न्यूजीलैंड को अच्छा खेलने के बावजूद हार मिली, इंग्लैंड जीती, क्योंकि ICC बेवकूफ है

PC: Hindustan

तो हाल ही में आईसीसी विश्व कप का समापन हुआ, और पहली बार विश्व कप ट्रॉफी क्रिकेट के जनक माने जाने वाले इंग्लैंड को मिली। इंग्लैंड ने न्यूज़ीलैंड को एक बेहद ही रोमांचक मुक़ाबले में सुपर ओवर में हराकर क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को अपने नाम कर लिया। 2010 में टी-20 विश्व कप जीत के बाद ये इंग्लैंड क्रिकेट टीम के लिए सबसे ऐतिहासिक जीत रही है। इससे पहले इंग्लैंड तीन बार विश्व कप के फ़ाइनल [1979, 1987 और 1992] में प्रवेश कर चुका है, लेकिन हर बार इस टीम को निराशा ही हाथ लगी है।

जहां एक तरफ विश्व भर से क्रिकेट प्रशंसक इंग्लैंड को बधाई दे रहे हैं, तो वहीं कुछ लोगों ने फ़ाइनल के आखरी ओवर एवं सुपर ओवर के नियमों को लेकर आईसीसी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। फ़ाइनल के अंतिम ओवर में जब इंग्लैंड को 3 गेंदो में 9 रन जीतने के लिए चाहिए थे। अगली गेंद पर स्टोक्स ने जोरदार शॉट लगाया और दो रन के लिए दौड़े, दूसरा रन लेते वक्त मार्टिन गप्टिल ने रन आउट करने के लिए गेंद को थ्रो किया और स्टोक्स ने अपनी क्रीज में पहुंचने के लिए छलांग लगाई थी इसी दौरान गेंद उनके बल्ले से लगकर बाउंड्री से पार चली गई। इसलिए नियमानुसार इस ओवरथ्रो को डेड बॉल घोषित किया जाना चाहिए था।

परंतु यहां अंपायर ने डेड बॉल करार देने की बजाए इंग्लैंड को 6 रन दे दिए, जिसके कारण अब 2 गेंदों में इंग्लैंड को 3 रन जीतने के लिए चाहिए थे। हालांकि, न्यूज़ीलैंड की कसी हुई फ़िल्डिंग के कारण इंग्लैंड केवल 2 रन ही बटोर पाया, और मैच सुपर ओवर में चला गया। सुपर ओवर में जहां इंग्लैंड ने जुझारू खेल खेलते हुए 15 रन बनाए, तो वहीं न्यूज़ीलैंड ने काफी प्रयासों के बाद 15 रन बनाए। हालांकि, सुपर ओवर में टाई होने की स्थिति में एक नियम ने इंग्लैंड को पहली बार विश्व कप का विजेता बनाया, जिसके कारण सोशल मीडिया अब दो धड़ों में बंट गया है।

तो आखिर ये नियम है क्या जिसके कारण सोशल मीडिया पर विश्व कप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है? सुपर ओवर के इस नियम के अनुसार सुपर ओवर में मैच टाई होने की स्थिति में जो टीम मैच और सुपर ओवर में ज़्यादा बार गेंद को सीमा रेखा के पार भेजेगी, वही टीम मैच की विजेता होगी।

इस नियम के अनुसार मैच में और सुपर ओवर में भी इंग्लैंड की क्रिकेट टीम ने गेंद को सीमा रेखा के पार ज़्यादा बार पहुंचाया था, इसीलिए यह विश्व कप इंग्लैंड को दिया गया। लेकिन यदि यही मैच बारिश होने की वजह से प्रभावित होता तो आईसीसी के नियमों के अनुसार विश्व कप फ़ाइनल खेलने वाली दोनों टीम ही विजेता घोषित कर दी जाती है, पर यहां दोनों टीमों के बीच मैच ड्रा होने की स्थिति में किसी एक को विजेता घोषित कर दिया गया जो काफी बेतुका सा लगता है। क्रिकेट में केवल बल्लेबाज़ी के अलावा गेंदबाजी का भी महत्व है, ऐसे में कई सोशल मीडिया यूजर्स और पूर्व क्रिकेटरों ने ये सवाल उठाया कि सुपर ओवर में विकेटों को महत्व  क्यों नहीं दिया गया?

अब ज़रा आईसीसी के एक और विवादित नियम पर दृष्टि डालते हैं। डकवर्थ लुईस भले ही विवादों के केंद्र में रहे हों, लेकिन उन्होंने भी रनों से ज़्यादा विकेटों की संख्या को महत्व दिया। इसकी तुलना में सुपर ओवर में भी टाई होने की स्थिति में विकेटों का परिणाम तय करने में कोई विशेष भूमिका ही नहीं है। यदि मैच में विकेटों की बात करें, तो न्यूज़ीलैंड इस मामले में इंग्लैंड से दो कदम आगे रहा है। इंग्लैंड के मुक़ाबले न्यूज़ीलैंड ने केवल 8 विकेट ही गंवायें [सुपर ओवर को छोड़कर] थे। ऐसे में न्यूज़ीलैंड की हार को पचा पाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है क्योंकि सुपर ओवर के ये नियम योग्यता को परे रखते हुए महज भाग्य के सहारे किसी को विजेता घोषित करने पर केन्द्रित लगते हैं। 

स्टुअर्ट मैकगिल ने इस नियम के विरोध में ट्विटर पर ये ट्वीट पोस्ट किया –

https://twitter.com/scgmacgill/status/1150476262760038400

इसके अलावा कई क्रिकेट प्रशंसकों ने इन अजीबोगरीब नियमों के लिए आईसीसी प्रशासन को जमकर लताड़ा –

हालांकि, यह पहला अवसर नहीं है, जब अजीबोगरीब नियमों अथवा निर्णयों के कारण आईसीसी विश्व कप 2019 में क्रिकेट प्रशंसक आक्रोशित हुए हों। चाहे वो खराब अंपायरिंग हो, या फिर निरंतर बारिश के बावजूद मैच के वेन्यू को दूसरी जगह न स्थानांतरित करने का आईसीसी का फैसला हो, वर्तमान आईसीसी विश्व कप इस बार विवादों के लिए ज़्यादा सुर्खियों में रहा है, और दुर्भाग्यवश इस विश्व कप का फ़ाइनल भी विवादों की भेंट चढ़ गया।

यदि सुपर ओवर एक टाई ब्रेकर समान है, तो क्या एक बार टाई होने पर सुपर ओवर दोबारा नहीं कराया जा सकता था? या फिर विश्व कप संयुक्त रूप से इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड को ही दे दिया जाता। निस्संदेह इंग्लैंड अपनी प्रदर्शन के कारण विश्व कप की हकदार है, परंतु कुछ अजीबोगरीब नियमों के कारण न्यूज़ीलैंड को इस बार भी दुर्भाग्यवश उपविजेता के पद से ही संतोष करना पड़ा। 

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