ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। पत्रकार रुचि तिवारी ने महिला सुरक्षा को लेकर नेहा बोरा के रुख पर सवाल उठाए हैं। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब नेहा बोरा ने हाल ही में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना की।
इसके बाद रुचि तिवारी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में इस साल फरवरी में हुए एक कथित विवाद का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो और बयान साझा किए। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता क्या राजनीतिक परिस्थितियों और विचारधारा के आधार पर अलग-अलग तरीके से देखी जाती है?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में क्या हुआ था?
रुचि तिवारी के मुताबिक, 13 फरवरी 2026 को वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के आर्ट्स फैकल्टी में एक प्रदर्शन को कवर करने गई थीं। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनके कपड़े खींचने की कोशिश की और उन्हें धमकाया गया।
तिवारी ने आरोप लगाया है कि इस घटना के दौरान नेहा बोरा भी वहां मौजूद थीं और कथित तौर पर विवाद में शामिल थीं। हालांकि, घटना में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में लोगों के एक समूह को तिवारी के आसपास देखा जा सकता है, लेकिन वीडियो के आधार पर हर व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट नहीं होती।
UGC नियमों को लेकर हुआ था प्रदर्शन
यह प्रदर्शन उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के नियमों के विरोध में आयोजित किया गया था। इसमें AISA और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) समेत कई वामपंथी छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए थे।
प्रदर्शन के दौरान जाति, आरक्षण और नए नियमों को लेकर मतभेद के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया था। तिवारी का कहना है कि वह वहां पत्रकार के तौर पर गई थीं और प्रदर्शनकारियों ने उनकी पहचान और विचारों को लेकर उनसे सवाल किए, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर नेहा बोरा से सवाल
रुचि तिवारी का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाता है, तो उसे राजनीतिक विचारधारा से अलग हटकर हर महिला के मामले में समान रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने नेहा बोरा पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके साथ हुई कथित घटना की उसी तरह निंदा नहीं की, जिस तरह वह दूसरी महिलाओं के मामलों में पुलिस कार्रवाई का विरोध करती हैं।
इस विवाद ने राजनीति और महिला सुरक्षा के बीच संबंध को लेकर भी बहस छेड़ दी है। कुछ लोगों का कहना है कि राजनीतिक विचारधारा के कारण कुछ मामलों को ज्यादा महत्व दिया जाता है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की घटना को पूरी पृष्ठभूमि के साथ देखा जाना चाहिए।
जांच और सबूत के आधार पर तय होनी चाहिए सच्चाई
फरवरी में हुई इस घटना को लेकर पुलिस में अलग-अलग शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई थी। रुचि तिवारी ने कहा है कि इस घटना के बाद उन्हें पत्रकार के तौर पर काम करने को लेकर डर महसूस होता है।
हालांकि, घटना में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका और लगाए गए आरोपों की सच्चाई का फैसला उपलब्ध सबूत, पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए। सोशल मीडिया पर सामने आने वाले वीडियो या आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी साबित नहीं करते।
नेहा बोरा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल दो लोगों के बीच का मामला नहीं रह गया है। इसने छात्र राजनीति, महिला सुरक्षा, पत्रकारिता और राजनीतिक विचारधारा से जुड़े कई सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। विवाद के बीच मुख्य सवाल यही है कि महिलाओं की सुरक्षा को राजनीतिक विचारधारा से अलग रखकर हर मामले में समान रूप से देखा जाना चाहिए।
