भारतीय सेना जल्द ही अपने पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (Integrated Battle Group-IBG) को ऑपरेशनल करने जा रही है। इसे सेना की युद्ध संरचना में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इन नए लड़ाकू समूहों के आने से सेना को पूरे कोर (Corps) के जुटने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और जरूरत पड़ने पर कम समय में हमला या रक्षा अभियान शुरू किया जा सकेगा।
चीन सीमा पर तैनात होंगे पहले IBG
सेना के पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप का गठन पानागढ़ स्थित 17वीं कोर (XVII Corps) से किया जाएगा। यह कोर चीन सीमा पर सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालती है।
योजना के अनुसार, XVII कोर के तहत—
- 4 इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) बनाए जाएंगे।
- 1 फायर सपोर्ट ग्रुप भी तैयार किया जाएगा।
- इन सभी पांचों इकाइयों का नेतृत्व मेजर जनरल स्तर के अधिकारी करेंगे।
- प्रत्येक IBG में एक ब्रिगेडियर चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर (COO) के रूप में कार्य करेगा।
करीब सात वर्षों से इस योजना पर विचार किया जा रहा था। इसका प्रस्ताव पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत द्वारा शुरू किए गए सेना पुनर्गठन कार्यक्रम के दौरान रखा गया था। कई परीक्षणों और सैन्य अभ्यासों के बाद अब इसे लागू किया जा रहा है।
क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG)?
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप एक ऐसी आधुनिक सैन्य इकाई होगी, जो किसी भी अभियान को स्वतंत्र रूप से पूरा करने में सक्षम होगी।
एक IBG में 5,000 से अधिक सैनिक होंगे, जो 12 से 13 अलग-अलग सैन्य इकाइयों से मिलकर बनाए जाएंगे।
इसमें शामिल होंगे—
- पैदल सेना (इन्फैंट्री)
- तोपखाना (आर्टिलरी)
- कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME)
- कॉम्बैट इंजीनियर
- आर्मी सर्विस कॉर्प्स
- फील्ड हॉस्पिटल
इन सभी को एक ही कमांड के तहत रखा जाएगा, जिससे अलग-अलग सहायता का इंतजार किए बिना संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जा सकेगा।
पुरानी व्यवस्था से कैसे अलग होगा IBG?
अब तक किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए पूरी कोर को सक्रिय करना पड़ता था। एक कोर में लगभग एक लाख सैनिक हो सकते हैं, इसलिए उसे तैयार होने और तैनात होने में काफी समय लगता है।
इसके विपरीत, IBG आकार में छोटा लेकिन पूरी तरह सक्षम होगा। इसे कम समय में किसी भी क्षेत्र में भेजा जा सकेगा और यह अपने दम पर लंबे समय तक अभियान चला सकेगा। खासकर पहाड़ी इलाकों में इसकी तेजी और लचीलापन सेना के लिए बड़ी ताकत साबित होगा।
फायर सपोर्ट ग्रुप भी होगा तैयार
चार IBG के साथ सेना एक फायर सपोर्ट ग्रुप भी बनाएगी, जिसमें आधुनिक तोपखाना शामिल होगा।
यह ग्रुप सीधे XVII कोर मुख्यालय के अधीन रहेगा। सेना की नई दिव्यास्त्र (Divyastra) बैटरियों को भी इसमें शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और बेहतर होगी।
सेना के बड़े आधुनिकीकरण का हिस्सा
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप सेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा हैं। इसके साथ-साथ सेना—
- रुद्र ब्रिगेड
- भैरव बटालियन
- दिव्यास्त्र बैटरी
- शक्तिबाण यूनिट
जैसी नई सैन्य इकाइयों का भी गठन कर रही है।
हालांकि रुद्र ब्रिगेड भी कई लड़ाकू इकाइयों को एक साथ लाएगी, लेकिन उसे अतिरिक्त सहायता के लिए अपनी मूल डिवीजन पर निर्भर रहना होगा। वहीं IBG पूरी तरह आत्मनिर्भर लड़ाकू इकाई होगी।
भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखकर किया जा रहा बदलाव
सेना का कहना है कि यह बदलाव किसी एक देश को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि, भारत की उत्तरी सीमाओं पर तेजी से बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए तेज तैनाती और संयुक्त युद्ध क्षमता की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
सात साल पहले शुरू हुआ था यह विचार
IBG की अवधारणा का पहला परीक्षण वर्ष 2019 में पाकिस्तान सीमा पर IX कोर द्वारा किया गया था, लेकिन उस समय इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया।
इसके बाद एक्सरसाइज हिमविजय-2019 समेत कई सैन्य अभ्यासों में पहाड़ी इलाकों में इसकी क्षमता का परीक्षण किया गया। इन अभ्यासों के बाद मॉडल में कई सुधार किए गए।
थिएटर कमांड में भी होगी तैनाती
सेना की योजना है कि भविष्य में इन इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स को प्रस्तावित थिएटर कमांड के तहत भी तैनात किया जा सकेगा। इससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त अभियान चलाना आसान होगा।
चीन की सैन्य रणनीति से भी मिलता-जुलता मॉडल
पिछले एक दशक में चीन ने भी अपनी सेना में बड़े बदलाव किए हैं। उसने पारंपरिक डिवीजनों की जगह छोटे लेकिन अधिक सक्षम कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड तैयार किए हैं, जिनमें टैंक, तोपखाना, एयर डिफेंस और लॉजिस्टिक सहायता एक ही कमांड के तहत काम करती है।
भारतीय सेना के लिए क्यों है अहम कदम?
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप का गठन केवल नई सैन्य इकाइयों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना की युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव है। इससे सेना को तेज तैनाती, बेहतर समन्वय, आधुनिक युद्ध क्षमता और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने की ताकत मिलेगी। भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना की तैयारी और प्रभावशीलता बढ़ाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


































