दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अब तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि कुछ और लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल उनकी तलाश में जुटा हुआ है। हादसे में घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
इमारत गिरने का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें दिखाई दे रहा है कि इमारत अचानक भरभरा कर गिर जाती है और कुछ ही सेकंड में आसपास धूल का बड़ा गुबार छा जाता है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के मुताबिक, हादसे में गिरी इमारत की पहचान पी-14, सत्य निकेतन के रूप में हुई है। यह एक पुनर्वास कॉलोनी का हिस्सा है और करीब 55 वर्ग गज जमीन पर बनी थी। बताया गया है कि इमारत में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलें थीं। यह इमारत 1990 के दशक में बनाई गई थी।
MCD के एक अधिकारी के मुताबिक, 55 वर्ग गज के इस प्लॉट पर नियमों के अनुसार सिर्फ दो मंजिल बनाने की अनुमति थी, लेकिन वहां पांच मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। इससे इमारत के निर्माण और सुरक्षा नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारी ने यह भी बताया कि इमारत को करीब एक साल पहले खाली कराया गया था। हालांकि, आरोप है कि दो-तीन महीने पहले इसमें दोबारा पीजी शुरू कर दिया गया। इस मामले में पुलिस और स्थानीय निकाय के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि इमारत में बेसमेंट बनाने की भी तैयारी चल रही थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी के कारण इमारत कमजोर हुई और आखिरकार ढह गई।
हादसे के बाद MCD ने सत्य निकेतन की उसी गली में मौजूद जर्जर इमारतों को नोटिस जारी किया है। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि इलाके की दूसरी इमारतें सुरक्षित हैं या नहीं। इस हादसे ने दिल्ली में पुराने और अवैध तरीके से बनाए गए भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
