ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर नजर, 2020 के बाद पहली बड़ी बैठक संभव

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना भी जताई जा रही है।

ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग

ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग

साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। अब करीब छह साल बाद भारत और चीन के बीच रिश्तों को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना भी जताई जा रही है।

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली आ सकते हैं शी जिनपिंग

भारत इस साल 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख नेता शामिल होंगे। इसी सिलसिले में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की चर्चा है।

अगर शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंचते हैं, तो 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। हालांकि, अभी तक भारत और चीन के विदेश मंत्रालयों की ओर से मोदी-जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

गलवान के बाद बिगड़ गए थे रिश्ते

जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इस घटना में दोनों देशों के सैनिकों की जान गई थी। इसके बाद भारत और चीन के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां बढ़ीं और सीमा पर लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी रही।

भारत ने चीन के साथ आर्थिक और कारोबारी संबंधों को लेकर भी कई सख्त कदम उठाए। वहीं, सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत लगातार जारी रही।

धीरे-धीरे कम हुआ सीमा तनाव

पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए सीमा पर तनाव कम करने की कोशिश हुई है। कई संवेदनशील इलाकों से सैनिकों की वापसी और गश्त को लेकर भी सहमति बनी है।

ऐसे माहौल में अगर प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात होती है, तो इसे भारत-चीन संबंधों के लिए अहम माना जाएगा। पूरी दुनिया की नजरें इस संभावित बैठक पर टिकी हैं। इससे सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के भविष्य के संबंधों को लेकर आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं।

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