बड़ी ख़बर दिल्ली से है, जहां बीजेपी आलाकमान ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा की टॉप लीडरशिप के साथ अहम बैठकें की हैं।
सूत्रों की मानें तो पार्टी मुख्यालय में हुई इस बैठक में तीनों प्रदेशों की टॉप लीडरशिप जिसमें मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्रियों व अन्य वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया था, जहां राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी.एल.संतोष ने संगठन से लेकर सरकार के कामकाज और तौर तरीकों पर गहन चर्चा की ।
इसके अतिरिक्त तीनों राज्यों के प्रमुख नेताओं के साथ संगठन की स्थिति, सरकार और पार्टी के बीच समन्वय तथा जमीनी स्तर से मिल रहे फीडबैक को लेकर चर्चा की गई व जरूरी निर्देश भी दिए गए।
पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा पर विशेष फोकस
सूत्रों की मानें तो त्रिपुरा पर विशेष फोकस रहा। यहां चर्चा के साथ साथ संगठन को मजबूत बनाने, सरकार के साथ तालमेल रखने और कामकाज सुधारने पर ख़ास ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए गए।
सूत्रों की मानें तो पार्टी आलाकमान की तरफ़ से प्रदेश इकाई को एक तय समय सीमा के भीतर सुझाए गए सुधार लागू करने की हिदायत दी गई।
इसके साथ ही प्रदेश में होने वाले आगामी विलेज डेवलपमेंट काउंसिल चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। पार्टी के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि चुनाव मौजूदा सहयोगियों के साथ गठबंधन में लड़ा जाए या भाजपा अपने दम पर मैदान में उतरे।
प्रदेश में भाजपा की सहयोगी ‘टिपरा मोथा’ पार्टी ‘जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद’ के चुनावों में अकेले ही मैदान में उतरी थी, जहां उसने 28 में 24 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 4 सीटें ही मिली थीं।
सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बार VDC के चुनावों को लेकर काफी सतर्क है और गठबंधन को लेकर भी फूंक–फूंक कर कदम रखने की तैयारी में है।
वहीं जमीनी स्तर पर मिल रही शिकायतों और नेताओं के कामकाज की समीक्षा के साथ जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि सरकार और संगठन की छवि पर इसका असर न पड़े।
वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रमुख नेताओं के साथ संगठन के प्रदर्शन, सरकार–संगठन के तालमेल और आगे की राजनीतिक रणनीति पर मंथन किया जा रहा है। पूरी कवायद का मकसद समय रहते संगठन की कमजोरियों की पहचान करना और आने वाली चुनावी चुनौतियों के लिए पार्टी को तैयार करना है।
