दो आखिरी Tejas Mk-1 twin-seater trainer विमान शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को सौंपे जाएंगे। इसके साथ 40 विमानों वाला शुरुआती Tejas Mk-1 ऑर्डर पूरा हो जाएगा। ये करीब दो दशक पुराने उस शुरुआती कार्यक्रम की आखिरी कड़ी हैं, जिसने भारत को लड़ाकू विमान डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता खोला था। HAL के मुताबिक शुक्रवार को दिए जाने वाले दो twin-seat FOC trainer विमान शुरुआती 40-aircraft Mk-1 ऑर्डर को पूरा करेंगे।
लेकिन इसी समय Tejas की अगली पीढ़ी यानी Mk1A का मामला सवाल खड़े करता है। IAF के लिए 83 Mk1A विमानों का पहला बड़ा ऑर्डर 2021 में हुआ था और इनकी डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी। सितंबर 2026 तक एक भी Mk1A IAF को औपचारिक रूप से सौंपा नहीं गया है। बाद में 97 और Mk1A का ऑर्डर जुड़ गया। यानी अब कुल 180 Mk1A विमान ऑर्डर पर हैं।
ट्रेनर तेजस की जरूरत क्यों पड़ी?
लड़ाकू विमान केवल अकेले उड़ने वाले fighter के रूप में नहीं आता। नए पायलट को operational fighter पर भेजने से पहले उसे विमान की handling, weapons, navigation और emergency procedures की ट्रेनिंग देनी होती है। इसके लिए twin-seat trainer version महत्वपूर्ण होता है, जिसमें प्रशिक्षक और trainee दोनों बैठ सकते हैं।
Tejas के शुरुआती ऑर्डर में ही trainer को शामिल किया गया था। 31 मार्च 2006 को IAF और HAL के बीच 20 LCA का पहला अनुबंध हुआ—16 fighter और 4 trainer। इसके बाद 23 दिसंबर 2010 को 20 और विमान का FOC अनुबंध हुआ—फिर 16 fighter और 4 trainer। इस तरह शुरुआती ऑर्डर में कुल 8 twin-seat trainer थे।
यहीं से देरी की कहानी शुरू होती है। 2006 के ऑर्डर के समय उम्मीद थी कि LCA को Initial Operational Clearance यानी IOC 2008 तक मिल जाएगा और शुरुआती विमानों की डिलीवरी दिसंबर 2011 तक पूरी हो जाएगी। लेकिन IOC दिसंबर 2013 में मिला। इसके बाद production और certification की प्रक्रिया आगे बढ़ी। 2010 वाले FOC ऑर्डर की पूरी डिलीवरी दिसंबर 2016 तक की होनी थी।
यानी Tejas की देरी केवल manufacturing की कहानी नहीं थी। इसमें design development, certification, configuration clearance और production readiness, सभी स्तरों की चुनौतियां शामिल थीं।
ट्रेनर विमान इतने देर से क्यों आए?
शुरुआती 40 विमानों में fighters की डिलीवरी पहले आगे बढ़ी, लेकिन trainer aircraft के लिए design clearance जरूरी था। 2019 में रक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया था कि 8 trainer aircraft का production ADA से design clearance मिलने के बाद ही आगे बढ़ाया जा सकता था। सरकार ने production capacity बढ़ाने के लिए HAL में दूसरी production line, ज्यादा jigs, private suppliers और supply-chain सुधार जैसे कदम भी उठाए।
आखिर पहला trainer अक्टूबर 2023 में IAF को मिला। HAL ने बाकी trainers को मार्च 2024 तक देने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वह समयसीमा भी पूरी नहीं हो सकी। अब सितंबर 2026 में आखिरी दो twin-seater trainers की डिलीवरी हो रही है।
इसका मतलब यह नहीं कि इन 16 वर्षों में Tejas ने उड़ान ही नहीं भरी। शुरुआती Mk-1 के fighter variants की डिलीवरी हो चुकी है और IAF में Tejas operational भी है। लेकिन शुरुआती ऑर्डर को पूरी तरह बंद करने में अपेक्षा से कहीं ज्यादा समय लगा।
फिर आया Mk1A—और नई मुश्किलें शुरू हो गईं
Mk1A को मूल Tejas से ज्यादा सक्षम configuration के तौर पर विकसित किया गया। इसमें AESA radar, बेहतर electronic warfare suite, air-to-air refuelling और enhanced weapons integration जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
फरवरी 2021 में सरकार ने 73 fighters और 10 twin-seat trainers यानी कुल 83 Mk1A के लिए करीब ₹48,000 करोड़ का अनुबंध HAL को दिया। उस समय योजना थी कि सभी 83 विमान आठ साल में दिए जाएंगे और शुरुआती तीन विमान तीसरे साल में आएंगे। लेकिन मार्च 2024 की निर्धारित शुरुआत के बजाय सितंबर 2026 तक डिलीवरी शुरू नहीं हो सकी।
इस देरी के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा GE Aerospace के F404-IN20 engines की सप्लाई रहा। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में तीन और इंजिन भारत पहुंचे, जिससे कार्यक्रम के तहत GE से मिले इंजिन की संख्या 10 हुई। लेकिन HAL के बनाए कई Mk1A एयरफ्रेम्स प्रोडक्शन स्टैंडर्ड इंजन का इंतजार करते रहे। लेकिन सिर्फ इंजन ही समस्या नहीं थी। Mk1A में Israeli AESA रडार को इंटीग्रेट करना भी प्रोग्राम की चुनौतियों में शामिल रहा है।
HAL ने विमान बनाए, फिर भी डिलीवरी क्यों नहीं हुई?
यह फर्क समझना जरूरी है। विमान का एयरफ्रेम बन जाना और उसे IAF को आपरेशन डिलीवरी के लिए सौंप देना एक ही बात नहीं है। Mk1A में रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, फ्लाइट कंट्रोल कम्प्यूटर, हथियार और दूसरे मिशन सिस्टम का इंटीग्रेशन और वेलिडेशन जरूरी है। फरवरी 2024 में DRDO ने Mk1A के indigenous Digital Flight Control Computer का सफल फ्लाइट टेस्ट किया था। इससे पता चलता है कि एयरक्राफ्ट प्रोग्राम में लगातार नई सिस्टम लेवल टेस्टिंग भी चल रही थी।
सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार HAL करीब 30 Mk1A airframes बना चुका है और शुरुआती करीब 20 एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग तथा initial flight testing पूरा कर चुके थे। लेकिन इंजिन की उपलब्धता डिलीवरी को प्रभावित करती रही।
अब तेजस की पूरी तस्वीर क्या है?
आज Tejas प्रोग्राम को सिर्फ 40 पुराने Mk-1 विमानों से नहीं देखना चाहिए। पहला चरण 40 Mk-1—16 IOC fighters, 16 FOC fighters और 8 ट्रेनर्स था जो ऑर्डर अब पूरा हो रहा है।
दूसरा चरण 83 Mk1A—73 fighters और 10 trainers का था, जिसका अनुबंध 2021 में हुआ था। इसकी डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक एक भी डिलीवरी नहीं हुई ।
तीसरा चरण, सितंबर 2025 का 97 Mk1A का नया ऑर्डर का है, जिसके तहत 68 fighters और 29 twin-seaters डिलिवर करने हैं, जिनकी कीमत ₹62,370 करोड़ से ज्यादा है। सरकार के मुताबिक इसकी डिलीवरी 2027-28 से शुरू होकर छह वर्षों में पूरी होनी हैं।
इस तरह IAF के पास अब कुल 180 Mk1A का order है—लेकिन इन 180 में से पहला विमान कब नियमित रूप से squadron में पहुंचेगा, यही फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
तेजस की देरी, देश की सुरक्षा क्यों जरुरी ?
क्योंकि मामला सिर्फ HAL या एक aircraft प्रोग्राम का नहीं है। IAF के पास 42.5 squadrons की मंजूरी है, जबकि मौजूदा strength करीब 29 squadrons बताई जा रही है। ऐसे समय में स्वदेशी फाइटर प्लेन की समय पर उपलब्धता सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है
Tejas प्रोग्राम भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए fighter aircraft design, manufacturing, avionics, radar, private-sector supply chain और aerospace ecosystem को देश में विकसित किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक 2025 के 97-aircraft Mk1A order में indigenous content 64% से ज्यादा रखा गया है और करीब 105 भारतीय कंपनियां प्रोग्राम से जुड़ी हैं।
इसलिए Tejas की कहानी को केवल “16 साल की देरी” या केवल “आत्मनिर्भरता की सफलता” के दो सिरों में बांटना सही तस्वीर नहीं देगा। सच यह है कि भारत ने एक indigenous fighter ecosystem खड़ा किया है, लेकिन उसी ecosystem को समय पर production, certification और critical components की supply के स्तर पर और मजबूत करना होगा।
शुक्रवार को आखिरी दो trainer Tejas की डिलीवरी एक पुराने अध्याय को बंद करेगी। असली परीक्षा अब Mk1A की है कि क्योंकि भारत ने 180 विमानों का ऑर्डर कर दिया है, production capacity बढ़ा दी है, लेकिन IAF को इंतजार अब भी पहले एयरक्राफ्ट का है।


























