अमेरिका ने यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती संगठन के साथ सीधे संपर्क का रास्ता अपनाया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज कर रहा है। इससे यमन को लेकर अमेरिका और सऊदी अरब की रणनीति में अंतर दिखाई देने लगा है।
अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में बातचीत होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत का मुख्य उद्देश्य मई 2025 में अमेरिका और हूतियों के बीच हुए युद्धविराम को बनाए रखना और लाल सागर के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही जारी रखना था। ओमान ने इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ बढ़ाए हमले
एक तरफ अमेरिका हूतियों से बातचीत कर रहा है, वहीं सऊदी अरब ने यमन में उनके ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। सऊदी अरब की ओर से हवाई हमले बढ़ाए गए हैं। हालांकि, उसके समर्थन वाली सेनाओं को जमीन पर हूतियों के खिलाफ निर्णायक बढ़त हासिल करने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
हूती संगठन अभी भी यमन के लाल सागर तट के कई इलाकों पर प्रभाव रखता है। इसके कारण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर से गुजरने वाले समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
अमेरिका की प्राथमिकता समुद्री रास्तों की सुरक्षा
अमेरिका का ध्यान फिलहाल लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने पर दिखाई दे रहा है। वाशिंगटन सऊदी अरब के साथ अपने व्यापक संबंधों के बावजूद यमन में रियाद के सैन्य अभियान में सीधे शामिल होने से बच रहा है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 14 सितंबर को पुष्टि की थी कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे बातचीत कर रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी कहा कि लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना अमेरिका के प्रमुख हितों में शामिल है।
हूतियों ने युद्धविराम जारी रखने की इच्छा जताई
रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिकी प्रतिनिधियों से कहा कि वे अमेरिका के साथ मौजूदा युद्धविराम जारी रखना चाहते हैं। उनका दावा है कि सऊदी अरब के साथ दोबारा शुरू हुई लड़ाई के कारण सऊदी से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया गया, जबकि अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों को बाब अल-मंदेब से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है।
हालांकि, हूतियों के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
ओमान की बढ़ी भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में ओमान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मस्कट लंबे समय से मध्य-पूर्व के अलग-अलग पक्षों के बीच बातचीत के लिए संपर्क का माध्यम रहा है। 15 सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल-बुसैदी से भी क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर बातचीत की थी।
अमेरिका और सऊदी अरब की अलग-अलग प्राथमिकताएं
मौजूदा स्थिति से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका और सऊदी अरब की यमन को लेकर तत्काल प्राथमिकताएं अलग हैं। सऊदी अरब का मुख्य लक्ष्य अपनी सीमा और क्षेत्र को हूती हमलों से सुरक्षित रखना और संगठन की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। वहीं अमेरिका का जोर लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्ष को व्यापक युद्ध में बदलने से रोकने पर है।
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच इस मुद्दे पर मतभेद का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के संबंध खत्म हो गए हैं। लेकिन यमन को लेकर दोनों की रणनीति में अंतर जरूर दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में अगर अमेरिका और हूतियों के बीच युद्धविराम टूटता है, तो लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा को लेकर तनाव फिर बढ़ सकता है।
