आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय बैठक हुई। इसमें देश और समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। RSS के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने बताया कि बैठक में बदलती आबादी, युवाओं की समस्याएं, नशे की बढ़ती समस्या, बाढ़ राहत और देश के विकास जैसे विषयों पर विचार किया गया।
बदलती आबादी को लेकर चिंता
सीआर मुकुंद ने कहा कि दुनिया के कई देश तेजी से बढ़ती उम्र की आबादी और आबादी के असंतुलन की समस्या का सामना कर रहे हैं। भारत के पास फिलहाल दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, लेकिन अगले तीन-चार दशकों में भारत में भी बुजुर्गों की संख्या बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि देश को इस बदलाव के लिए अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए, ताकि भविष्य में आने वाली चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
युवाओं की समस्याओं पर भी चर्चा
बैठक में युवाओं की शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़ी चिंताओं पर भी चर्चा हुई। सीआर मुकुंद ने NEET जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि समस्याएं केवल किसी एक परीक्षा या सरकार तक सीमित नहीं हैं। देश की अलग-अलग व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है।
जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि RSS इन घटनाओं को सिर्फ भ्रष्टाचार के नजरिए से नहीं देखता, बल्कि व्यवस्था में मौजूद कमियों पर भी विचार करता है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार के साथ समाज की भी भूमिका जरूरी है।
असम की बाढ़ और राहत कार्य पर चर्चा
बैठक में असम की बाढ़ और वहां चल रहे राहत कार्यों पर भी चर्चा हुई। मुकुंद ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि RSS से जुड़े कई संगठनों और स्वयंसेवकों ने बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद की।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सेवा भारती, भारतीय किसान संघ, नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन और आरोग्य भारती से जुड़े कार्यकर्ताओं ने राहत और पुनर्वास के काम में योगदान दिया।
विकास ऐसा हो जो पर्यावरण का भी ध्यान रखे
RSS नेता ने कहा कि भारत का विकास मॉडल आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी होना चाहिए। विकास का फायदा समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाते समय प्रकृति और पर्यावरण का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही स्थानीय संसाधनों और क्षमताओं को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
गांवों तक पहुंच रहा नशा
बैठक में देश में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर भी चिंता जताई गई। मुकुंद ने कहा कि नशे की समस्या अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और गांवों में भी इसका असर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चों और युवाओं में नशे की बढ़ती समस्या गंभीर चिंता का विषय है। इससे निपटने के लिए परिवार, समाज और संगठनों को मिलकर काम करना होगा।
40 से ज्यादा संगठनों के काम की समीक्षा
RSS की यह बैठक हर साल आयोजित होती है। इसमें संघ से जुड़े 40 से ज्यादा संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और देश-समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
इस बार बैठक में आने वाले समय में संगठन के काम को और आगे बढ़ाने और ज्यादा लोगों तक पहुंचने की योजना पर भी विचार किया गया। मुकुंद के मुताबिक, RSS युवाओं के बीच भी लगातार काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि करीब 21 हजार युवा प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल हुए हैं।
RSS का कहना है कि देश का भविष्य युवाओं पर निर्भर है। इसलिए युवाओं को सामाजिक कार्यों से जोड़ना और उनकी भागीदारी बढ़ाना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
