दुबई में महिला एशिया कप के फाइनल के बाद एक बार फिर क्रिकेट और भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव की तस्वीर मैदान पर दिखाई दी। श्रीलंका को 72 रन से हराकर भारत ने रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब जीता, लेकिन टीम ने ट्रॉफी एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी से नहीं ली।
इस फैसले ने 2025 के पुरुष एशिया कप फाइनल की यादें ताजा कर दीं। उस समय भी भारतीय पुरुष टीम ने पाकिस्तान के तत्कालीन और मौजूदा ACC प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था। अब BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने साफ किया है कि महिला टीम का फैसला अचानक लिया गया कदम नहीं था, बल्कि यह पिछले साल लिए गए फैसले के साथ एकजुटता का संकेत था।
आखिर भारत ने ट्रॉफी क्यों नहीं ली?
सैकिया के मुताबिक, अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने कहा कि इसके बाद भारतीय नागरिकों की ओर से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंध खत्म करने का दबाव भी बढ़ा। हालांकि, सरकार की नीति के तहत भारत बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में सभी देशों के खिलाफ खेलता है।
यानी भारत टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ या उसके साथ खेल सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर आधिकारिक या राजनीतिक परिस्थिति को स्वीकार करना जरूरी है।
सैकिया ने कहा कि भारत का सैन्य संघर्ष अभी भी जारी है और ऐसे में वह उस व्यक्ति से ट्रॉफी नहीं ले सकता, जिसे उन्होंने भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले पाकिस्तान के प्रमुख नेताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि महिला टीम ने पिछले साल पुरुष टीम की ओर से लिए गए फैसले के प्रति एकजुटता दिखाई।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने क्या किया?
भारत ने रविवार को दुबई में श्रीलंका को 72 रन से हराकर महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। यह भारत का इस टूर्नामेंट में आठवां खिताब है और टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया।
लेकिन ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के दौरान भारतीय खिलाड़ी मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने के लिए मंच पर नहीं गईं। नकवी ने इसके बजाय श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू को रनर-अप का चेक दिया और इसके बाद प्रेजेंटेशन खत्म हो गया। भारतीय टीम ने अपनी जीत का जश्न जरूर मनाया। यानी विवाद ट्रॉफी जीतने को लेकर नहीं था, बल्कि उसे किसके हाथों से स्वीकार किया जाए, इस पर था।
2025 में क्या हुआ था?
इस पूरे विवाद की शुरुआत पिछले साल के पुरुष एशिया कप फाइनल के बाद हुई थी। भारत ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था, लेकिन प्रेजेंटेशन समारोह में ट्रॉफी लेने का मामला विवाद में बदल गया। भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था और समारोह में काफी देरी हुई थी। बाद में नकवी ने श्रीलंका को रनर-अप चेक दिया और भारतीय टीम को ट्रॉफी नहीं मिली।
यही वजह है कि 2026 में महिला टीम का फैसला केवल एक मैच या एक प्रेजेंटेशन तक सीमित नहीं माना जा रहा। BCCI के मुताबिक, यह पिछले फैसले की निरंतरता है।
क्या भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच बातचीत भी नहीं हुई?
यहां स्थिति थोड़ी अलग है। फाइनल के दौरान नकवी, देवजीत सैकिया और BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला एक ही रॉयल बॉक्स में मौजूद थे। इससे यह सवाल भी उठा कि अगर भारत नकवी से ट्रॉफी नहीं ले रहा था तो भारतीय क्रिकेट अधिकारी उनके साथ बैठे और बातचीत क्यों कर रहे थे।
सैकिया ने इसे सामान्य औपचारिकता बताया। उनके मुताबिक, वह टॉस से लेकर मैच खत्म होने तक रॉयल बॉक्स में बैठे रहे और वहां आने वाले सभी लोगों से मुलाकात करते रहे। उन्होंने कहा कि नकवी भी वहां आए और उनके साथ बैठे, इसलिए बातचीत होना असामान्य नहीं था।
इससे यह स्पष्ट होता है कि BCCI का रुख पूरी तरह से “कोई संपर्क नहीं” वाला नहीं है। मुद्दा खास तौर पर ट्रॉफी स्वीकार करने से जुड़ा था।
क्या इस फैसले से भारतीय टीम की उपलब्धि कम होती है?
सैकिया ने साफ कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनके मुताबिक, ट्रॉफी किसने दी या किससे नहीं ली, यह भारत की क्रिकेट उपलब्धि से बड़ा मुद्दा नहीं है। भारत ने टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल में श्रीलंका को 72 रन से हराया। सैकिया ने कहा कि महिला क्रिकेट भारत में तेजी से आगे बढ़ रहा है और टीम की पूरी योजना 2026 ICC T20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।
क्या BCCI ने इस स्थिति को सुलझाने की कोशिश की थी?
सैकिया के मुताबिक, प्रेजेंटेशन को लेकर समाधान निकालने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हुई। हालांकि, उन्होंने कहा कि BCCI को इसका कोई पछतावा नहीं है। उनके मुताबिक, टीम की सबसे बड़ी प्राथमिकता ट्रॉफी किसके हाथों से मिलेगी, यह नहीं थी। असली लक्ष्य टूर्नामेंट जीतना था और भारत ने वह लक्ष्य हासिल कर लिया।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट जारी रह सकता है, खासकर बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में, लेकिन मैदान के बाहर दोनों देशों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों का असर अब क्रिकेट की औपचारिकताओं पर भी दिखाई दे रहा है। महिला एशिया कप का यह ट्रॉफी विवाद उसी बदले हुए माहौल की एक और तस्वीर है।
