पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का अंतिम और निर्णायक चरण बुधवार को लोकतंत्र के उत्सव से कहीं अधिक ‘रणक्षेत्र’ जैसा नजर आया। नादिया की शांत गलियों से लेकर कोलकाता के वीआईपी इलाके भवानीपुर तक, हर तरफ हिंसा, तोड़फोड़ और हंगामे की खबरें छाई रहीं। कहीं ईवीएम खराब होने से मतदाताओं का सब्र जवाब दे गया, तो कहीं राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला। पनिहाटी में आरजी कर पीड़िता की मां का घेराव और भवानीपुर में जय श्रीराम बनाम जय बांग्ला के नारों ने माहौल को और भी अधिक तनावपूर्ण बना दिया। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, बंगाल की जनता ने अपने जज्बे का परिचय देते हुए भारी मतदान किया, जो यह दर्शाता है कि हिंसा चाहे कितनी भी हो, बदलाव या निरंतरता की गूँज मतपेटियों में ही दफन होगी।
EVM का खेल: कहीं डमी मशीन तो कहीं जाम हुए बटन
चुनाव के इस चरण में ईवीएम (EVM) सबसे बड़ा विवाद का केंद्र बनकर उभरी। उत्तर 24 परगना के बारानगर में मतदाताओं का गुस्सा तब फूट पड़ा जब बूथ नंबर 72 पर पांच बार मशीनें बदली गईं, लेकिन मतदान शुरू नहीं हो सका। निराश मतदाता सुबह 7 बजे से लाइन में लगे रहने के बाद बिना वोट दिए घर लौटने को मजबूर हुए। वहीं, नोआपाड़ा में बीजेपी प्रत्याशी अर्जुन सिंह ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ता बूथों के बाहर ‘डमी ईवीएम’ रखकर मतदाताओं को भ्रमित कर रहे थे। दक्षिण 24 परगना के फलता में भी देवांशु पांडा ने दावा किया कि कई मशीनों में बीजेपी के चुनाव चिह्न वाला बटन जानबूझकर जाम कर दिया गया था ताकि लोग वोट न दे सकें।
पनिहाटी में तनाव: आरजी कर पीड़िता की मां पर हमला और घेराव
दिन की सबसे दुखद और तनावपूर्ण घटना पनिहाटी में देखने को मिली। यहाँ आरजी कर रेप-मर्डर पीड़िता की मां और भाजपा प्रत्याशी रत्ना देबनाथ के काफिले को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। उनके पति शेखररंजन देबनाथ ने आरोप लगाया कि मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने उन पर हमला करने की कोशिश की और पुलिस ने उपद्रवियों को हटाने के बजाय पीड़ितों को ही वहां से चले जाने को कहा। इस दौरान पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का प्रयोग करना पड़ा। भाजपा का आरोप है कि रत्ना देबनाथ की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सत्ता पक्ष उन्हें डराने की कोशिश कर रहा है।
भवानीपुर का हाई वोल्टेज ड्रामा: जय श्रीराम बनाम जय बांग्ला
कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित सीट भवानीपुर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब शुभेंदु अधिकारी एक पोलिंग बूथ का दौरा करने पहुँचे। जैसे ही वह बूथ से बाहर निकले और “जय श्रीराम” के नारे लगाए, वहां मौजूद भीड़ ने “जय बांग्ला” के नारों के साथ उनका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई और पूरा इलाका राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और लाठियां भांजकर भीड़ को खदेड़ा। प्रशासन को सड़कों पर जमा भीड़ को हटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
हिंसा और गिरफ्तारी: नादिया और हावड़ा में खूनी संघर्ष
नादिया जिले के चापड़ा क्षेत्र से जो तस्वीरें सामने आईं, वे लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली थीं। बीजेपी के पोलिंग एजेंट मोशर्रफ मिर पर लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके सिर पर छह टांके आए हैं। वहीं, हावड़ा के बाली स्थित डॉन बॉस्को स्कूल में ईवीएम खराब होने पर मतदाताओं के आक्रोश ने हिंसा का रूप ले लिया। यहां पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, कई अन्य बूथों (152, 153, 154) पर भी पूरे दिन भारी तनाव की स्थिति बनी रही।
बंपर वोटिंग: हिंसा पर भारी पड़ा जनादेश
तमाम तोड़फोड़, मारपीट और हंगामे के बीच पश्चिम बंगाल की जनता ने मतदान केंद्रों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दोपहर एक बजे तक ही 142 सीटों पर 61 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा बताता है कि बंगाल में चुनावी हिंसा भले ही पुरानी परंपरा बन चुकी हो, लेकिन मतदाताओं का अपने हक के प्रति जुनून अभी भी बरकरार है। नादिया से लेकर पणजी तक और फलता से लेकर भवानीपुर तक, सुरक्षाबलों की तैनाती के बावजूद माहौल ‘टाइट’ रहा, लेकिन शाम होते-होते यह साफ हो गया कि इस बार का मुकाबला बेहद करीबी और दिलचस्प होने वाला है।




























