भारत के रक्षा निर्यात को नई गति मिली है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि इंडोनेशिया के साथ इसी तरह का सौदा अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
यह घोषणा सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान की गई, जिसे एशिया का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा मंच माना जाता है। इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के रक्षा मंत्री, सैन्य अधिकारी और रणनीतिक विशेषज्ञ क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने के लिए जुटे थे।
यह कदम हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में भारत को एक भरोसेमंद रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली आज भारत के सबसे सफल रक्षा निर्यात उत्पादों में से एक बन चुकी है। समुद्री सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की चाह रखने वाले कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा सहयोग पर चर्चा
शांगरी-ला डायलॉग के दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सचिव मेघन क्विन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की।
बैठक में भविष्य की उच्चस्तरीय बैठकों और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के नए अवसरों पर चर्चा हुई। हाल के वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के साझा उद्देश्य के कारण भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।
यूरोपीय संघ के साथ बढ़ा रणनीतिक संवाद
रक्षा सचिव ने यूरोपीय संघ की वरिष्ठ अधिकारी बेलेन मार्टिनेज कार्बोनेल और यूरोपीय संघ सैन्य समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एनरिको बार्दुआनी से भी मुलाकात की।
इन बैठकों में साझा सुरक्षा चिंताओं, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा तथा रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।
इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड की रक्षा मंत्री डिलान येसिलगोज-जेगेरियस के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने सैन्य सहयोग बढ़ाने और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी के नए अवसरों पर चर्चा की।
कनाडा के साथ भी हुई अहम बातचीत
सम्मेलन के दौरान राजेश कुमार सिंह ने कनाडा के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी केल्विन ब्रोसो से भी मुलाकात की। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग और विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।
इससे पहले रक्षा सचिव ने सिंगापुर के क्रांजी वॉर मेमोरियल में जाकर विश्व युद्धों में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्रालय ने इसे भारत और सिंगापुर के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक बताया।
ब्रह्मोस समझौता बना सबसे बड़ा संदेश
हालांकि सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें हुईं, लेकिन वियतनाम और इंडोनेशिया से जुड़ा ब्रह्मोस मिसाइल समझौता सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया।
वियतनाम के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के रक्षा निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह भी दिखाता है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक ताकत को मजबूत रक्षा साझेदारियों में बदलने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल के बीच ब्रह्मोस मिसाइल भारत की रक्षा कूटनीति और रक्षा निर्यात रणनीति का एक अहम स्तंभ बनकर उभर रही है।































