Nestlé के बेबी फूड पर FSSAI की कार्रवाई: 5 HMOs, Whey Protein के दावे और Biotin की कमी पर क्या है पूरा विवाद?

NAN Excella Pro और Lactogen Pro पर प्रचार दावों को लेकर सवाल, Follow-up Formula में Biotin तय मानक से कम; Nestlé ने कहा- हमारे उत्पाद नियमों के अनुरूप

बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में छोटी-सी जानकारी भी बड़ी बात बन जाती है। किसी उत्पाद के पैकेट या उसकी ऑनलाइन बिक्री के दौरान किए गए दावे सिर्फ विज्ञापन नहीं होते, बल्कि माता-पिता के खरीदने के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से शिशु आहार के लिए भारत में सामान्य खाद्य उत्पादों के मुकाबले ज्यादा कड़े नियम बनाए गए हैं। अब इसी क्षेत्र में Nestlé India और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के बीच विवाद सामने आया है।

18 सितंबर 2026 को FSSAI ने कहा कि उसने Nestlé India के तीन शिशु पोषण उत्पादों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इनमें NAN Excella Pro Stage 1, Lactogen Pro 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला शामिल हैं। नियामक ने इन उत्पादों के साथ ई-कॉमर्स मंचों पर मौजूद प्रचार सामग्री की भी जांच की। कार्रवाई की वजह सिर्फ किसी उत्पाद की गुणवत्ता नहीं है। दो उत्पादों के मामले में प्रचार संबंधी दावों पर आपत्ति है, जबकि तीसरे उत्पाद के नमूने में Biotin की मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं मिली।

कहां से शुरु हुआ विवाद ?

FSSAI के मुताबिक NAN Excella Pro Stage 1 की जांच के दौरान उसके प्रचार में “5 HMOs” और “Whey Protein” से जुड़े दावे पाए गए। वहीं Lactogen Pro 1 के मामले में Whey Protein को “आसानी से पचने वाला” बताने वाले दावे पर सवाल उठाया गया।

यहां मामला यह नहीं है कि FSSAI ने सीधे तौर पर यह कह दिया कि उत्पाद में HMO या Whey Protein मौजूद ही नहीं है। नियामक की आपत्ति इस बात से जुड़ी है कि शिशु आहार के लिए तय नियमों के तहत इन उत्पादों के प्रचार में इस तरह के दावे किस सीमा तक किए जा सकते हैं। FSSAI ने इन दावों पर Nestlé India से स्पष्टीकरण भी मांगा है।

5 HMOs क्या हैं और इसे लेकर सवाल क्यों उठा?

HMO यानी Human Milk Oligosaccharides मां के दूध में पाए जाने वाले जटिल कार्बोहाइड्रेट का एक समूह हैं। शिशु पोषण के क्षेत्र में इन पर काफी वैज्ञानिक शोध हुआ है और इन्हें नवजात के पोषण तथा आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों से जुड़े पहलुओं के संदर्भ में देखा जाता है।

Nestlé India अपने वार्षिक दस्तावेज में NAN ExcellaPro को पांच HMOs और प्रोबायोटिक्स वाला उत्पाद बताती रही है। दिलचस्प बात यह है कि FSSAI के उपलब्ध पुराने दस्तावेजों में NAN Excella PRO 1 with Human Milk Oligosaccharides (HMOs) and Lactobacillus reuteri के लिए स्वीकृति का रिकॉर्ड भी मौजूद है। 2021 में इस उत्पाद से संबंधित आवेदन को मंजूरी दी गई थी।              यही वजह है कि मौजूदा विवाद को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर करना जरूरी है—किसी सामग्री या उत्पाद को नियामकीय मंजूरी मिलना और उसके प्रचार में किए गए हर दावे का नियमों के अनुरूप होना एक ही बात नहीं है।

Nestlé का कहना है कि NAN Excella Pro और Lactogen Pro तथा उनके लेबल विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुमोदित हैं। कंपनी ने FSSAI की कार्रवाई के बावजूद कहा है कि उसके उत्पाद लागू नियमों के अनुरूप हैं और वह नियामक के साथ सहयोग करती रहेगी।

Whey Protein वाला मामला क्या है?

Lactogen Pro 1 के प्रचार में Whey Protein को आसानी से पचने वाला बताया गया। FSSAI ने इसी दावे पर सवाल उठाया है।  सामान्य तौर पर Whey Protein दूध से मिलने वाला प्रोटीन है। लेकिन यहां सवाल यह नहीं है कि Whey Protein अपने आप में खराब या असुरक्षित है। विवाद शिशु आहार के प्रचार में उसके बारे में किए गए दावे से संबंधित है।

कानून क्या कहता है?

FSSAI के मुताबिक दोनों उत्पादों में पाए गए प्रचार संबंधी दावे Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Regulations, 2020 के Regulation 4(2) के विपरीत पाए गए। यह प्रावधान ऐसे प्रचार दावों और सामग्री को प्रतिबंधित करता है जिनका उद्देश्य शिशु खाद्य उत्पादों की बिक्री बढ़ाना हो।

इसके साथ ही FSSAI ने Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods (Regulation of Production, Supply and Distribution) Act, 1992 की धारा 3 का भी हवाला दिया है। यह कानून शिशु दूध विकल्पों और संबंधित उत्पादों के विज्ञापन तथा प्रचार पर कड़े प्रतिबंध लगाता है।

इसका सीधा मतलब यह है कि शिशु आहार के मामले में कंपनी केवल यह नहीं देख सकती कि उत्पाद में कौन-से पोषक तत्व हैं। उसे यह भी देखना होता है कि उन पोषक तत्वों के बारे में उपभोक्ताओं के सामने किस तरह का दावा किया जा रहा है।

तीसरा और ज्यादा सीधा मामला- Biotin की कमी

तीन उत्पादों में से तीसरे मामले में विवाद प्रचार दावे से नहीं, बल्कि प्रयोगशाला जांच से जुड़ा है। FSSAI के अनुसार Nestlé India के एक फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने की प्रयोगशाला जांच में Biotin की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई। इसके बाद नमूने को दोबारा जांच के लिए भेजा गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि रेफरल प्रयोगशाला ने भी नमूने को Biotin की निर्धारित आवश्यकता के अनुरूप नहीं पाया।

यानी इस हिस्से में FSSAI की कार्रवाई सिर्फ किसी विज्ञापन या पैकेट पर लिखे दावे पर आधारित नहीं है। नियामक के मुताबिक एक नमूने की पहली जांच और फिर रेफरल प्रयोगशाला की जांच में दोनों में Biotin संबंधी मानक का पालन नहीं मिला।

अब FSSAI ने क्या कार्रवाई की है?

FSSAI ने कहा है कि उसने तीनों उत्पादों के संबंध में तीन अलग-अलग न्यायिक प्रक्रिया वाले मामले यानी adjudication cases दर्ज किए हैं। इसका मतलब यह है कि मामला अभी कार्रवाई की प्रक्रिया में है।

Nestle की सफाई 

दूसरी तरफ Nestlé India ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक NAN Excella Pro और Lactogen Pro तथा उनके लेबल सभी लागू नियमों के अनुरूप हैं और FSSAI की विशेषज्ञ समिति ने इन्हें मंजूरी दी थी। कंपनी ने कहा है कि वह मामलों के आगे बढ़ने के दौरान FSSAI के साथ सहयोग करती रहेगी।

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