राम मंदिर भर्ती विवाद: ड्राइवर बना खजांची, सफाईकर्मी बने कैशियर, योग्यता पर उठे सवाल

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले करोड़ों रुपये के दान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर के वित्तीय कार्यों और चढ़ावे की व्यवस्था में बैकडोर भर्ती का एक नेटवर्क सक्रिय हो गया था

राम मंदिर दान जांच

राम मंदिर दान जांच

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले करोड़ों रुपये के दान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर के वित्तीय कार्यों और चढ़ावे की व्यवस्था में बैकडोर भर्ती का एक नेटवर्क सक्रिय हो गया था। दावा किया जा रहा है कि कई ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, जिनके पास न तो आवश्यक शैक्षणिक योग्यता थी और न ही पुलिस सत्यापन कराया गया था। उनकी नियुक्ति कथित तौर पर ट्रस्ट के कुछ प्रभावशाली पदाधिकारियों से करीबी संबंधों के आधार पर हुई थी।

मुख्य आरोपियों पर अवैध संपत्ति बनाने के आरोप

इस मामले में मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा और उसके साले अनुकल्प मिश्रा बताए जा रहे हैं। आरोप है कि लवकुश मिश्रा पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर के रूप में काम करता था। जांच में सामने आया कि अनुकल्प मिश्रा ने अयोध्या के कौशलपुरी इलाके में आलीशान मकान खरीदा, जबकि लवकुश ने अपनी पत्नी के नाम पर करीब 30 लाख रुपये का प्लॉट लेकर मकान का निर्माण शुरू कराया। अब अयोध्या विकास प्राधिकरण इन कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

मामले में ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उनके प्रभाव में ही यह पूरा नेटवर्क काम करता रहा। कुछ पूर्व कर्मचारियों का दावा है कि जिन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाने की कोशिश की, उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।

नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप

जांच के दौरान एक और गंभीर आरोप सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर में विभिन्न पदों पर भर्ती कराने के नाम पर करीब 125 कर्मचारियों से लाखों रुपये की रिश्वत ली गई। आरोप है कि ट्रस्ट में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर बेरोजगार युवाओं से बड़ी रकम वसूली गई। शुरुआती जांच में यह भी कहा गया है कि कई लोगों का उद्देश्य मंदिर के चढ़ावे और नकदी तक पहुंच बनाना था, ताकि रिश्वत में दी गई रकम की भरपाई की जा सके।

इन आरोपों के सामने आने के बाद मंदिर की भर्ती प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन और चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां सभी आरोपों की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही।

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