दुबई से तेल अवीव जा रही Flydubai Flight FZ1073 में 30 सितंबर को जो हुआ, उसने कुछ मिनटों के लिए विमान में सवार करीब 174 लोगों की जिंदगी को बेहद खतरनाक मोड़ पर ला दिया। उड़ान के दौरान कॉकपिट में हिंसक संघर्ष हुआ, विमान ने अचानक हजारों फीट की ऊंचाई खो दी और हाइजैकिंग का संकेत देने वाला 7500 ट्रांसपोंडर कोड भी प्रसारित हुआ।
लेकिन इस खौफनाक घटना के बीच एक भारतीय पायलट की भूमिका अब चर्चा के केंद्र में है। रिपोर्टों के मुताबिक विमान के भारतीय मूल के कप्तान स्मित मच्छर (Smit Machchhar) पर उनके ओमानी सह-पायलट ने कथित तौर पर हमला किया। इसके बावजूद विमान को बचाने की कोशिश जारी रही। यात्रियों और विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने भी हमलावर को काबू करने में मदद की और आखिरकार विमान सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया।
35,000 फीट पर अचानक बदल गई पूरी कहानी
FZ1073 दुबई से तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट जा रही थी। विमान में करीब 174 यात्री, जिनमें 27 बच्चे भी शामिल थे, सवार थे। उड़ान के दौरान सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक विमान तेजी से नीचे आने लगा।
Flightradar24 के आंकड़ों के अनुसार विमान ने करीब दो मिनट में लगभग 17,400 फीट की ऊंचाई खो दी। इतनी तेज गिरावट ने विमान में मौजूद लोगों को दहशत में डाल दिया। उधर कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच गंभीर संघर्ष चल रहा था।
7500 कोड आया और दुनिया को लगा विमान हाइजैक हो गया
विमान ने पहले 7700 कोड प्रसारित किया, जो सामान्य आपात स्थिति का संकेत है। इसके बाद 7500 कोड आया। विमानन की भाषा में 7500 का मतलब है कि विमान में unlawful interference, यानी संभावित हाइजैकिंग या जबरन नियंत्रण लेने जैसी स्थिति हो सकती है।
इसके बाद विमान फिर 7700 पर गया और अपना रास्ता बदलकर सऊदी अरब के तबूक की ओर मुड़ गया। इस घटनाक्रम के बाद इजरायल की सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हो गईं और रिपोर्टों के मुताबिक इजरायली लड़ाकू विमानों को भी सक्रिय किया गया।
भारतीय कप्तान पर हुआ हमला
रिपोर्टों के मुताबिक विमान के कप्तान स्मित मच्छर भारतीय नागरिक/भारतीय मूल के पायलट हैं। घटना के दौरान कथित तौर पर ओमानी सह-पायलट ने उन पर चाकू से हमला किया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार भारतीय कप्तान घायल होने के बावजूद विमान को बचाने की कोशिश करते रहे। बाद में यात्रियों और दूसरे पायलटों ने कॉकपिट में पहुंचकर कथित हमलावर को काबू करने में मदद की।
यानी कहानी सिर्फ यात्रियों के साहस की नहीं है। घायल भारतीय कप्तान, विमान में मौजूद अन्य प्रशिक्षित पायलट और यात्रियों की संयुक्त प्रतिक्रिया ने विमान को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
यात्रियों ने कॉकपिट में घुसकर हमलावर को पकड़ा
जब विमान तेजी से नीचे जा रहा था और कॉकपिट में संघर्ष चल रहा था, तब कुछ यात्रियों ने स्थिति को समझते हुए कॉकपिट की ओर जाने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ इजरायली यात्रियों ने कथित हमलावर को पकड़कर काबू में किया। एक यात्री ने बताया कि उसने हमलावर को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींचने में मदद की।
विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने भी बाद में विमान को संभालने में मदद की। Flydubai ने भी कहा कि विमान में यात्रा कर रहे ऑफ-ड्यूटी Flydubai क्रू सदस्यों ने विमान को सुरक्षित किया और उसे तबूक में उतारा।
क्या भारतीय पायलट ने 9/11 जैसी साजिश नाकाम की?
यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल है। अगर जांच में यह पुष्टि होती है कि सह-पायलट ने जानबूझकर विमान पर कब्जा करने और उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की थी, तो भारतीय कप्तान और यात्रियों की प्रतिक्रिया को उस संभावित हमले को रोकने में अहम माना जाएगा।
इजरायली अधिकारियों ने कहा है कि सह-पायलट ने कप्तान पर हमला करने के बाद विमान को गिराने की कोशिश की हो सकती है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी यात्रियों की भूमिका की सराहना की। लेकिन अभी इसे आधिकारिक तौर पर 9/11 जैसी आतंकवादी साजिश कहना जल्दबाजी होगी। हमले की मंशा, सह-पायलट के उद्देश्य और पूरी घटना का क्रम जांच का हिस्सा हैं।
9/11 की याद क्यों आई?
इस घटना में सबसे डरावना पहलू यह था कि विमान हवा में था, कॉकपिट में हिंसा हो रही थी और विमान तेजी से नीचे जा रहा था। एक यात्री ने बाद में इस अनुभव की तुलना 11 सितंबर 2001 से की। 9/11 में भी विमान यात्रियों को हाइजैक कर कॉकपिट पर कब्जा किया गया था। United Airlines Flight 93 के यात्रियों ने उस समय कॉकपिट पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन विमान पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
FZ1073 में परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन यात्रियों के सामने भी वही मूल डर था—अगर कॉकपिट का नियंत्रण गलत हाथों में चला गया तो विमान में सवार हर व्यक्ति की जान खतरे में पड़ सकती थी।
तबूक में हुई सुरक्षित लैंडिंग
आखिरकार विमान सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। दोनों पायलट घायल हुए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। विमान में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित बताया गया। बाद में यात्रियों के लिए दूसरा विमान भेजा गया और वे इजरायल लौटे। तबूक में सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों के जश्न मनाने और राहत की सांस लेने के वीडियो भी सामने आए।
अब जांच में क्या पता लगाना बाकी है?
इस मामले में कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। कथित हमलावर कॉकपिट में चाकू लेकर कैसे पहुंचा? दोनों पायलटों के बीच संघर्ष की शुरुआत किस वजह से हुई? विमान ने इतनी तेजी से ऊंचाई क्यों खोई? 7500 कोड किसने और किस परिस्थिति में भेजा? और सबसे महत्वपूर्ण कि क्या विमान को जानबूझकर गिराने की कोशिश की जा रही थी?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह अचानक हुआ हिंसक संघर्ष था या इसके पीछे कोई सुनियोजित हमला था। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि एक भारतीय पायलट, दूसरे पायलटों और यात्रियों की त्वरित प्रतिक्रिया के बाद एक बेहद खतरनाक विमानन आपात स्थिति का अंत तबाही के बजाय तबूक के रनवे पर हुआ। इसे 9/11 जैसी साजिश कहना अभी जांच से पहले का निष्कर्ष होगा, लेकिन अगर संभावित हमले की आशंका सही साबित होती है, तो FZ1073 की यह कहानी विमान में सवार लोगों की जान बचाने वाली असाधारण प्रतिक्रिया के तौर पर जरूर याद की जाएगी।
