चुनाव आयोग में कथित मतभेद और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच शनिवार, 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ बैठक की। यह बैठक इसलिए भी अहम रही क्योंकि द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, Form 6 और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे।
बैठक के बाद चुनाव आयोग ने विस्तृत प्रेस नोट जारी कर विवाद से जुड़े कई मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। सबसे अहम बात यह रही कि आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए।
SIR को लेकर EC की सफाई क्या है?
आयोग के मुताबिक, 24 जून 2025 को जारी SIR का आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करता था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई और बाद में पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे आगे बढ़ाया गया। आयोग ने कहा कि इस आदेश को तीनों सदस्यों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी।
EC ने यह भी कहा कि अक्टूबर 2025 में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा मई 2026 में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी किए गए शेड्यूल भी सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे।
‘Unmapped’ और ‘Logical Discrepancy’ वाले मतदाताओं का क्या होगा?
SIR के दौरान जिन मतदाताओं को ‘unmapped’ या ‘logical discrepancy’ के आधार पर नोटिस मिला है, उनके लिए आयोग ने प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब ऐसे मतदाताओं को दस्तावेज लेकर ERO या AERO कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। BLO उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद Electoral Registration Officer यानी ERO मामले पर फैसला करेगा।
आयोग ने कहा है कि सामान्य तौर पर ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए ERO/AERO कार्यालय नहीं बुलाया जाएगा। केवल असाधारण परिस्थितियों में सुनवाई होगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मतदाता परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत भी कर सकता है।
Form 6 पर क्या कहा EC ने?
नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form 6 को लेकर भी विवाद सामने आया था। Indian Express की रिपोर्ट में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से Form 6 में किए गए बदलावों पर आपत्ति का उल्लेख किया गया था। अब आयोग ने कहा है कि SIR के लिए Form 6 के साथ लगाई गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं, जब SIR नहीं चल रहा होगा, तब Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित संबंधित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
ECINet पर भी बनेगी कमेटी
चुनावी डेटा और डिजिटल सिस्टम ECINet को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने एक समिति बनाने का फैसला किया है। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ Deputy Election Commissioner करेंगे और इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा।
समिति यह देखेगी कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। आयोग ने कहा कि राज्य के Chief Electoral Officers से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में पहले ही कई बदलाव किए जा चुके हैं। आयोग ने यह भी तय किया है कि आगे से IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहलों पर Commission की मंजूरी से पहले Committee of Officers में चर्चा होगी।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा
SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 है, जबकि नोटिस और दावों-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।
