सुमित भसीन ने निधि राजदान को भेजा मानहानि का नोटिस

निधि राजदान सुमित भसीन

PC: Jansatta

बीजेपी के सदस्य और पब्लिक पालिसी रिसर्च सेंटर के निदेशक सुमित भसीन ने एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान को मानहानि का नोटिस भेजा दिया है। इसके साथ ही भसीन ने ट्वीट करते हुए कहा है कि “जैसा कि वादा किया गया है, मैंने निधि को मानहानि का नोटिस भेजा है। उम्मीद करता हूं कि अगली बार जब वो कोई टिप्पणी करें तो तथ्यों को जरुर ध्यान में रखेंगी। वो फेक न्यूज़ फैलाने से बचे तो बेहतर है। हमारे पास उनके फेक न्यूज़ और अहंकार के लिए पर्याप्त जवाब है। उन्हें अब ये एहसास हो जाना चाहिए कि उन्हें घटिया पत्रकारिता से दूर रहना चाहिए।

बता दें कि एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग का इंटरव्यू लेने के बाद ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग ने कहा है कि अगर दोनों देशो की सहमति हो तो वो भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने को तैयार हैं। इसके बाद ये खबर तेज हो गयी कि अगर दोनों देश तैयार हैं तो नॉर्वे कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने में सहायता करेगा। निधि राजदान के इस ट्वीट के बाद भारत में नॉर्वे के राजदूत निल्स राग्नार कमस्वाग ने अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि, “प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग भारत और पाकिस्तान के बीच की ससमय को सुलझाने का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। नोर्वे न ही मदद का और न ही मध्यस्थता का प्रसताव दिया है। नोर्वे सिर्फ मदद मांगने पर ही मदद करता हो” बीजेपी के सदस्य और पब्लिक पालिसी रिसर्च सेंटर के निदेशक सुमित भसीन ने इस घटना का अवलोकन किया और निधि राजदान के ट्वीट और नार्वे के राजदूत ट्वीट को एक साथ शेयर किया।

इसके बाद निधि राजदान ने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए भसीन को झूठा हैं और भाजपा आईटी सेल को सुमित भसीन को झूठ के लिए भुगतान दिया होगा।

इसके बाद सुमित भसीन ने Rightlog से बातचीत में कहा था, “भारत कई बार कह चुका है कि कश्मीर का एक द्विपक्षीय मुद्दा है ऐसे इस तरह का सवाल करने की जरूरत ही नहीं है। कोई भी पत्रकार भारत सरकार और संसद भवन से ऊपर कैसे हो सकता हो? नोर्वे के राजदूत भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता को लेकर किसी भी सहमती से इंकार किया है। इसके बाद भी वो बार बार तथ्यों को तोड़-मोड़ कर पेश कर रही हैं ऐसे में एक पत्रकार की जवाबदेही बनती है।

इसके बाद निधि राजदान ने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए भसीन को झूठा हैं और भाजपा आईटी सेल को सुमित भसीन को झूठ के लिए भुगतान दिया होगा।

बीजेपी ने इसके लिए भगतान किया है ये कहना गलत है क्योंकि बीजेपी कार्यकर्ता और स्वयंसेवकों की पार्टी है। चूंकि मेरे खिलाफ आरोप लगाये गये हैं तो मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वो मेरे खिलाफ लगाये गये आरोपों को साबित करें अन्यथा क़ानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। संभवतः कांग्रेस को इस तरह के ट्रॉल्स के लिए भुगतान करती होगी लेकिन ये बीजेपी और उसके कार्यकर्ताओं की संस्कृति नहीं है कि वो राष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पैसे नहीं देती है। मुझे उम्मीद है कि भारतीय पत्रकार जिम्मेदारी से काम करेंगे और अपने निजी एजेंडे और राजनीतिक पूर्वाग्रहों के अनुरूप तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बंद कर देंगे। निधि राजदान ऐसा करने में असफल रहीं और न ही उन्होंने भसीन के ट्वीट का जवाब दिया जिसके बाद सुमित भसीन ने क़ानूनी कार्रवाई का सहारा लिया।

अक्सर ही ये दावें किये जाते हैं कि सोशल मीडिया ट्रॉल्स के लिए बीजेपी पैसे देती है जबकि वास्तविकता कुछ और है। जब भी कोई एनडीए के पक्ष में या राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन करता है उसपर इस तरह के आरोप लेफ्ट लिबरल गैंग और विपक्षी पार्टियां लगाती रही हैं। फिर भी सुमित भसीन ने अपना पक्ष रखा। सुमित भसीन ने सही कहा कि भारतीय पत्रकारों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और जवाबदेही के अधीन होना चाहिए, खासकर तब जब अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मामलों हों।

 

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