भारत एक बार फिर BRICS की मेजबानी कर रहा है। 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS Summit कई मायनों में 2016 के गोवा शिखर सम्मेलन से बिल्कुल अलग है। दस साल पहले भारत जब आखिरी बार BRICS का मेजबान बना था, तब यह पांच देशों का समूह था। आज इसमें 11 पूर्ण सदस्य हैं और इसका भौगोलिक दायरा भी कई गुना बढ़ चुका है। हांलाकि भारत ने साल 2021 में भी BRICS की मेजबानी की थी पर उस वक्त ये समिट कोविड की वजह से वर्चुएली हुआ था।
2016 का BRICS मुख्य रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका यानी BRICS-5 था। गोवा में 15-16 अक्टूबर 2016 को हुई बैठक में इन पांच देशों ने आतंकवाद, वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर जोर दिया था। उस समय BRICS खुद को पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक आवाज के तौर पर स्थापित कर रहा था।
2016 बनाम 2016 कैसे बदला BRICS
2026 में तस्वीर बदल चुकी है। 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE BRICS में शामिल हुए और जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बना। यानी 2016 के पांच देशों से बढ़कर समूह अब 11 देशों का हो चुका है।
अगर 2016 के BRICS का नक्शा देखें तो इसमें दक्षिण अमेरिका से ब्राजील, यूरोप-एशिया से रूस और चीन-भारत तथा अफ्रीका से दक्षिण अफ्रीका था। 2026 में इसमें मध्य-पूर्व की बड़ी ऊर्जा शक्तियां—सऊदी अरब, UAE और ईरान—शामिल हैं। मिस्र और इथियोपिया के आने से अफ्रीका में BRICS की मौजूदगी बढ़ी है, जबकि इंडोनेशिया के जुड़ने से दक्षिण-पूर्व एशिया में भी इसका विस्तार हुआ है।
यानी BRICS अब केवल पांच बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच नहीं रह गया। इसका नेटवर्क अब तेल और गैस, समुद्री व्यापार, अफ्रीकी बाजार, एशियाई मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल साउथ के बड़े हिस्से को जोड़ता है। 2026 में 11 सदस्य देशों के अलावा BRICS के पार्टनर देशों का नेटवर्क भी बन चुका है। इसका मतलब है कि संगठन का प्रभाव उसकी औपचारिक सदस्यता से भी बड़ा हो गया है। आज BRICS करीब आधी दुनिया की आबादी और PPP के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
2016 से 2026: पांच मूल देशों की अर्थव्यवस्था कितनी बदली?
सबसे दिलचस्प बदलाव BRICS के मूल पांच देशों की आर्थिक ताकत में आया है। विश्व बैंक के 2016 के आंकड़ों और IMF के 2026 के अनुमानों को देखें तो तस्वीर काफी बदलती है।
| देश | GDP 2016 | GDP 2026 | क्या बदला? |
|---|
| चीन | करीब $11.46 ट्रिलियन | करीब $20.85 ट्रिलियन | दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग ताकत और बढ़ी |
| भारत | करीब $2.29 ट्रिलियन | करीब $4.15 ट्रिलियन | दुनिया की प्रमुख तेज-growing बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल |
| ब्राजील | करीब $1.80 ट्रिलियन | करीब $2.64 ट्रिलियन | कृषि, कमोडिटी और ऊर्जा में बड़ा प्रभाव |
| रूस | करीब $1.28 ट्रिलियन | करीब $2.66 ट्रिलियन | पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद ऊर्जा और रक्षा शक्ति बरकरार |
| दक्षिण अफ्रीका | करीब $0.30 ट्रिलियन | करीब $0.48 ट्रिलियन | अफ्रीका में महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक भूमिका |
चीन: BRICS का सबसे बड़ा आर्थिक इंजन
2016 में चीन की अर्थव्यवस्था करीब 11.5 ट्रिलियन डॉलर थी। 2026 में IMF के अनुमान के मुताबिक यह करीब 20.85 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। यानी आकार के लिहाज से चीन की अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी हो गई।
लेकिन बदलाव सिर्फ GDP का नहीं है। चीन अब इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग में पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि आज BRICS के भीतर चीन का वजन बाकी मूल सदस्यों से बहुत ज्यादा है।
भारत: सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था
भारत की GDP 2016 में करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2026 में IMF के अनुमान के अनुसार करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। इस दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में रहा है।
लेकिन भारत की अहमियत सिर्फ GDP में नहीं बढ़ी। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI, अंतरिक्ष कार्यक्रम, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और सेवाओं के साथ भारत अब BRICS में चीन के सामने एक अलग आर्थिक और रणनीतिक धुरी बन चुका है। IMF के मुताबिक 2026 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि करीब 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रूस: अर्थव्यवस्था से ज्यादा रणनीतिक ताकत
रूस की कहानी अलग है। 2016 में उसकी nominal GDP करीब 1.28 ट्रिलियन डॉलर थी। 2026 में यह करीब 2.66 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है। लेकिन इन आंकड़ों के पीछे सिर्फ आर्थिक विस्तार की कहानी नहीं है। 2014 के बाद पश्चिमी प्रतिबंध, 2022 में यूक्रेन युद्ध और उसके बाद पश्चिम से बढ़ते आर्थिक अलगाव ने रूस की वैश्विक स्थिति बदल दी। इसके बावजूद रूस ऊर्जा, परमाणु तकनीक, रक्षा और कच्चे माल के कारण BRICS में बेहद महत्वपूर्ण है।
अब रूस के लिए BRICS सिर्फ आर्थिक मंच नहीं बल्कि पश्चिमी दबाव के बीच वैकल्पिक आर्थिक और कूटनीतिक नेटवर्क का हिस्सा भी है। IMF का 2026 अनुमान रूस की वास्तविक वृद्धि करीब 1.1 प्रतिशत बताता है।
ब्राजील: कमोडिटी पावर से ग्लोबल साउथ की आवाज
ब्राजील की GDP 2016 में करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर थी और 2026 में लगभग 2.64 ट्रिलियन डॉलर अनुमानित है। कृषि, सोयाबीन, मांस, लौह अयस्क, तेल और अन्य कमोडिटीज के कारण ब्राजील BRICS में खाद्य और प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी ताकत है।
ब्राजील की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लैटिन अमेरिका में BRICS की सबसे बड़ी राजनीतिक और आर्थिक आवाज है।
दक्षिण अफ्रीका: बड़ा रणनीतिक महत्व
दक्षिण अफ्रीका की GDP 2016 में करीब 300 अरब डॉलर के आसपास थी। 2026 में IMF के अनुमान के मुताबिक यह करीब 480 अरब डॉलर है। आर्थिक वृद्धि चीन या भारत की तरह तेज नहीं रही, लेकिन BRICS में उसका महत्व उसके GDP से कहीं ज्यादा है।
दक्षिण अफ्रीका के जरिए BRICS को अफ्रीका में राजनीतिक पहुंच और दक्षिणी अफ्रीका के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों तक रणनीतिक जुड़ाव मिलता है। 2026 में भी दक्षिण अफ्रीका की वास्तविक GDP वृद्धि करीब 1 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है।
BRICS की राजनीति भी 2016 जैसी नहीं रही
2016 में BRICS के भीतर मतभेद जरूर थे, लेकिन आज चुनौती कहीं ज्यादा जटिल है। चीन और भारत के बीच सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है। रूस यूक्रेन युद्ध के बाद से पश्चिम से टकराव की स्थिति में है। ईरान और UAE एक ही संगठन में हैं, लेकिन 2026 में मध्य-पूर्व के युद्ध ने दोनों की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
यही वजह है कि 2026 का BRICS विस्तार जितनी ताकत लेकर आया है, उतनी ही जटिलता भी लेकर आया है। सितंबर 2026 में ईरान युद्ध के बीच ईरान और UAE की अलग-अलग रणनीतिक स्थिति BRICS की एकजुटता की परीक्षा ले रही है।
यही वजह है कि 2026 में भारत की मेजबानी का महत्व 2016 से कहीं ज्यादा है। तब भारत पांच देशों के समूह की बैठक की मेजबानी कर रहा था। अब दिल्ली में भारत ऐसे मंच की मेजबानी कर रहा है जिसमें दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, ऊर्जा शक्तियों और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण देशों का एक साथ प्रतिनिधित्व है।
लेकिन BRICS की असली परीक्षा यह होगी कि इतने अलग-अलग हितों वाले 11 देश क्या किसी साझा आर्थिक और राजनीतिक एजेंडे पर वास्तव में साथ चल सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो BRICS आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यवस्था में पश्चिमी संस्थाओं के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक ज्यादा बहुध्रुवीय दुनिया की सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक बन सकता है।
