बजट 2019: डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने की बड़ी घोषणा

देश की अर्थव्यवस्था को कैशलैस बनाने की दिशा में मोदी सरकार शुरू से ही काम कर रही है। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने पर फोकस किया गया। इसके लिए जहां सरकार कैश लेनदेन पर टैक्स लगाने पर विचार कर सकती है तो वहीं डिजिटल लेनदेन पर सरकार टैक्स पर छूट दे सकती है। सरकार किसी भी व्यापारी द्वारा एक साल में बैंक खाते से 1 करोड़ से ज़्यादा कैश निकालने पर 2 प्रतिशत टीडीएस लगाने पर विचार कर सकती है, इसके अलावा सरकार ऐसे नियमों को बनाने पर भी विचार कर सकती है जिसके तहत 50 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर वाले व्यापारियों को अपने ग्राहकों को भीम, यूपीआई, आरटीजीएस, डेबिट कार्ड के माध्यम से लेनदेन करने का विकल्प प्रदान करना होगा। सरकार के इन कदमों से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि डिजिटल लेनदेन करने पर व्यापारियों पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाया जाएगा और लेनदेन में होने वाले सभी खर्चे को आरबीआई ही वहन करेगा। आरबीआई के एक आंकड़े के अनुसार अक्टूबर 2016 में डिजिटल लेनदेन 80 करोड़ की संख्या से बढ़कर मार्च 2019 में 332 करोड़ की संख्या तक पहुंच गया है। इसके अलावा इन लेनदेन में अक्टूबर 2016 में 108 ट्रिलियन रुपये के मुक़ाबले मार्च 2019 में 258 ट्रिलियन रुपये का इस्तेमाल किया गया है। ये आंकड़े अपने आप में दर्शाते हैं कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का यह नतीजा है कि आज भारत में इतने बड़े पैमाने पर लोग लेनदेन के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं।  

वर्ष 2016 में मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी की गई थी, वहीं वर्ष 2017 में सरकार जीएसटी को लेकर आई। इन दोनों कदमों से भारत में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिला। अब सरकार और ज़्यादा डिजिटल फ्रेंडली इकॉनमी बनाने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार ग्रामीण भारत में साक्षरता अभियान चला रही है। सरकार प्रधानमंत्री डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत ग्रामीण युवाओं को डिजिटल प्रशिक्षण देने पर काम कर रही है, और इस योजना के तहत अब तक 2 करोड़ नागरिकों को प्रशिक्षित भी किया जा चु है। सरकार के इस नए कदम से अब डिजिटल इकॉनमी को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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