मध्य प्रदेश की एक गंदी नदी को अपने दम पर साफ करने वाले 21 साल के नौजवान ने जब सोशल मीडिया पर मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी को यह दो-टूक जवाब दिया, तो यह साफ हो गया कि ज़मीन पर काम करने वाले किसी भी ‘नैरेटिव’ के मोहताज नहीं होते। जिस तरह उसने महीनों तक गंदे पानी में उतरकर कचरा हटाया, उसी बेबाकी और सादगी से उसने इंटरनेट पर फैलाए जा रहे राजनीतिक कचरे की भी सफाई कर दी। बिना किसी तीखेपन, लेकिन बेहद ठोस शब्दों में उसने बता दिया कि असली बदलाव भाषणबाजी से नहीं, जिम्मेदारी उठाने से आता है।
बिट्टू तबाही कौन है?
इंटरनेट की दुनिया में ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। सुरेंद्र मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले हैं और महज़ 21 साल के एक बीएससी (BSc) के छात्र हैं। सोशल मीडिया पर जहां युवा रील्स और व्यूज के पीछे भागते हैं, वहीं सुरेंद्र ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल समाज की एक गंभीर समस्या को उजागर करने और उसे खुद ठीक करने के लिए किया। उनके इसी ज़मीनी जुनून ने उन्हें रातों-रात पूरे देश में एक नई पहचान दिला दी।
बिट्टू तबाही ने क्या किया?
सुरेंद्र की इस अनोखी मुहिम की शुरुआत इस साल 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन हुई थी। अपने आसपास फैली गंदगी, कचरे के ढेरों और बदहाल व्यवस्था को देखकर वह लंबे समय से परेशान थे। लोग शिकायतें तो बहुत करते थे, लेकिन कोई आगे नहीं आता था—न तो आम नागरिक और न ही नगर पालिका प्रशासन।
किसी और के भरोसे बैठने के बजाय सुरेंद्र ने खुद मैदान में उतरने का फैसला किया। ब्यावरा से गुजरने वाली अजनार नदी कभी शहर की जीवनरेखा हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ वह प्लास्टिक कचरे, सड़ी-गली जलकुंभी और गंदगी का नाला बन चुकी थी।
सुरेंद्र बिना किसी भारी मशीनरी, बिना किसी सुरक्षा उपकरण और बिना किसी सरकारी फंड के, सिर्फ नंगे हाथों से नदी के गंदे पानी में उतर गए। पिछले सात महीनों की कड़ी धूप, बदबू और गंदगी के बीच उन्होंने अकेले ही प्लास्टिक की बोतलें, खरपतवार और टनों कचरा नदी से बाहर निकाला। उनका यह जज्बा इतना बड़ा था कि नीदरलैंड्स के प्रसिद्ध एनजीओ ‘द ओशन क्लीनअप’ के संस्थापक और सीईओ बोयान स्लैट ने भी उनके काम की तारीफ की और उन्हें नौकरी तक की पेशकश कर दी।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
महीनों की इस अथक मेहनत का असर यह हुआ कि अजनार नदी का रूप बदलने लगा और सुरेंद्र के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इस ज़मीनी बदलाव की गूंज भोपाल तक पहुंची। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुरेंद्र को मुख्यमंत्री आवास पर आमंत्रित किया।
शनिवार को हुई इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने सुरेंद्र के जज्बे की सराहना की और कहा कि ‘बड़ा बदलाव लाने के लिए हमेशा भीड़ की जरूरत नहीं होती, इसकी शुरुआत किसी एक समर्पित व्यक्ति की पहल से भी हो सकती है।’ मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मुलाकात का एक वीडियो आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया। यहीं से राजनीतिक और वैचारिक बहस का दौर शुरू हो गया।
ध्रुव राठी ने क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री और सुरेंद्र की इस मुलाकात पर चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी ने टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए। राठी ने इसे सरकार द्वारा क्रेडिट हथियाने की कोशिश करार दिया।
ध्रुव राठी ने कमेंट करते हुए लिखा:
“आ गए क्रेडिट लेने.. सारा काम एक लड़के ने किया और जब वायरल हुआ तो उसे बुला लिया फोटोशूट के लिए। क्या कर रही है सरकार? कुछ नहीं, सिर्फ पीआर कर रही।”
ध्रुव राठी ने सुरेंद्र के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार पहले से ही स्वच्छता से जुड़े काम कर रही है। राठी का सीधा आरोप था कि ज़मीनी स्तर पर काम एक आम लड़के ने अकेले दम पर किया, जबकि सरकार केवल सोशल मीडिया पर इसका प्रचार और खुद की छवि चमकाने का काम कर रही है।
कैसे बिट्टू तबाही ने ध्रुव राठी को दिया संयमित मगर करारा जवाब?
ध्रुव राठी के इस तीखे कमेंट के बाद सुरेंद्र यानी ‘बिट्टू तबाही’ ने जो जवाब दिया, उसने सबका दिल जीत लिया। बिना किसी आक्रोश के, पूरी विनम्रता और परिपक्वता के साथ सुरेंद्र ने ध्रुव राठी के कमेंट पर ही पलटवार किया।
सुरेंद्र ने लिखा:
“ध्रुव भैया क्रेडिट लेने की बात नहीं है, सरकार ने पहले भी मेरे काम को सराहा है। बात यहां सिविक सेंस (नागरिक चेतना) की है; मैं बस यह चाहता हूं कि लोग भी अपनी जिम्मेदारी समझें, और मेरी तरह स्वच्छता के लिए आगे आएं।”
सुरेंद्र का यह जवाब उस पूरी सोच पर सीधा प्रहार था, जो हर काम को सिर्फ सरकार बनाम विपक्ष या क्रेडिट की राजनीति के चश्मे से देखती है। सुरेंद्र ने बहुत साफ कर दिया कि उनका मकसद किसी पर ठीकरा फोड़ना नहीं, बल्कि नागरिकों को जगाना है। जब तक लोग खुद कचरा फेंकना बंद नहीं करेंगे और अपने स्तर पर जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक नदियां सिर्फ सरकारों के भरोसे साफ नहीं हो सकतीं।
सोशल मीडिया पर जहां एक छोटी सी बात पर ट्रोलिंग और बहस छिड़ जाती है, वहां 21 साल के इस युवा ने यह साबित कर दिया कि असली काम नदी से कचरा निकालने का है, और अगर सोच साफ हो, तो सोशल मीडिया का कचरा भी बिना किसी हंगामे के साफ किया जा सकता है।
