राजस्थान चुनाव: भंवरी देवी हत्याकांड के आरोपियों के परिजनों को टिकट दे रही कांग्रेस

राजस्थान भंवरी चुनाव कांग्रेस पार्टी

PC: Patrika

राजस्थान विधान सभा चुनाव की तारीख नजदीक है लेकिन ऐसा लगता है कि कांग्रेस राज्य में अपने लिए रास्ता आसान करने की बजाय मुश्किलों को और बढ़ावा दे रही है। अब इस पार्टी ने कुछ ऐसे लोगों को टिकट दिया है जिससे आगामी चुनाव में उसे बड़ा नुकसान हो सकता है। इस बार कांग्रेस ने कई दिग्गज नेताओं के साथ कुछ दागियों के परिजनों को भी टिकट दिया है।  एबीपी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पुरानी पार्टी ने भंवरी देवी हत्याकांड के आरोपी बाबू मलखान सिंह विश्नोई के बेटे और महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा को भी चुनावी मैदान में उतारा है।

बता दें कि, 36 वर्षीय भंवरी देवी पेशे से नर्स थी जिसका अपहरण करने के बाद हत्या कर दिया गया था। भंवरी देवी अपहरण और हत्या के मामले में कांग्रेस की सरकार के ही दो दिग्गज नेता मलखान और महिपाल मदेरणा सहित 16 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। कांग्रेस पार्टी की सरकार में मंत्री रहे महिपाल मदेरणा की भंवरी के साथ अश्लील सीडी भी सार्वजनिक हुई थी जिसने राजस्थान की राजनीति में बवाल पैदा कर दिया था। इस मामले में महिपाल मदेरणा और बाबू मलखान सिंह विश्नोई को सजा भी मिल चुकी है।ऐसे में दागी नेताओं के सगे संबंधी को टिकट देकर इस पुरानी पार्टी ने अपने लिए ही खड्डा खोदने का काम किया है। भंवरी देवी कांड में जेल में बंद आरोपी महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा को भी जोधपुर के ओसियां से विधानसभा में उतारा गया है।

राजस्थान में कांग्रेस पहले ही अपनी ही पार्टी के आंतरिक मतभेदों से परेशान है। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट कई मुद्दों को लेकर एकमत नहीं है। ये आंतरिक मतभेद राजस्थान में कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर है जो राज्य में कांग्रेस के सपनों पर ग्रहण लगा सकता है। यहां कांग्रेस बीजेपी की लड़ाई के बीच जाट नेता हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में राजस्थान तीसरे मोर्चे का उदय होना भी भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगा। इस पार्टी का लक्ष्य राजे और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ लड़ना है। इस लड़ाई से खुद को साबित करना है और एक नया पॉवर सेंटर बनकर बीजेपी में वापसी करना है। अब इस बीच अपने पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट न मिलने से पार्टी के कार्यकर्ता भी नाराज हो गये हैं। दरअसल, कांग्रेस ने राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची की घोषणा कर दी है। एक तरफ जिनके पसंदीदा उम्मीदवारों को पार्टी से टिकट मिला है वो खुश हैं दूसरी तरफ पार्टी के कुछ कार्यकर्ता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट न मिलने से नाराज भी हैं और उनका आरोप है कि पैसे लेकर पार्टी में टिकट का बंटवारा किया गया है। कई सीटों पर दूसरे दलों से आये उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है और जो सालों से पार्टी के साथ काम कर रहे हैं उन्हें दरकिनार कर दिया गया। पार्टी के कार्यकर्ता राजस्थान से दिल्ली तक पहुंच गये हैं और टिकट बंटवारे को लेकर विरोध कर रहे हैं। अब कांग्रेस पार्टी के दागी नेताओं को टिकट देकर अपने लिए राह और मुश्किल बना रही है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस न चाहते हुए भी वही कर रही है जिससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा हो। पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मतभेद फिर पार्टी के कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन और अब दागी नेताओं को मौका देना। कुल मुलाकर कांग्रेस पार्टी का ध्यान चुनाव से ज्यादा पार्टी के बीच के मतभेद को सुलझाने में ही उलझा रह जायेगा। इसके साथ दागियों के सगे संबंधियों को मौका देकर ये साबित कर दिया है कि वो किस तरह के लोगों को अपनी पार्टी में मौका देती है। स्पष्ट रूप से कांग्रेस के लिए आगामी विधान सभा चुनाव में इससे बड़ा नुकसान हो सकता है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी कैसे इस स्थिति को संभालती है।

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