दिल्ली-NCR में जब भी तेज बारिश होती है, गुरुग्राम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आने लगते हैं। बारिश के बाद शहर की कई सड़कों पर पानी भर जाता है और लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। इससे रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों, वाहन चालकों और आम नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गुरुग्राम को देश के प्रमुख कॉर्पोरेट और आईटी हब के तौर पर जाना जाता है। यहां बड़ी-बड़ी कंपनियों के दफ्तर, ऊंची इमारतें, महंगे घर और आधुनिक सुविधाओं वाले इलाके हैं। शहर में देश की कुछ सबसे महंगी प्रॉपर्टीज भी मौजूद हैं। लेकिन तेज बारिश के बाद यही आधुनिक शहर कई जगहों पर जलभराव की समस्या से जूझता नजर आता है।
बारिश के बाद सड़कों पर भर जाता है पानी
तेज बारिश के दौरान गुरुग्राम की कई प्रमुख सड़कों और निचले इलाकों में पानी जमा हो जाता है। कई जगहों पर सड़क और पानी का अंतर समझना मुश्किल हो जाता है। इससे वाहन चालकों को काफी सावधानी से गाड़ी चलानी पड़ती है। कुछ स्थानों पर पानी इतना ज्यादा भर जाता है कि कार और दोपहिया वाहन भी फंस जाते हैं।
जलभराव का सीधा असर ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ता है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है और कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है। लोगों को थोड़ी दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है। बारिश के दौरान ऑफिस से घर लौटने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।
सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं तस्वीरें
गुरुग्राम में बारिश के बाद जलभराव और ट्रैफिक जाम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होती हैं। लोग वीडियो बनाकर शहर की स्थिति दिखाते हैं और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाते हैं। कई लोग यह भी सवाल करते हैं कि आधुनिक इमारतों और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स वाले शहर में हर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या क्यों पैदा होती है।
ड्रेनेज सिस्टम पर उठते हैं सवाल
बारिश के बाद होने वाले जलभराव की सबसे बड़ी वजहों में शहर का ड्रेनेज सिस्टम और पानी की निकासी की व्यवस्था बताई जाती है। कई इलाकों में तेज बारिश के दौरान नालियां और ड्रेन पर्याप्त पानी नहीं निकाल पाते। इससे सड़कें कुछ ही समय में पानी से भर जाती हैं।
गुरुग्राम में हर साल बारिश के दौरान ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। ऐसे में जरूरत है कि जल निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और बारिश से पहले नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई व मरम्मत पर ध्यान दिया जाए। इससे जलभराव और ट्रैफिक की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
