गांधी जयंती के तीन दिन के लंबे वीकेंड पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचे। इसके चलते शिमला, मनाली, मसूरी और नैनीताल के कैंची धाम जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर कई घंटों तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही।
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को राजधानी शिमला में सबसे ज्यादा परेशानी देखने को मिली। सुबह से ही बड़ी संख्या में पर्यटक वाहनों के पहुंचने के कारण शहर की सड़कों पर जाम लग गया। कई जगह वाहन घंटों तक फंसे रहे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ही दिन में करीब 30 हजार वाहन शिमला पहुंचे। मनाली, कसौली और धर्मशाला में भी वाहनों की संख्या बढ़ने से कई जगह ट्रैफिक धीमा रहा।
फगवाड़ा से परिवार के साथ हिमाचल घूमने पहुंचे गौरव ने बताया कि राज्य में प्रवेश करते ही उन्हें जाम का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि छुट्टियों में पर्यटकों की भारी भीड़ की पहले से उम्मीद होने के बावजूद ट्रैफिक को संभालने के लिए बेहतर इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालु घंटों जाम में फंसे
उत्तराखंड में नैनीताल जिले के प्रसिद्ध कैंची धाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शुक्रवार को भीमताल से कैंची धाम जाने वाले रास्ते पर कई घंटों तक जाम लगा रहा। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रानीखेत, धारचूला, बागेश्वर और हल्द्वानी की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस की तैनाती की गई। श्रद्धालुओं को कैंची धाम तक पहुंचाने के लिए भीमताल और भवाली से शटल सेवा भी चलाई गई। आसपास के गरमपानी और भीमताल के कारोबारियों ने बताया कि जाम के कारण कई पर्यटक वहां रुकने के बजाय आगे निकल गए, जिससे उनके कारोबार पर असर पड़ा।
उत्तराखंड पुलिस ने 2 से 4 अक्टूबर तक कैंची धाम, भवाली और भीमताल के लिए ट्रैफिक और डायवर्जन प्लान जारी किया था। इसके तहत वीकेंड के दौरान कैंची धाम क्षेत्र में निजी कैब, टैक्सी और दोपहिया टैक्सी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया। लोगों को यात्रा शुरू करने से पहले पार्किंग और शटल सेवा की जानकारी लेने की सलाह दी गई।
मसूरी और ऋषिकेश में भी कई घंटे फंसे वाहन
मसूरी और ऋषिकेश में भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे। यहां कई जगह वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे। पुलिस और प्रशासन की ओर से किए गए इंतजाम भीड़ के मुकाबले कम पड़ गए।
छुट्टियों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या होटल, टैक्सी और छोटे कारोबारियों के लिए कमाई का अच्छा मौका लेकर आती है। हालांकि, इस भीड़ ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों की संकरी सड़कों और सीमित ट्रैफिक व्यवस्था की समस्या को उजागर किया है।
पर्यटक और स्थानीय लोग लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि पहाड़ी इलाकों में वाहनों की संख्या को नियंत्रित किया जाए, सड़क किनारे अवैध पार्किंग पर सख्ती की जाए और पर्यटन स्थलों के प्रवेश मार्गों पर पहले से बेहतर ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए।
