दिल्ली में चलती बस में 16 साल की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, चालक-कंडक्टर गिरफ्तार; फिर चर्चा में निर्भया कांड

दिल्ली में चलती बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोप बस के चालक और कंडक्टर पर है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

दिल्ली में चलती बस में 16 साल की छात्रा

दिल्ली में चलती बस में 16 साल की छात्रा

देश की राजधानी दिल्ली में चलती बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोप बस के चालक और कंडक्टर पर है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना ने एक बार फिर 2012 के निर्भया कांड की याद दिला दी है, जब दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था।

4 अगस्त की बताई जा रही है घटना

मामला 4 अगस्त 2026 का बताया जा रहा है। पीड़िता मैनपुरी की रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा और 11वीं कक्षा में पढ़ती है। जानकारी के मुताबिक, वह 3 अगस्त को अपने घर से नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले चचेरे भाई के घर जाने के लिए निकली थी।

बारिश के दौरान उसने परी चौक पर ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही एक स्लीपर बस को रोका। आरोप है कि बस के चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने उसे बस में बैठाया। इसके बाद रास्ते में दोनों ने उसके साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोप है कि बाद में छात्रा को दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया गया।

शिकायत मिलने के बाद कश्मीरी गेट पुलिस ने दोनों आरोपियों को तिमारपुर की बस पार्किंग से गिरफ्तार किया। पुलिस ने बस को भी जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

पुलिस के मुताबिक, बस ने करीब 47 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस दौरान रास्ते में पुलिस की कोई चेकिंग नहीं हुई। बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे होने की बात भी सामने आई है। इस वजह से सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

2012 में हुआ था निर्भया कांड

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। गंभीर रूप से घायल युवती को बाद में सड़क किनारे फेंक दिया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन हुआ था।

मामले में छह आरोपी थे। इनमें से एक आरोपी राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी, जबकि एक नाबालिग आरोपी को किशोर न्याय कानून के तहत सुधार गृह भेजा गया था। बाकी चार दोषियों—अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता—को 20 मार्च 2020 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।

निर्भया कांड के बाद कानून में हुए बड़े बदलाव

निर्भया कांड के बाद सरकार ने महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े कानूनों में बड़े बदलाव किए। आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 के जरिए दुष्कर्म की कानूनी परिभाषा को व्यापक किया गया और कई नए अपराधों को कानून के दायरे में लाया गया।

इस कानून के तहत यौन उत्पीड़न, पीछा करना यानी स्टॉकिंग, वॉयूरिज्म और महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला जैसे अपराधों के लिए अलग प्रावधान किए गए। एसिड अटैक के लिए भी अलग धाराएं जोड़ी गईं। दुष्कर्म के ऐसे मामलों में सजा को भी कड़ा किया गया, जिनमें पीड़िता की मौत हो जाए या वह स्थायी रूप से गंभीर अवस्था में चली जाए।

कानून सख्त होने के बाद भी दिल्ली में मामले दर्ज होते रहे

निर्भया कांड के बाद दिल्ली में दुष्कर्म के मामलों की संख्या तुरंत कम नहीं हुई। 2012 में राजधानी में 706 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए थे। 2013 में यह संख्या बढ़कर 1,636 और 2014 में 2,166 हो गई। 2015 में 2,199 और 2016 में 2,155 मामले दर्ज किए गए। 2017 में 2,146, 2018 में 2,135 और 2019 में 2,168 मामले दर्ज हुए।

2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान यह संख्या घटकर 1,699 हो गई। 2021 में फिर बढ़कर 2,076 हो गई। इसके बाद 2022 में 1,204, 2023 में 1,088 और 2024 में 1,058 मामले दर्ज हुए।

NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में 1,058 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए। इसी साल महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 13,396 मामले दर्ज किए गए।

इन आंकड़ों से साफ है कि निर्भया कांड के बाद कानून और पुलिस व्यवस्था में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मौजूदा बस कांड में भी जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी होगा कि घटना कैसे हुई, बस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी रही और क्या इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं।

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