संसद के मानसून सत्र का आज आखिरी दिन है, लेकिन छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से दी गई लंबी चर्चा की पेशकश को खारिज कर दिया है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में हंगामे और नारेबाजी की आशंका बनी हुई है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि वह छात्र प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। सरकार का कहना है कि विपक्ष जिन सवालों को उठाना चाहता है, उन पर जवाब दिया जाएगा। वहीं, विपक्ष अपनी मांगों पर चर्चा कराने और सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है।
हालांकि, आखिरी दिन होने के कारण इस बात की संभावना भी बनी हुई है कि अगर सरकार और विपक्ष चर्चा की शर्तों को लेकर अंतिम समय में किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो सदन की स्थिति बदल सकती है। ऐसे में छात्र प्रदर्शन का मुद्दा संसद में चर्चा का विषय बन सकता है।
राज्यसभा में खनिज और खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी रही। इस दौरान विपक्ष की ओर से हंगामा भी देखने को मिला। दूसरी ओर, लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी के बीच कार्यवाही प्रभावित हुई। बाद में लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसद परिसर में भी सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिला। मकर द्वार के पास एनडीए और विपक्षी दलों के सांसदों ने अलग-अलग प्रदर्शन किया। दोनों पक्षों के प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी गर्म नजर आया। सांसदों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर नारे लगाए और एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
मानसून सत्र के आखिरी दिन सबकी नजर इस बात पर है कि छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति बनती है या नहीं। अगर सहमति नहीं बनी, तो सत्र का अंतिम दिन भी हंगामे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच खत्म होने की संभावना है।
