राहुल गांधी के झूठ का पर्दाफाश खुद ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने अपने जवाब से कर दिया है

राहुल गांधी ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी

PC: Idrw

अपने बेतुके और हास्यास्पद भाषणों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले राहुल गांधी अब एक काल्पनिक शब्द की खोज को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष ने कल अपने आधिकारिक ट्विटर पेज से एक स्नैपशॉट को शेयर करते हुए यह दावा किया कि ‘मोदीलाई’ शब्द अब इतना मशहूर हो चुका है कि इसे अब ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी शामिल कर लिया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा साझा की गई फोटो में ‘मोदीलाई’ का मतलब लिखा हुआ है ‘सच को बार-बार तोड़-मरोड़ कर पेश करना’। हालांकि जब इस शब्द को ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में सर्च किया गया तो हमें कहीं कोई ऐसा शब्द नहीं मिला।

वहीं अब इसपर ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने भी इस मामले पर अपनी सफाई दे दी है और कहा है कि उनकी डिक्शनरी में ऐसा कोई शब्द ही नहीं है।

दरअसल,राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि ‘इंग्लिश डिक्शनरी में एक नया शब्द आया है, साथ में मैंने स्नैपशॉट भी दिया है’। इसके अलावा राहुल गांधी ने आज ‘मोदीलाई’ नाम से डोमेन भी शेयर किया, जिसके साथ ही उन्होंने लिखा कि ‘मोदीलाई’ शब्द अब पूरी दुनिया में मशहूर हो चुका है। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा ट्वीट की गई यह फोटो तब संदेह के घेरे में आ गयी जब लोगों ने इस बात की तरफ ध्यान दिया कि उनकी फोटो में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का लोगो गलत था। आनन-फानन में राहुल गांधी द्वारा इस फोटो को दूसरी बार ट्वीट किया गया लेकिन इस फोटो में भी ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का लोगो गलत बना हुआ था।

आपको बता दें कि ‘मोदीलाई’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 2012 में किया गया था। उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के लिए कांग्रेस के नेताओं और समर्थकों ने इस शब्द का प्रयोग किया था। अब उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में एक गलत तथ्य के सहारे इस शब्द को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। आपको बता दें कि राहुल गांधी द्वारा इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली के लिए भी कुछ ऐसे ही शब्दों का प्रयोग किया जा चुका है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में अरुण जेटली की स्पेलिंग को जान-बूझकर ‘जेटलाई’ लिखा था जिसके बाद वे भाजपा के निशाने पर भी आ गए थे।

यह तो स्पष्ट हो गया है कि राहुल गांधी का यह ट्वीट पूरी तरह आधारहीन है, लेकिन अब तक राहुल गांधी द्वारा ना तो इसे डिलीट किया गया है और ना ही इसपर कोई स्पष्टीकरण जारी किया है। अब तक यह भी साफ नहीं हो पाया है कि राहुल गांधी ने इस ट्वीट को एक व्यंग्य के तौर पर पोस्ट किया है या फिर वे अपने आईटी सेल पर जरूरत से ज़्यादा भरोसा करते हैं। इन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने फेक न्यूज़ और गलत तथ्यों के आधार पर लोगों को प्रभावित करने की भरपूर कोशिश की। ठीक आखिरी चरण से पहले एक और फेक न्यूज़ फैलाकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी उसी मानसिकता को एक बार फिर सबके सामने रखा है।

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