रांची में छात्रों और युवा अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर पहुंच चुका है। 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करने निकले हजारों छात्रों को पुलिस ने जगह–जगह बैरिकेडिंग लगाकर रोका। राजधानी में धारा 144 लागू होने के बावजूद सड़कों पर भारी संख्या में छात्र डटे हुए हैं। परीक्षा धांधली, उम्र सीमा में छूट और नई नियोजन नीति की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब सीधी राजनीतिक और प्रशासनिक लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
कहां फंसा है मुख्य पेंच?
छात्र आंदोलन में पेंच मुख्य रूप से ‘CBI जांच की मांग‘ और ‘JSSC CGL परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने‘ पर फंसा है। सरकार का कहना है कि CID और ED की जांच 90 दिनों में पूरी होगी और रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनेगा, लेकिन छात्र इसे अपर्याप्त मानकर सीधे CBI जांच पर अड़े हैं।सरकार का तर्क है कि CGL परीक्षा की प्रक्रिया हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है, इसलिए इसे सीधे रद्द नहीं किया जा सकता, जबकि छात्र इसे पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की किन मांगों पर बनी सहमति, कहां है गतिरोध
10 अगस्त तक सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में जिन मांगो पर सहमति बनी है वो इस प्रकार है:
इन मांगों पर बनी सहमति:
- 14वीं JPSC एवं 2023-25 बैकलॉग: पाई गई अनियमितताओं की CID और ED (प्रवर्तन निदेशालय) जांच करेगी।
- ACF परीक्षा रद्द: सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा को रद्द (Cancel) किया जाएगा।
- FRO परीक्षा जांच: फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा की गहन जांच होगी; गड़बड़ी मिलने पर परीक्षा रद्द की जा सकती है।
- TDPL Agency जांच: TDPL Agency द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं की जांच होगी; गड़बड़ी मिलने पर संबंधित परीक्षाएं रद्द की जाएंगी।
- JSSC CGL दोबारा जांच: JSSC CGL परीक्षा में धांधली के दावों की दोबारा जांच होगी और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।
- परीक्षा सुधार कमेटी: JPSC व JSSC परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएगी।
इन मांगों पर जारी है गतिरोध
- CBI जांच से इनकार:छात्र सभी धांधली मामलों की CBI जांच पर अड़े हैं,जबकि सरकार इसे CID, ED और न्यायिक आयोग तक सीमित रखना चाहती है।
- JSSC CGL का तत्काल रद्दीकरण नहीं: छात्र JSSC CGL परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार कोर्ट निगरानी का हवाला देकर जांच रिपोर्ट के बाद ही फैसला लेने की बात कह रही है।
- TDPL की सभी परीक्षाओं का एकमुश्त रद्दीकरण: छात्र TDPL एजेंसी की सभी परीक्षाओं को एक साथ रद्द करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार पहले जांच कराने की शर्त रख रही है।
दिन–दर–दिन कैसे भड़की रांची छात्र आंदोलन की आग?
15 जुलाई: शुरुआती सुगबुगाहट – धांधली के आरोप
JSSC और JPSC परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोप लगे। अभ्यर्थियों ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।
2 अगस्त :अंतिम अल्टीमेटम और मशाल जुलूस
छात्र संगठनों ने मिलकर रांची में विशाल मशाल जुलूस निकाला और सरकार को मांगें पूरी करने के लिए 7 दिनों की मोहलत दी।
6 अगस्त : सत्याग्रह और आमरण अनशन
छात्र प्रतिनिधि राजभवन के पास अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे। तबीयत बिगड़ने के बाद सड़कों पर आक्रोश गहरा गया।
9 अगस्त : 3 JPSC सदस्यों का इस्तीफा व वार्ता
भारी दबाव के बीच JPSC के 3 सदस्यों ने इस्तीफा दिया। सरकार के साथ 6 घंटे चली वार्ता में 98% मांगों पर सहमति का दावा हुआ, पर CBI जांच पर बात अटकी।
10 अगस्त : विधानसभा घेराव और आर–पार का रुख
हजारों छात्र विधानसभा की ओर बढ़े। बैरिकेडिंग और सुरक्षा बलों के बीच छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक CBI जांच और CGL रद्द करने का लिखित आदेश नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
