दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के विरोध में चल रहा 36 दिनों का उग्र आंदोलन हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में जारी इस विरोध प्रदर्शन को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अचानक इस्तीफा स्वीकार करने के फैसले ने कई राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था। लेकिन अब पंजाब पुलिस के एक सनसनीखेज खुलासे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे के असली और बेहद संवेदनशील कारणों से पर्दा उठा दिया है।
इस फैसले के पीछे सिर्फ छात्रों का आक्रोश ही नहीं, बल्कि राष्ट्र सुरक्षा से जुड़े कुछ बेहद गंभीर और संवेदनशील इनपुट थे।
पाकिस्तान की ISI रची रही थी जंतर-मंतर पर हिंसा की खूनी साजिश
पंजाब पुलिस की अमृतसर कमिश्नरेट द्वारा पाकिस्तान समर्थित खुफिया एजेंसी ISI के दो बड़े क्रॉस-बॉर्डर आतंकवादी मॉड्यूलों के भंडाफोड़ से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव और अमृतसर के पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने पुष्टि की कि विदेशी आतंकी हैंडलर्स ने जंतर-मंतर पर धरना दे रहे लाखों छात्रों के आंदोलन का फायदा उठाकर दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा और दंगे भड़काने की साजिश रची थी।
खुलासे के अनुसार, ISI हैंडलर ने पंजाब से स्थानीय युवाओं और नाबालिगों को पैसों व अन्य प्रलोभनों के जरिए भर्ती किया। इन युवाओं को जंतर-मंतर भेजा गया, जहां उन्हें पेट्रोल बम (Molotov Cocktails) बनाने की सामग्री और अन्य रसद मुहैया कराई गई। योजना यह थी कि भीड़भाड़ वाले प्रदर्शन स्थल पर पेट्रोल बमों से विस्फोट कर भगदड़ मचाई जाए और केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी जन-आक्रोश को हिंसक रूप दे दिया जाए। हालांकि, जंतर-मंतर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखकर आतंकवादी अपने नापाक मंसूबों में नाकाम रहे और अंजाम दिए बिना लौट गए।
छात्रों की ढाल के पीछे छिपा था बड़ा आतंकी नेटवर्क
पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों (जिनमें चार नाबालिग भी शामिल हैं) के पास से 3 अवैध पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस, 4 पेट्रोल बोतल बम और माचिस/लाइटर बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि एक अन्य मॉड्यूल को दिल्ली और पंजाब में सुरक्षा प्रतिष्ठानों, पुलिस स्टेशनों, वर्दीधारी कर्मियों और संवेदनशील रेलवे ट्रैक के आसपास खुफिया निगरानी कैमरे (Surveillance Cameras) लगाकर रेकी करने का काम सौंपा गया था।
खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्राथमिकता देश की सुरक्षा, लाखों निर्दोष छात्रों की जान-माल की रक्षा और राष्ट्रीय स्थिरता थी। ऐसे में जरुरी था कि तुंरत स्थिति को काबू में लाया जाए और वो छात्रों को वापिस भेजे बिना नहीं हो सकता था।
अंतरराष्ट्रीय साजिश को निष्फल किया
जंतर-मंतर पर छात्रों का भारी जमावड़ा ISI के लिए एक आसान ‘सॉफ्ट टारगेट’ बन चुका था। यदि किसी भी कारणवश वहां कोई छोटा विस्फोट या हिंसा हो जाती, तो निर्दोष छात्रों की जान जा सकती थी और पूरे देश में अनियंत्रित अराजकता फैल जाती। पीएम मोदी ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए छात्रों की सबसे प्रमुख मांग—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा—तुरंत स्वीकार कर लिया। इस्तीफा मंजूर होते ही CJP ने आंदोलन वापस ले लिया और छात्र सुरक्षित अपने घरों को लौट गए, जिससे ISI की खूनी साजिश पूरी तरह नाकाम हो गई। गौरतलब है कि सरकार और सीजेपी (CJP) की वार्ता के बाद हुई प्रेस कांफ्रेंस में जितेन्द्र सिंह बार बार आंदोलन तुंरत वापिस लेने के बात कहने के लिए बार बार जोर डाल रहे थे ।
राष्ट्रीय सुरक्षा बलों को फ्री-हैंड देना
जब तक जंतर-मंतर पर हजारों युवाओं की भीड़ मौजूद थी, तब तक सुरक्षा एजेंसियां कड़े कदम उठाने या संदिग्धों के खिलाफ खुली कार्रवाई करने से हिचकिचा रही थीं। आंदोलन समाप्त होते ही पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को देशव्यापी आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त करने और सीमा पार बैठे आकाओं के नेटवर्क पर निर्बाध कार्रवाई करने की खुली छूट मिल गई। *
युवाओं के भरोसे और प्रशासनिक साख की बहाली
NEET परीक्षा लीक प्रकरण से देश के लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों का गुस्सा चरम पर था। प्रधानमंत्री यह भली-भांति समझते थे कि असंतुष्ट युवा देश की आंतरिक स्थिरता के लिए संवेदनशील स्थिति पैदा कर सकते हैं। ऐसे में नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र स्वीकार कर सरकार ने युवाओं को यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह उनकी चिंताओं और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पंजाब पुलिस के इस खुलासे से यह साफ हो गया है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक राजनीतिक ही नहीं बल्कि रणनीतिक समझौता भी था ।
