अमित शाह v/s ‘लिंचिंग गैंग’: लिबरलों का एजेंडा अब उड़ान भरने से पहले होगा क्रैश

(PC: DNA India)

भीड़तंत्र किसी भी लोकतन्त्र के लिए खतरनाक है। एक लोकतांत्रिक देश में किसी भी अपराध के लिए कड़े क़ानूनों का होना और उनका सही से पालन होने अत्यंत महत्वपूर्ण है। मोब लिंचिंग यानि भीड़ द्वारा किसी की हत्या करने जैसे अपराध संबंधी खबरें आज कल सभी अखबारों और न्यूज़ चैनल में देखने को मिलती हैं, और मीडिया के एक वर्ग द्वारा ऐसी तस्वीर बनाने की कोशिश की जाती है मानो ये अपराध भारत में वर्ष 2014 में मोदी सरकार आने के बाद से ही शुरू हुए हैं और देश में भीड़तंत्र को बढ़ावा मिला है। मीडिया के इसी एजेंडे को एक्सपोज करने के लिए अब गृह मंत्रालय ने कमर कस ली है, और अमित शाह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स यानि सशक्त मंत्रियों के समूह का और ज़्यादा मजबूती के साथ नेतृत्व करेंगे। सशक्त मंत्रियों का यह समूह देश भर में होने वाली लिंचिंग की घटनाओं की बिना किसी पक्षपात की जांच की अगुवाई करेगा और साथ ही लिबरल गैंग के एजेंडे को भी धराशायी करेगा।

भारत में कई सालों से जाति या धर्म संबधित मामलों में लिंचिंग की खबरें आती रहीं हैं। और यह अपराध किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। लेकिन भारत के मुख्यधारा मीडिया में अक्सर उन्हीं खबरों को जगह मिलती है जिनमें मुस्लिमों को पीड़ित दिखाया जाता है। ऐसी खबरों को प्रकाशित करके अक्सर सरकार को अल्पसंख्यक-विरोधी घोषित करने के एजेंडे को आगे बढ़ाया जाता है। इसी को देखते हुए मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान एक सशक्त मंत्रियों के समूह का गठन किया गया था। इस समूह का मुख्य उद्देश्य लिंचिंग की घटनाओं के संबंध में उचित नीतियों का गठन करना था। पहले कार्यकाल में मंत्रियों के इस समूह ने 2 बार बैठकें भी की थीं। अब जब नई सरकार सत्ता में आई है, तो पुराने मंत्रालयों के नए मंत्री इस समूह का हिस्सा बन गए हैं, जो अमित शाह के नेतृत्व में अपना कार्यभार संभाल रहे हैं।

मंत्रियों के इस समूह में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर, यातायात मंत्री नितिन गडकरी, कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत शामिल हैं।

सिर केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि सीएम योगी के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार भी राज्य में लिंचिंग जैसे अपराधों के लिए क़ानूनों को सख्त करने जा रही है। उत्तर प्रदेश स्टेट लॉं कमीशन ने सीएम योगी को इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपी है, जिसमें इस अपराध में शामिल लोगों को जेल और जुर्माना जैसी सजाओं का प्रावधान करने की सिफ़ारिश की गई है।

जैसा हमने बताया कि भारत के कुछ भाजपा विरोधी लोग अक्सर चुनिन्दा खबरों को प्रकाशित करके सरकार के खिलाफ एजेंडा चलाने का प्रयास करते हैं, और अक्सर पीएम मोदी को इस सब के लिए दोषी ठहराने का प्रयास करते हैं। हालांकि, जब ऐसे एजेंडावादी लोगों से तथ्य मांगे जाते हैं, तो ये तुरंत चुप्पी साध लेते हैं।

ऐसे ही लोगों को जवाब देने के लिए ट्विटर पर प्रचलित हस्ती आनंद रंगनाथन ने पिछले कुछ सालों के दौरान एक विस्तृत थ्रेड बनाया है जिसमें उन्होंने उन सभी खबरों को प्रकाशित किया है जिसमें हिंदुओं को पीड़ित दिखाया गया है। हिन्दू समुदाय के खिलाफ एजेंडा चलाने वालों के लिए यह ट्विटर थ्रेड़ किसी तमाचे से कम नहीं है।

https://twitter.com/ARanganathan72/status/1018125318404571137?s=20

अब जब अमित शाह देश के गृह मंत्रालय का पदभार संभाल रहे हैं, तो सशक्त मंत्रियों के इस समूह की कार्यप्रणाली पहले से बेहतर होगी और लिंचिंग जैसे अपराधों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से नीतियाँ बन पाएंगी। हालांकि, यह खबर ऐसे एजेंडावादी लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, क्योंकि अब वे पक्षपाती ढंग से हिंदुओं के खिलाफ अपना एजेंडा चलाने में सफल नहीं हो पाएंगे और उनका प्रोपेगैंडा उड़ान भरने से पहले से ही क्रेश हो जाएगा।

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