अयोध्या के बाद काशी की बारी, जल्द ही हमें ज्ञानवापी मस्जिद की जगह विश्वनाथ मंदिर देखने को मिल सकता है

मस्जिद

PC: Patrika

अयोध्या राम जन्म भूमि मंदिर का फैसला आने के बाद से ही देश में एक पक्ष के लोग “अयोध्या तो बस झांकी है, काशी मथुरा अभी बाकी है” के नारे लगा रहे हैं। जिस तरह अयोध्या राम जन्मभूमि का मामला करोड़ों हिन्दू भक्तों के दिल से जुड़ा हुआ था, ठीक उसी तरह ऐसे कई मामले हैं और विवाद हैं जिनका नाता सीधे तौर पर हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसा ही एक मामला काशी वि‍श्‍वनाथ-ज्ञानवापी मस्‍जि‍द से जुड़ा है। दरअसल, इस विवाद से जुड़े एक पक्ष के लोगों का कहना है कि काशी की ज्ञानवापी मस्जिद ज्‍योतिर्लिंग विश्‍वेश्‍वर मंदिर का अंश है, और मुसलमानों ने मंदिर पर कब्जा कर इसे मस्जिद में बदल दिया। ये पक्ष शुरू से ही ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग करता आया है जिसको लेकर उसने वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट में अर्जी भी दायर की हुई है, लेकिन इस अर्जी के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने भी कुछ दिनों पहले कोर्ट में अर्जी दायर की थी।

पिछले वर्ष दिसंबर महीने में हिन्दू पक्ष के लोगों ने इस स्थल का सर्वेक्षण कराने की मांग की थी। बाद में इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष भी कोर्ट पहुंचा। उन्होंने कोर्ट में जाकर यह मांग की कि हिन्दू पक्ष द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग को खारिज किया जाये और ASI द्वारा की जाने वाली इस जांच को रद्द कर दिया जाए, लेकिन 5 फरवरी को अपने फैसले में कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की इस मांग को अस्वीकार कर दिया। 

हिन्दू पक्ष का मानना है कि विवादित स्थल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र धार्मिक स्थल है जो धार्मिक दृष्टि से हिंदुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और अब इसी स्थल पर मस्जिद का निर्माण हो चुका है। वर्ष 1669 में मुग़ल क्रूर शासक औरंगजेब ने प्राचीन हिन्दू मंदिर को धराशायी कर मस्जिद का निर्माण करवा दिया था। आज जिस जगह काशी विश्वनाथ मंदिर स्थ्ति है, ठीक उसी से सटी ज़मीन पर यह मस्जिद है लेकिन हिन्दू पक्ष के लोग मानते हैं कि जिस जगह पवित्र ज्योतिर्लिंग स्थापित था, वह अब मस्जिद में तब्दील हो चुकी है। इसीलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए अब हिन्दू पक्ष सर्वेक्षण कि मांग कर रहा है, जिसका सभी पक्षों को स्वागत करना चाहिए। मुस्लिम पक्ष शुरू से ही ASI द्वारा सर्वेक्षण का विरोध करता आया है, अब कोर्ट 17 फरवरी को इस मामले पर सुनवाई करेगा जिसमें इस बात पर फैसला लिया जाएगा कि विवादित स्थल का सर्वेक्षण होना चाहिए ना नहीं।

अब चूंकि कोर्ट सर्वेक्षण के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर चुकी है, तो इस बात की उम्मीद अब बढ़ गयी है कि जल्द ही हमें ASI द्वारा विवादित स्थल का सर्वेक्षण देखने को मिल सकता है और फिर सबूतों के आधार पर इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। कोर्ट में सबूतों और तथ्यों के आधार पर जिस भी पक्ष का केस मजबूत होता दिखेगा, उसी के पक्ष में फैसला आना चाहिए और इसिलिए हिन्दू पक्ष को अब अपनी जीत की उम्मीद है। अगर जांच के बाद इस स्थल पर दोबारा मंदिर का निर्माण किया जाता है, तो राम जन्मभूमि मंदिर मामले के बाद यह हिंदुओं की आस्था से जुड़ा सबसे बड़ा मामला होगा।

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