‘इंडिया स्कूप्स’ के पीछे का असली सच

दिव्या स्पंदना इंडिया स्कूप्स

राफेल डील ने देश में इतने रक्षा विशेषज्ञों को जन्म दे दिया ही कि हर कोई अब इस विषय पर खुलकर अपनी राय रख रहा है भले ही उसे ये तक न पता हो कि आखिर में राफेल है क्या और क्यों भारतीय वायुसेना को इसकी जरूरत है। वैसे भी भारत में इस तरह के विशेषज्ञ अक्सर ही सोशल मीडिया तो कभी न्यूज़ चैनल्स पर देखने को मिल जाते हैं जिन्हें भले ही मामले की जानकारी न हो लेकिन सलाह और सवाल करने में माहिर होते हैं।

राफेल डील का मामला काफी समय से चर्चा में है और अब हमारे तथाकथित रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल एक बड़ा घोटाला है। कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना रम्या एक ऐसी ही तथाकथित रक्षा विशेषज्ञों में से एक हैं।

इंडिया स्कूप्स पहले ‘अर्शी खान फैन पेज’ के नाम से संचालित था। इस पेज ने कई बार अपना नाम बदला है और अब ये आखिर में इंडिया स्कूप्स नाम से चल रहा है। वैसे इस मामले में दिव्या स्पंदना अकेली नहीं है। कई आत्मघोषित लोग हैं जो अपने आप को ‘इंडिया स्कूप’ का टैग देते हैं लेकिन फेक न्यूज को बढ़ावा देने का काम करते हैं। हाल ही में ये पेज पीएम मोदी के फिटनेस वीडियो से जुड़ी फेक न्यूज फैलाने में शामिल था। इंडिया स्कूप्स ने दावा किया था कि पीएम मोदी के योगा वाले फिटनेस वीडियो पर 35 लाख रुपये खर्च किये गया है लेकिन बाद में आरटीआई के जवाब ने इस फेक न्यूज़ की पोल खोलकर रख दी थी।

अब यही पेज राफेल डील को लेकर फेक न्यूज़ फैला रहा है और इससे जुड़े फेक न्यूज़ को भी धडल्ले से शेयर कर रहा है। ये स्पष्ट रूप से दर्शात है कि राफेल डील को घोटाला बताने के लिए कांग्रेस किस स्तर पर जा सकती है। ये कांग्रेस के अंदर की हताशा को दर्शाता है। कांग्रेस पार्टी कुछ महीनों से लगातार राफेल डील को घोटाले के रूप में चित्रित करने की कोशिश में लगी हुई है। वो राफेल डील को लेकर केंद्र सरकार पर आधारहीन आरोप लगा रही है। हालांकि हर बार कांग्रेस के आरोप झूठे साबित हुए हैं यही वजह है कि कांग्रेस और उसके नेताओं को इस मामले में जनता से कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। यही नहीं फ्रांस सरकार के जवाब ने तो कांग्रेस की बोलती बंद कर दी है।

ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी को भी अच्छी तरह से पता है कि राफेल कोई घोटाला नहीं है और जो भी वो कर रही है वो सिर्फ राजनीति अंक बटोरने के उसके ओछे प्रयास हैं। पिछले दिनों AICC लीगल सेल चेयरमैन अनूप जॉर्ज चौधरी द्वारा जारी किए गए हालिया प्रेस नोट से तो यही संकेत मिलते हैं कि पार्टी को भी पता है कि राफेल डील में कोई घोटाला हुआ ही नहीं है और उनके दावें खोखले हैं। दरअसल, राफेल डील पर तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसके बाद कांग्रेस की आईटी सेल की तरफ से एक प्रेस नोट जारी किया गया। इस प्रेस नोट में पार्टी ने तहसीन की याचिका से पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया है। यही नहीं कांग्रेस ने ये तक कह दिया कि ये पूर्णतया तहसीन पूनावाला का ‘निजी’ मामला है और इस याचिका से कांग्रेस का कोई संबंध नहीं है जबकि तहसीन पूनावाला का गांधी परिवार से करीबी रिश्ता है। पूनावाला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की बहन मोनिका के पति हैं और कांग्रेस पार्टी के बड़े समर्थक भी।  इसके बावजूद कांग्रेस का ये रुख उसी के दावों पर कई सवाल खड़े करता है। कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर राफेल डील की कीमत को लेकर घोटाले का आरोप लगाती रही है। इसके बाद जब तहसीन पूनावाला ने राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की तो कांग्रेस ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया।

राफेल डील से मोदी सरकार ने अपना फायदा साधा है, इस डील के जरिये मोदी सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी को लाभ पहुंचना चाहती है, तो कभी इस डील को लेकर केंद्र सरकार ने जनता से झूठ बोला जैसे न जाने कितने ही तरह के आरोप कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाये जाते रहे हैं और हर बार कांग्रेस के सभी आरोप झूठे साबित हुए हैं। अब दिव्या स्पंदना ‘इंडिया स्कूप्स’ पेज के जरिये राफेल को घोटाला साबित करने के लिए फेक न्यूज फैला रही है।

अगर पार्टी और दिव्या स्पंदना को लगता है राफेल डील में कोई घोटाला हुआ है तो उन्हें तहसीन की याचिका का समर्थन करना चाहिए था जो तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है। लेकिन पार्टी इसका समर्थन तो तब करती जब उसके दावों में कोई सच्चाई होती। इससे कांग्रेस का सफेद झूठ जनता के सामने आ जायेगा यही वजह है कि उसने इस मामले से दूरी बना ली। ये कांग्रेस और उसके नेताओं की गंदी राजनीति को दर्शाता है जो सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं जबकि वो भी इस तथ्य से वाकिफ हैं कि भारतीय वायुसेना को इसकी जरूरत है। कांग्रेस पार्टी के लिए देश हित सबसे ऊपर कभी था ही नहीं सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ ही सबसे ऊपर रहा है।

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