पिछले तीन बरसों में मैंने देखा है कि हमारे यहां गेम्स को लेकर लोगों की सोच में कितना बड़ा बदलाव आया है। पहले घर के बड़े बुजुर्ग बच्चों को मोबाइल से कोसों दूर रखना चाहते थे। अब वही लोग समझने लगे हैं कि गेमिंग वाला काम कोई बेकार की चीज नहीं है, बल्कि एक बढ़िया करियर ऑप्शन बनता जा रहा है।
मेरा एक यार superbull gaming जैसी जगहों पर गेम्स खेलकर महीने के पंद्रह हजार रुपये तक कमा लेता है। मैं तो पहले हंसा था, फिर खुद खोजबीन की तो पता चला कि इस साल हमारे देश में साढ़े बयालीस करोड़ से ज्यादा लोग ऑनलाइन गेम्स खेलते हैं।
गेमिंग में पैसे से कहीं बढ़कर चीजें मिलती हैं
गेमिंग का मतलब सिर्फ पैसा नहीं होता, दिमाग भी तेज होता है। मेरे छोटे भाई ने जब स्ट्रेटजी वाले गेम्स खेलने शुरू किए तब से उसमें फैसला लेने की काबिलियत बढ़ गई है।
आजकल टीम वर्क सीखने का इससे बढ़िया जरिया और क्या होगा। ऑनलाइन गेम्स में दूर दूर के शहरों के लोगों के साथ मिलकर खेलना पड़ता है। बातचीत, प्लानिंग और समझदारी से काम लेना पड़ता है। यह सारी चीजें असली जिंदगी में भी काम आती हैं।
हमारे देश के बाजार में धमाल मचा हुआ है
दो हजार इक्कीस में मैंने नोटिस किया कि गेमिंग कैफे की तादाद तेजी से बढ़ रही है। मेरे शहर में बारह महीनों में सात नए गेमिंग जोन खुल गए।
पूरे मुल्क में एक अलग हलचल मची है। छोटे कस्बों में भी तेज इंटरनेट पहुंच गया है। स्मार्टफोन छह हजार से कम में मिल जाते हैं। लोकल भाषाओं में गेम्स आने लगे हैं। यूपीआई से पेमेंट इतना आसान हो गया है कि क्या बताऊं।
किसान घरों के बच्चे भी अब कम्पटीटिव गेमिंग में दिलचस्पी ले रहे हैं। पहले यह सब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित था।
सावधानी भी रखनी पड़ेगी
हर चीज की एक हद होती है। मेरी गली में एक लड़का पूरे नौ दस घंटे गेम में लगा रहता था। बेचारे की पढ़ाई चौपट हो गई और आंखों में दिक्कत आने लगी।
बैलेंस बनाकर रखना जरूरी है। दो तीन घंटे खेलो, मजे करो, अगर टैलेंट है तो कमाओ भी। लेकिन अपनी सेहत और जिम्मेदारियों को भूलना मत।
आने वाले दिनों में और धूम मचेगी
अगले साल तक हमारे देश की गेमिंग इंडस्ट्री की कीमत साढ़े आठ बिलियन डॉलर हो जाएगी। सरकार भी इस चीज को सीरियसली लेने लगी है। कई राज्यों में बड़े गेमिंग टूर्नामेंट होने लगे हैं।
नौजवानों के लिए एक नया दरवाजा खुल गया है। आप प्रोफेशनल गेमर बन सकते हो, कंटेंट क्रिएटर बन सकते हो, या गेम डेवलपमेंट सीख सकते हो। मेरा एक कजन गेम डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रहा है और उसे पहले से तीन कंपनियों से प्लेसमेंट का ऑफर आ गया है।
हमारे देश में गेमिंग अब कोई हॉबी नहीं रह गई। एक पूरा सिस्टम बन गया है जहां स्किल मिलती है, एंटरटेनमेंट मिलता है और कमाई भी होती है।

































