क्या प.बंगाल में हिंदू भेंट बन रहे निशाना? मुर्शिदाबाद की घटना तो इसी ओर इशारा करती है

मुर्शिदाबाद

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल जिले मुर्शिदाबाद में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य और एक स्कूल शिक्षक बंधु प्रकाश पाल और उनकी 8 महीने की गर्भवती पत्नी ब्यूटी पाल (28) समेत 6 साल के बेटे आनंदपाल मुर्शिदाबाद के जियागंज इलाके में रहते थे। तीनों की धारदार हथियार से हत्या कर दी गयी।

पुलिस ने इस मामले में मृतक परिवार के अन्य सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। इसके साथ ही इस मामले पर जांच भी शुरू कर दी है। मुर्शिदाबाद के एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘प्रकाश पाल को मंगलवार सुबह 11 बजे देखा गया, जब वह स्थानीय बाजार से लौट रहा था। एक घंटे के भीतर, परिवार के तीन लोग मृत पाए गए’। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है परन्तु इस घटना के दूसरे दिन भी पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पाल परिवार जियागंज में करीब छह साल पहले आया था। बंधु प्रकाश पाल एक कट्टर हिंदू, आरएसएस कार्यकर्ता थे, और प्रतिदिन दुर्गा पूजा पंडाल जाते थे। जब स्थानीय लोगों को विजयदशमी के अवसर पर पंडाल में परिवार नहीं मिला, तो वे उन्हें देखने के लिए उनके घर गए। परन्तु दरवाजा अंदर से बंद था। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक “स्थानीय लोगों ने तब पुलिस को इस हत्या की सूचना दी थी। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।”

ट्विटर पर बुधवार से ही #Murshidabad टॉप ट्रेंड में है और इसके जरिये लोग पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व में, पश्चिम बंगाल पुलिस एक राजनीतिक इकाई बनकर रह गयी है  और राज्य में कानून व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हत्या की तस्वीरें परेशान करने वाली हैं।

ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल में भाजपा/आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या एक आम बात हो गयी है। टीएमसी के गुंडे बीजेपी/आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या करने पर उतारू है। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के बाद से ममता बनर्जी की पार्टी के समर्थकों की दबंगई अपने चरम पर थी। उस समय भी ममता बीजेपी/आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या को लेकर सवालों के घेरे में थीं, लेकिन ऐसा लगता है वहां की तस्वीर में अभी तक कोई बदलाव नहीं आया है। अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के शक्तिपुर गांव में एक तालाब से एक और बीजेपी कार्यकर्ता धर्मराज हजरा की लाश मिली थी। उनके हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए थे। अभी इस घटना को ज्यादा दिन नहीं बीते थे कि पाल परिवार की निर्मम हत्या की घटना ने सभी को चौंका दिया है।

बता दें कि बांग्लादेश की दो तिहाई आबादी मुस्लिम है और मुस्लिम बहुल जिले में रहने वाले हिंदुओं पर समय-समय पर हमले होते रहे हैं। ममता बनर्जी के तानाशाही शासन में हिंदुओं, खासकर भाजपा/आरएसएस से जुड़े लोगों पर अत्याचार बढ़ा है।

वास्तव में पश्चिम बंगाल में भाजपा/आरएसएस कार्यकर्ताओं की आये दिन होती हत्या का उद्देश्य भाजपा की मजबूत होती साख को राज्य में कमजोर करना है। इन घटनाओं को राज्य की जनता को यूं ही नहीं जाने देना चाहिए। ये घटना उनके लिए भी स्पष्ट संदेश भी है कि यदि वो राज्य की तानाशाही सरकार के खिलाफ जाते हैं तो उनका भी वही हाल होगा जो भाजपा/आरएसएस कार्यकर्ताओं का हो रहा है। अब बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्याओं पर चुप रहने वाली अन्य पार्टियों को भी बोलना चाहिए, क्योंकि आने वाले कल उनके कार्यकर्ताओं पर भी इस तरह के हमले होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र हर दिन एक मूक मौत मर रहा है, लेकिन मीडिया और बुद्धिजीवी मूक दर्शक बने हुए हैं। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, बंगाली लोगों को ममता बनर्जी के तानाशाही शासन के खिला एकजुट हो जाना चाहिए, अन्यथा आने वाले दिनों में उनसे ये आजादी भी छीनी जा सकती है।

पश्चिम बंगाल की जनता ही बंगाल में टीएमसी और ममता के तानाशही शासन को खत्म कर सकती है और ये बात ममता और उनकी पार्टी अच्छी तरह से समझती भी है। यही वजह है ममता कि पार्टी के गुंडे भाजपा के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार रहे हैं, ये लोग केवल भाजपा के कार्यकर्त्ता ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के नागरिक भी हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी के तानाशाही शासन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ममता बनर्जी की पार्टी केवल भाजपा के खिलाफ ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के खिलाफ है जो उनकी सरकार के खिलाफ है। यदि बंगाल तीन दशकों के साम्यवादी शासन को समाप्त कर सकता है तो टीएमसी के शासन को भी खत्म कर सकता है।

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