रक्षा मंत्रालय टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) के ढांचे में एक बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। मंत्रालय की योजना है कि AI डेवलपर्स, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और इनफॉर्मेशन वॉरफेयर स्पेशलिस्ट्स जैसे सिविलियन टेक प्रोफेशनल्स को सीधे इस पार्ट-टाइम फोर्स का हिस्सा बनाया जाए। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सेना की ओर से रखा गया।
टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) का मौजूदा ढांचा
फिलहाल टेरिटोरियल आर्मी में करीब 44,400 कार्मिक और 59 यूनिट्स कार्यरत हैं, जिनमें इन्फैंट्री, इंजीनियरिंग और इकोलॉजिकल टास्क फोर्स की यूनिट्स शामिल हैं। अभी तक इसमें नागरिक अपनी कॉर्पोरेट या सिविलियन नौकरी करते हुए ही सेना से जुड़ते आए हैं। नए प्रस्ताव में तकनीकी विशेषज्ञों के लिए डायरेक्ट इंडक्शन और मानद कमीशन का रास्ता खोलने की बात कही जा रही है।
आखिर क्यों जरूरी है Territorial Army में यह बदलाव
सेना के भीतर यह राय बन रही है कि आज का युद्ध सिर्फ सीमा पर हथियारों तक सीमित नहीं रह गया — डेटा, एल्गोरिदम और साइबर स्पेस अब जंग के नए मैदान बन चुके हैं। हाल के संघर्षों ने इस बदलाव को और स्पष्ट कर दिया है। दिक्कत यह है कि AI और साइबर टेक्नोलॉजी में सबसे उन्नत रिसर्च और टैलेंट फिलहाल प्राइवेट टेक सेक्टर के पास केंद्रित है।
यही वजह है कि यह प्रस्ताव दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है — प्रोफेशनल्स अपनी टेक कंपनी की नौकरी छोड़े बिना राष्ट्रीय सुरक्षा में सीधी भागीदारी कर सकेंगे, जबकि सेना को भारी स्थायी खर्च उठाए बिना देश के शीर्ष टैलेंट की सेवाएं मिलेंगी।
टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) है क्या
टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सेना की एक पार्ट-टाइम रिज़र्व फोर्स है, जिसे “नागरिकों की सेना” के नाम से भी जाना जाता है। इसमें शामिल लोग साल में कुछ हफ्तों या महीनों की ट्रेनिंग-सेवा देते हैं और बाकी समय अपनी सामान्य नौकरी या व्यवसाय में लगे रहते हैं।
इसका गठन संसद द्वारा पारित टेरिटोरियल आर्मी एक्ट, 1948 के तहत 18 अगस्त 1948 को हुआ था। इसका औपचारिक उद्घाटन भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी ने 9 अक्टूबर 1949 को किया था, और इसी वजह से हर साल 9 अक्टूबर को टेरिटोरियल आर्मी डे मनाया जाता है। पूर्व क्रिकेटर एमएस धोनी, पूर्व निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और नेता अनुराग ठाकुर जैसे नाम इसमें मानद पद पर रह चुके हैं।
AI-साइबर एक्सपर्ट्स के लिए कैसे खुलेगा रास्ता
अगर प्रस्तावित नियम लागू होते हैं, तो तकनीकी विशेषज्ञों के लिए डायरेक्ट इंटरव्यू और विशेष हैकाथॉन के जरिए एंट्री का अलग रास्ता तैयार किया जाएगा। हालांकि, सामान्य नागरिकों के लिए टेरिटोरियल आर्मी जॉइन करने की मौजूदा प्रक्रिया अब भी यही है:
पात्रता की शर्तें
- भारतीय नागरिकता अनिवार्य
- आयु सीमा 18 से 42 वर्ष
- किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक
- किसी संस्थान में कार्यरत होना या अपना व्यवसाय होना जरूरी (बेरोजगार उम्मीदवार पात्र नहीं, क्योंकि यह पार्ट-टाइम सेवा है)
- शारीरिक व मानसिक रूप से पूरी तरह फिट होना जरूरी
चयन प्रक्रिया
jointerritorialarmy.gov.in पर नोटिफिकेशन जारी होने पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है, जिसके बाद रीजनिंग, गणित, सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी की लिखित परीक्षा होती है। इसे पास करने वालों का इंटरव्यू संबंधित टीए ग्रुप हेडक्वार्टर द्वारा लिया जाता है, फिर SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट से गुजरना होता है। चयन के बाद पहले साल एक महीने की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग और उसके बाद हर साल दो महीने का एनुअल ट्रेनिंग कैंप अनिवार्य होता है।
