मुंबई एयरपोर्ट T2 के पास मस्जिद पर विवाद, लगा लैंड जिहाद आरोप

किरीट सोमैया की शिकायत के बाद बढ़ा विवाद, MMRDA बोला- स्ट्रक्चर के लिए अनुमति नहीं;

Mumbai Airport T2 Land Jihad Allegation

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 के पास एक मस्जिदनुमा स्ट्रक्चर को लेकर विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया की शिकायत के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी MMRDA ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड यानी MIAL को संबंधित स्ट्रक्चर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह स्ट्रक्चर एयरपोर्ट के T2 के VIP Arrival और टैक्सी स्टैंड क्षेत्र के पास बताया जा रहा है। MMRDA के 8 सितंबर 2026 के पत्र में कहा गया है कि संबंधित स्ट्रक्चर के लिए प्राधिकरण की ओर से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। इसके अलावा, संबंधित अधिसूचित क्षेत्र के स्वीकृत इंटीग्रेटेड डेवेलपमेंट प्लान यानी IDP में सार्वजनिक प्रार्थना स्थल के लिए जमीन या प्लॉट के किसी प्रावधान, आरक्षण या आवंटन की बात भी सामने नहीं आती।

क्या है पूरा मामला?

विवाद एयरपोर्ट T2 के पास बने एक ऐसे स्ट्रक्चर को लेकर है, जिसे शिकायतकर्ता पक्ष मस्जिद बता रहा है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने इसकी वैधता पर सवाल उठाते हुए MMRDA और एयरपोर्ट अथॉरिटी को लिखित शिकायत की थी। सोमैया का लैंड जिहाद का आरोप लगाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बेहद संवेदनशील इलाके में बिना जरूरी अनुमति के यह निर्माण किया गया। उन्होंने 3 सितंबर को मौके का दौरा करने का दावा भी किया था।

हालांकि, इन आरोपों पर नमाजियों का कहना है कि यह कोई नया अवैध कब्जा नहीं है। उनके मुताबिक, एयरपोर्ट के पुराने हिस्से में पहले से एक मस्जिद थी, जहां एयरपोर्ट कर्मचारी, टैक्सी ड्राइवर और दूसरे लोग नमाज पढ़ते थे। एयरपोर्ट के विस्तार के दौरान जब पुरानी मस्जिद हटाई गई तो उनके अनुसार एयरपोर्ट अथॉरिटी ने ही नमाज पढ़ने के लिए नई जगह उपलब्ध कराई।

यानी फिलहाल विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह स्ट्रक्चर बिना अनुमति बनाया गया, या फिर एयरपोर्ट प्रशासन की जानकारी और सहमति से नमाज के लिए जगह उपलब्ध कराई गई थी?

MMRDA के पत्र में क्या कहा गया?

MMRDA के पत्र के मुताबिक संबंधित स्ट्रक्चर के लिए प्राधिकरण की ओर से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि संबंधित क्षेत्र की स्वीकृत IDP में सार्वजनिक प्रार्थना स्थल के लिए कोई जमीन या प्लॉट निर्धारित नहीं है।

पत्र में Operations, Management, Development Agreement यानी OMDA का भी उल्लेख है। इसके तहत एयरपोर्ट के अधिसूचित क्षेत्र में प्लानिंग, डेवलपमेंट, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव की जिम्मेदारी MIAL की बताई गई है। इसी आधार पर MMRDA ने MIAL से कहा है कि वह नियमों के तहत उचित प्रक्रिया अपनाकर संबंधित स्ट्रक्चर को हटाने की कार्रवाई करे और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपे।

मामला इतना गंभीर क्यों है?

एयरपोर्ट के आसपास निर्माण सामान्य जमीन पर होने वाले निर्माण जैसा नहीं माना जा सकता। यहां सुरक्षा, जमीन के इस्तेमाल, बिल्डिंग प्लान, एयरपोर्ट ऑपरेशन और संबंधित नियामकीय मंजूरियों के कई स्तर जुड़े होते हैं। खासकर T2 के वीआईपी अराईवल और टैक्सी क्षेत्र के पास किसी भी अनधिकृत निर्माण का आरोप इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि एयरपोर्ट एक हाई सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर है।

अब आगे क्या होगा?

किरीट सोमैया ने संबंधित लोगों और मस्जिद ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ FIR की मांग भी की है। उन्होंने मस्जिद ट्रस्ट के 16 ट्रस्टियों के नाम और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है। हालांकि, किसी व्यक्ति या ट्रस्टी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही निकाला जा सकता है।

अब सबसे अहम सवाल MIAL की अगली कार्रवाई को लेकर है। क्या स्ट्रक्चर को हटाया जाएगा? क्या MIAL के पास इसे लेकर कोई पुराना रिकॉर्ड या अनुमति है? क्या पुराने एयरपोर्ट की मस्जिद हटाने के बाद नमाज के लिए यह जगह उपलब्ध कराई गई थी? और यदि ऐसा हुआ था, तो क्या उसके लिए आवश्यक वैधानिक मंजूरी ली गई थी?

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