धनतेरस पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों के लिए शुभ परंपरा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में सोना सिर्फ आस्था और गहनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निवेश के लिहाज से भी चर्चा में रहा है। खासकर पिछले पांच साल के आंकड़े देखें तो सोने की कीमत में आई तेजी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 की बढ़त से कहीं ज्यादा रही है।
अगर किसी ने पिछले धनतेरस यानी 18 अक्टूबर 2025 को सोना खरीदा था, तो 3 नवंबर 2026 तक उसकी कीमत में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, पांच साल पहले धनतेरस के आसपास खरीदे गए सोने की कीमत दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। इस दौरान निफ्टी 50 में भी बढ़त हुई, लेकिन दोनों के रिटर्न में बड़ा अंतर रहा।
पिछले धनतेरस से अब तक सोने ने कितना रिटर्न दिया?
3 नवंबर 2026 के उपलब्ध भाव के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,38,120 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। पिछले साल धनतेरस यानी 18 अक्टूबर 2025 को इसका भाव करीब 1,20,275 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस तरह एक साल में सोने की कीमत करीब 17,845 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ गई।
इसका मतलब है कि पिछले धनतेरस पर किसी ने 1 लाख रुपये का 24 कैरेट सोना खरीदा होता, तो 3 नवंबर 2026 तक उसकी कीमत करीब 1.15 लाख रुपये हो सकती थी। यानी करीब 14,837 रुपये का मूल्य लाभ। हालांकि, यह केवल सोने के बेंचमार्क भाव पर आधारित गणना है। इसमें GST, मेकिंग चार्ज और खरीद-बिक्री के बीच का अंतर शामिल नहीं है।
पांच साल में सोने ने कितना रिटर्न दिया?
अब तुलना को पांच साल पीछे ले चलते हैं। नवंबर 2021 में धनतेरस के आसपास 24 कैरेट सोने का भाव करीब 43,013 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 3 नवंबर 2026 तक यह बढ़कर करीब 1,38,120 रुपये हो गया।
यानी पांच साल में सोने की कीमत करीब 95,108 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ी। प्रतिशत में देखें तो यह लगभग 221 फीसदी की बढ़त है।
दूसरे शब्दों में, पांच साल पहले सोने में लगाए गए 1 लाख रुपये की कीमत अब करीब 3.21 लाख रुपये हो सकती है। यह कीमत आधारित रिटर्न है, वास्तविक निवेश का शुद्ध मुनाफा नहीं।
सोना बनाम निफ्टी: पांच साल में किसने कितना रिटर्न दिया?
सोने की तेजी को समझने के लिए इसकी तुलना शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 से करना जरूरी है। 3 नवंबर 2021 को निफ्टी 50 करीब 17,829 अंक पर बंद हुआ था। 3 नवंबर 2026 को इसका स्तर 23,810.85 अंक रहा। यानी पांच साल में निफ्टी 50 में करीब 33.55 फीसदी की बढ़त हुई।
इसी अवधि में सोने की कीमत करीब 221 फीसदी बढ़ी। इस तरह कीमत के आधार पर सोने की बढ़त निफ्टी से काफी अधिक रही।
पांच साल का रिटर्न: सोना और निफ्टी 50
| पैमाना | सोना (24 कैरेट) | निफ्टी 50 |
|---|---|---|
| नवंबर 2021 का स्तर | ₹43,013/10 ग्राम | 17,829.20 |
| नवंबर 2026 का स्तर | ₹1,38,120/10 ग्राम | 23,810.85 |
| कुल बढ़त | 221.1% | 33.55% |
| सालाना औसत चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) | 26.3% | 6.0% |
पांच साल में सोना बनाम निफ्टी 50
अगर पांच साल पहले दोनों में 1-1 लाख रुपये लगाए होते, तो केवल कीमत/इंडेक्स की बढ़त के आधार पर तस्वीर कुछ ऐसी होती:
| निवेश | शुरुआती रकम | पांच साल बाद अनुमानित वैल्यू |
|---|---|---|
| सोना | ₹1,00,000 | ₹3,21,116 |
| निफ्टी 50 | ₹1,00,000 | ₹1,33,550 |
सोने की कीमत में इतनी तेजी क्यों आई?
सोने की कीमत सिर्फ भारत में मांग और आपूर्ति से तय नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की मजबूती या कमजोरी, रुपये की विनिमय दर और केंद्रीय बैंकों की खरीद जैसे कई कारक इसका भाव प्रभावित करते हैं। पहला वैश्विक अनिश्चितता, युद्ध और आर्थिक तनाव के समय निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प के रूप में देखते हैं।इसके अलावा दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाते रहे हैं। इससे मांग को समर्थन मिलता है। तीसरा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। रुपये में कमजोरी आने पर भारत में आयातित सोना महंगा हो सकता है। चौथा, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों में बदलाव भी सोने की मांग और कीमत पर असर डालते हैं।
इन कारणों का असर हर समय एक जैसा नहीं होता। सोने की कीमत में तेजी के बाद गिरावट भी आ सकती है। इसलिए बीते पांच साल का रिटर्न भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है।
क्या धनतेरस पर सोना खरीदना निवेश के लिहाज से भी फायदेमंद है?
पिछले पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि सोने ने कीमत के लिहाज से निफ्टी 50 से ज्यादा बढ़त दर्ज की है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि सोना हमेशा शेयर बाजार से बेहतर रिटर्न देगा।सोने का इस्तेमाल आमतौर पर पोर्टफोलियो में विविधता लाने और अनिश्चितता के दौर में जोखिम संतुलित करने के लिए किया जाता है। वहीं, शेयर बाजार में निवेश कंपनियों की कमाई और आर्थिक विकास में हिस्सेदारी देता है। दोनों की भूमिका अलग है।
धनतेरस पर सोना खरीदते समय यह भी समझना जरूरी है कि गहने, सिक्के, बार और गोल्ड ETF की लागत और रिटर्न अलग-अलग हो सकते हैं। गहनों में मेकिंग चार्ज और GST जुड़ते हैं, जबकि बेचते समय पूरा खरीद मूल्य वापस मिलना जरूरी नहीं है।
