हाल ही में नीट (NEET) पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के बाद दिए गए अपने एक बयान में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता धर्मेन्द्र प्रधान ने युवा पीढ़ी यानी ‘Gen Z’ (जेन जी) को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन युवाओं की ताकत और आकांक्षाओं के आगे कोई पद बड़ा नहीं है। लेकिन राजनीतिक हलकों में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या देश का युवा और पहली बार वोट देने वाला मतदाता (First-time voter) सत्ताधारी दल के साथ मजबूती से खड़ा है?
आइए, आंकड़ों और चुनावी डेटा के जरिए समझते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान के बयान के पीछे की सच्चाई क्या है और भारत का Gen Z वोटर किस दिशा में सोच रहा है।
धर्मेन्द्र प्रधान ने क्या कहा ?
हाल ही में संबलपुर में एक जनसभा और छात्रों के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने अपने इस्तीफे और युवाओं पर बात करते हुए कहा– “Gen Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। देश में हर साल लगभग 2 करोड़ बच्चे पैदा होते हैं, यानी 10 सालों में 20 करोड़ नई पीढ़ी के युवा सामने आए हैं। जब 20 करोड़ युवा किसी बात का संकल्प ले लेते हैं, तो उनके संकल्प के आगे मेरे मंत्री पद की कोई बिसात नहीं है। मेरे लिए पद या निजी प्रतिष्ठा कोई मायने नहीं रखती। इतिहास गवाह है कि बदलाव की अगुवाई हमेशा युवाओं ने ही की है, वे अपने दौर के Gen Z ही थे। इसलिए हमें युवाओं का विरोध करने के बजाय उन्हें समझने की जरूरत है।“
कौन है Gen Z ?
तकनीकी और समाजशास्त्रीय परिभाषा के अनुसार Gen Z’ (Generation Z) उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। 2026 में इनकी उम्र 14 से 29 वर्ष के बीच है।चुनावी संदर्भ में, 18 से 27-28 वर्ष के वे युवा जो हाल के चुनावों में पहली या दूसरी बार मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें राजनीतिक विश्लेषक ‘Gen Z Voter’ मानते हैं।
GEN Z कितना बड़ा हिस्सा है कुल वोटर का
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 2024 के आम चुनावों के दौरान जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2024 के चुनाव में लगभग 96.8 करोड़ कुल पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 2 % मतदाता यानि 1.85 करोड़ से अधिक युवा 18-19 साल की उम्र के थे ।वहीं 20 से 29 वर्ष की आयु के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 19.74 करोड़ (लगभग 20.4%) थी।
क्या GEN Z या Yuva भाजपा के साथ है?
जब हम चुनाव दर चुनाव युवाओं के वोटिंग पैटर्न का विश्लेषण करते हैं, तो CSDS-Lokniti के डेटा से दिलचस्प रुझान सामने आते हैं। 2014 और 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को युवा मतदाताओं का भारी समर्थन मिला था। 2019 में बीजेपी ने 18-25 वर्ष के युवा वोटरों के बीच कांग्रेस पर 20% की बड़ी बढ़त बनाई थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में स्थिति में हल्का बदलाव देखा गया, जहां विपक्षी गठबंधन (INDIA) ने युवाओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाई, लेकिन NDA अब भी युवाओं का पसंदीदा गठबंधन बना हुआ है।
नीचे दिए गए आंकड़े बताते हैं कि 18 से 25 वर्ष के युवा मतदाताओं ने पिछले दो आम चुनावों में किस तरह मतदान किया:
Data Box: युवा वोटरों ने किस वोट दिया – How Young Voters (18-25 %) Voted
YEAR BJP CONG 2019 40 % 20 % 2024 39 % 21 %
Source- CSDS
क्या कहता है डेटा
CSDS के डाटा के अनुसार बीजेपी का दबदबा बरकरार है। 2019 में 40% युवाओं ने बीजेपी को वोट दिया था, जो 2024 में घटकर 39% रह गया। यानी बीजेपी का कोर युवा वोट बैंक बहुत ज्यादा नहीं खिसका है, लेकिन बढ़त रुक गई है। इसके मुकाबले 2019 में कांग्रेस को 20% युवा वोट मिले थे, जो 2024 में 1 % बढ़कर सिर्फ 21% ही हुए। इस युवा वर्ग में दोनो पार्टियों के बीच अंतर 20 % से कम होकर 18 % रह गया है । वही गठबंधन (NDA vs INDIA) के स्तर पर देखा जाए तो NDA को 46% और INDIA को 33% युवा वोट मिले। यानी दोनों के बीच भी इस आयुवर्ग में 13 प्रतिशत अंकों का अंतर है।































