समुद्र मंथन योजना क्या है? 84,084 करोड़ रुपये से समुद्र की गहराई में कैसे खोजे जाएंगे तेल-गैस के भंडार

समुद्र मंथन योजना' के लिए 84,084 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस राशि का इस्तेमाल वित्तीय वर्ष 2030-31 तक किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य समुद्र की गहराई में छिपे कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज करना और उनका उत्पादन बढ़ाना है।

समुद्र मंथन योजना को नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन

समुद्र मंथन योजना को नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन

भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समुद्र मंथन योजना’ के लिए 84,084 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस राशि का इस्तेमाल वित्तीय वर्ष 2030-31 तक किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य समुद्र की गहराई में छिपे कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज करना और उनका उत्पादन बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में तेल और गैस के लिए विदेशों पर भारत की निर्भरता कम हो सकती है।

क्या है समुद्र मंथन योजना?

समुद्र मंथन योजना को नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन या राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना भी कहा जाता है। इसके तहत समुद्र के गहरे हिस्सों में मौजूद तेल और गैस के भंडार खोजे जाएंगे। यह काम आधुनिक तकनीक की मदद से किया जाएगा, क्योंकि समुद्र की गहराई में खोज करना जमीन की तुलना में कहीं अधिक कठिन, महंगा और जोखिम भरा होता है।

सरकार का कहना है कि भारत के कई समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस मिलने की अच्छी संभावना है। इनमें कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी बेसिन और अंडमान क्षेत्र प्रमुख हैं।

84,084 करोड़ रुपये कहां खर्च होंगे?

सरकार ने इस मिशन के लिए अलग-अलग कार्यों पर बजट तय किया है।

डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन क्यों है चुनौतीपूर्ण?

जमीन के नीचे तेल और गैस की खोज में ही कई साल लग जाते हैं, लेकिन समुद्र की गहराई में यह काम और भी कठिन होता है। इसमें आधुनिक मशीनों, विशेष जहाजों और अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत पड़ती है। एक गहरे समुद्री कुएं को विकसित करने में 1,200 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये तक खर्च आ सकता है।

यही वजह है कि निजी कंपनियां ऐसे जोखिम वाले प्रोजेक्ट में कम रुचि दिखाती हैं। इसलिए सरकार खुद निवेश कर इस मिशन को आगे बढ़ा रही है।

इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के रूप में विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय तनाव, युद्ध या आपूर्ति में बाधा आने पर इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिम और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। इसी उद्देश्य से समुद्र मंथन योजना को तेजी से मंजूरी दी गई।

योजना की शुरुआत कब हुई थी?

इस मिशन की घोषणा सबसे पहले 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में की थी। उन्होंने कहा था कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन के तहत कई नई खोजें हुई हैं। सरकार ने अन्वेषण के लिए लाखों वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र उपलब्ध कराया है। इसमें अंडमान-निकोबार बेसिन जैसे नए और संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र भी शामिल हैं।

सरकार को उम्मीद है कि समुद्र मंथन योजना के सफल होने से भारत में घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ेगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और लंबे समय में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

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