ऐसा पहला शहर बनेगा वाराणसी जहां सबसे निर्मल होगा गंगा का पानी

वाराणसी गंगा

(PC: Thoughtco)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा सीट वाराणसी या काशी देश का पहला ऐसा शहर बनने जा रहा है, जहां गंगा नदी में प्रदूषण का स्तर कम हो रहा है है। अब गंगा की सफाई के लिए सीवेज सफाई का लक्ष्य बढ़कर 400 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) से अधिक हो गया है। ये गंगा में जा रहे गंदे पानी की जांच करता है। इसका मतलब ये है कि अब बड़े पैमाने पर गंदगी और मलबा गंगा में अब नहीं जा रहा है और गंगा नदी साफ़ हो रही है. वास्तव में ये मोदी सरकार की उस योजना में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है क्योंकि मोदी सरकार ने ही नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत 2020 तक गंगा को पूरी तरह से साफ करने का वादा किया था।

बता दें कि मोदी ने 2014 में नमामि गंगे प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य गंगा को स्वच्छ बनाना था। इसके लिए मोदी सरकार ने कुल 20,000 करोड़ रुपये का बज़ट भी पास किया था। अब एक के बाद एक मिल रही सफलताओं से इस योजना के जल्द ही अपने मुकाम तक पहुंचने के संकेत मिलने लगे हैं।

बता दें कि नमामि गंगे परियोजना के तहत कुल चार शहरों के कुल 94 घाट की सफाई के लिए 13 करोड़ रुपये की लागत आयेगी। ये चार शहर कानपुर, प्रयागराज, बीठूर, मथुरा-वृंदावन हैं। वहीं वाराणसी के 84 घाटों की सफाई के लिए 5 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। सरकार का लक्ष्य था कि इन घाटों को 3 साल में साफ कर लिया जाए। उस दिशा में ये सरकार के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।

वर्तमान समय में रमना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 50 एमएलडी क्षमता का है जो अस्सी घाट से आने वाले गंदे पानी को सफा करेगा जिससे गंगा सबसे ज्यादा प्रदूषित हो रही थी. एक अनुमान के मुताबित इस समय वाराणसी में कुल 300 एमएलडी है जो की 2035 तक बढ़कर 400 एमएलडी होने की संभावना है। इस समय शहर में कुल तीन एसटीपी हैं जिनसे कुल 102 एमएलडी तक के सीवेज को ट्रीट किया जा सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले 3 एसटीपी से सीवेज ट्रीटमेंट की मात्रा बढ़कर 412 एमएलडी हो जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि नमामि गंगे परियोजना के लिए दिये गये 20,000 करोड़ रुपये का नमामि गंगे परियोजना मार्च 2019 तक लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो जाएगा जबकि दिसंबर 2019 तक यह योजना पूरी तरह से वाराणसी में पूरी हो जाएगी।  

बता दें कि इससे पहले मोदी सरकार के प्रयास का ही नतीजा था कि एशिया के सबसे बड़े व 128 साल पुराने नाले की गंदगी से भी गंगा को अब मुक्ति मिल गई है। पिछले साल नवंबर में भैरो घाट से डायवर्ट किया गया सीवेज, जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच गया था। इसके साथ ही नमामि गंगे का सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी सफल हो गया।

एनएमसीजी ने दिल्ली में यमुना के संरक्षण के लिए ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत 11 परियोजनाएँ शुरू की हैं। अधिकांश परियोजनाएं बेहतर सीवरेज बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं जो कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। यमुना एक्शन प्लान III के तहत, नई सीवर लाइनें बनाई जाएंगी, और दिल्ली के तीन ड्रेनेज जोन – कोंडली, रिठाला और ओखला में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का आधुनिकीकरण किया जाएगा। यूपी के कानपुर में गंगा में गिरने वाली गंदगी को रोकने के लिए ‘वन सिटी-वन ऑपरेटर’ योजना के तहत राष्ट्रीय गंगा सफाई मिशन (एनएमसीजी), यूपी जल निगम और कंसोर्टियम के बीच एक समझौता हुआ था। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर चलने वाली कानपुर परियोजना के तहत शुक्लागंज, पंखा और उन्नाव में तीन नए एसटीपी लगाए जायेंगे जिसकी 45.7 करोड़ लीटर सीवेज के उपचार की क्षमता होगी और चार पुराने एसटीपी को सुधार कर चलाने पर काम किया गया।

वहीं, कंसोर्टियम 15 साल के लिए पूरे सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी उठाएगा। पूरे अनुबंध की लागत 908 करोड़ रुपये है, जिसमें से 370.40 करोड़ रुपये कानपुर में 401 किलोमीटर नई सीवेज लाइनों के निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं, ये परियोजनाएं 2020 में पूरी हो जाएंगी।

वाराणसी में नमामि गंगे परियोजना की सफलता का अंदाजा खुद अब नाविक भी मान रहे हैं। संडे गार्जियन के एक लाइव रिपोर्ट में दिखाया कि विनोद मांझी नाम का एक नाविक अस्सी घाट से कह रहा है कि “पहले टूरिस्ट यहां आने में संकोच करते थे क्योंकि यहां का स्थिति बेहाल थी। घाटों के आसपास की गंदगी विशेष रूप से विदेशियों के लिए एक बड़ी बाधा थी। लेकिन नदी के तट अब बहुत अच्छी तरह से बनाए हुए हैं और पर्यटकों की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है।” वाराणसी के स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों के सफाई और निर्माणकार्यों के होने के कारण यहां अब गंदे पानी का गंगा में विसर्जन बंद हुआ है। ये सारी स्थितियां बताती हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गंगा की सफाई के लिए शुरू की गई परियोजनाएं रंग ला रही हैं।

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