत्पादों, आभूषण और अन्य सामान को बड़ा फायदा मिलेगा।
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर तक निवेश करने की प्रतिबद्धता भी जताई है। कृषि, आईटी, हेल्थकेयर, शिक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, एविएशन और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर खुलेंगे। हालांकि भारत ने डेयरी, कुछ कृषि उत्पादों और कुछ संवेदनशील वस्तुओं को इस समझौते से बाहर रखा है ताकि घरेलू उद्योगों पर असर न पड़े।
व्यापार के आंकड़े क्या कहते हैं?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2015-16 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार 855 मिलियन डॉलर था। यह 2024-25 में बढ़कर 1.3 बिलियन डॉलर पहुंच गया, यानी लगभग 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान भारत का न्यूजीलैंड को निर्यात 711 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि सेवाओं के निर्यात में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और निवेश के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
