केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि भारत पहले की तुलना में अधिक मात्रा में रूस से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को कभी भी रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद करने के लिए नहीं कहा गया था। केवल उन कंपनियों या संस्थाओं से तेल न खरीदने की सलाह दी गई थी, जिन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध (सैंक्शन) लगाए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों और उद्योगों के लिए ऊर्जा की निरंतर और किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से सरकार ने तेल आयात के स्रोतों को लगातार बढ़ाया है। आज भारत केवल कुछ देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है और किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर भी आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना कम हो जाती है।
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कई बार युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसके बावजूद भारत ने अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की नीति अपनाकर अपनी जरूरतों को पूरा किया और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखी।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति का फायदा देश को मिला है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने वाली चुनौतियों के बावजूद भारत अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों पर तेल की व्यवस्था कर सका है।
सरकार का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए भविष्य में भी भारत अपने आयात स्रोतों का विस्तार करने और वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार संतुलित ऊर्जा नीति अपनाने पर जोर देता रहेगा।































