अनुभवी, स्पष्ट और आक्रामक- मिलिए भारत के नए विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला से

हर्ष श्रृंगला

PC: Loksabha Chunav

वरिष्ठ राजनयिक हर्ष वर्धन श्रृंगला ने बुधवार को नये विदेश सचिव का कार्यभार संभाल लिया। उन्हें 2 वर्षों के लिए इस पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है। वे इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत थे और माना जाता है कि Howdy Modi कार्यक्रम को सफल बनाने में इन्हीं का सबसे बड़ा हाथ था। वे ऐसे समय में विदेश सचिव का पद संभाल रहे हैं जब भारत और उसके सभी पड़ोसियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिल रही है।

बांग्लादेश के साथ CAA को लेकर, तो नेपाल के साथ पाम बैन और बॉर्डर विवाद को लेकर, तनाव के इस माहौल में उनकी चुनौतियाँ कुछ कम नहीं हैं। पद संभालने के बाद उन्होंने इस बात का संकेत भी दिया कि अपने कार्यकाल में वे लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में भारत की कूटनीति को और ज़्यादा मजबूत करने का काम करेंगे। वे एक अनुभवी, सफल और पेशेवर राजनयिक हैं और यही कारण है कि उनको अब इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है। उनके पास 36 सालों का राजनयिक अनुभव है।

बांग्लादेश, नेपाल, थाइलैंड और अमेरिका जैसे देशों में भारतीय दूतावास में अलग-अलग पदों पर रहकर देश की कई बड़ी उपलब्धियों में वे अपना योगदान दे चुके हैं। बांग्लादेश के साथ अति-महत्वपूर्ण Land Boundary Agreement पर हस्ताक्षर करवाने में बड़ी भूमिका अदा करना हो, या फिर थाइलैंड में खालिस्तानी आतंकी को पकड़कर उसे भारत प्रत्यर्पित करने में अपना योगदान देना हो, हर बार हर्ष वर्धन श्रृंगला ने अपना लोहा मनवाया है। इसीलिए विदेश मंत्रालय और सरकार में उनसे काफी उम्मीदें भी हैं।

कार्यभार संभालने से पहले हर्ष वर्धन श्रृंगला ने पत्रकारों से कहा कि यह बेहद स्पष्ट है कि विदेश सेवा जन सेवा है और सभी प्रयास देश को समर्पित होने चाहिए। उन्होंने कहा, ”मैं राष्ट्र-निर्माण में मंत्रालय की भूमिका के लिए प्रतिबद्ध हूं जैसा कि मैं 36 साल पहले था जब मैं एक युवा के तौर पर इन पोर्टल से जुड़ा था। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अपने राजनीतिक नेतृत्व के मार्गदर्शन और मंत्रालय के अंदर तथा बाहर अपने सहकर्मियों के समर्थन एवं सहयोग के साथ काम करने को उत्साहित हूं।” इसके साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इस नए पद पर उनका स्वागत किया है।

आने वाली सदी में भारत और अमेरिका के रिश्ते दोनों देशों, तथा विश्व के राजनीतिक समीकरण को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे, ऐसे में अमेरिका के पूर्व राजदूत को भारत का विदेश सचिव बनाकर भारत से यह संदेश दिया है कि अमेरिका के साथ रिश्ते उसकी प्राथमिकताओं में से एक हैं। भारत दुनियाभर में जिस तरह चीन के प्रभाव को कम करने की जद्दोजहद कर रहा है, उसमें भी हर्ष वर्धन श्रृंगला महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। उन्होंने कहा है कि अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में वे भारतीय दूतावासों की संख्या बढ़ाने पर काम करेंगे। इन क्षेत्रों पर अभी चीन का बहुत प्रभाव है और मोदी सरकार से पहले की भारत सरकारों ने कभी दुनिया के उस हिस्से के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश नहीं की। अब जब मोदी सरकार और विदेश मंत्री एस जयशंकर दुनिया में भारत की कूटनीति को और ज़्यादा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, तो ऐसे में भारत के विदेश सचिव के तौर पर हर्ष वर्धन श्रृंगला की नियुक्ति भारतीय विदेश मंत्रालय के लिए सोने पर सुहागा लगने जैसी बात साबित होगी।

 

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