‘तुमसे यह उम्मीद नहीं थी’, The Hindu ने कोरोनावायरस पर एक कार्टून क्या डाला लिबरल Islamophobia का राग अलापने लगे

The Hindu

कोरोनावायरस अभी तक पूरे विश्व में 22 हजार से अधिक जान ले चुका है। इस वायरस के संक्रमण के पॉज़िटिव केस बढ़ते ही जा रहे हैं, इटली के बाद अब अमेरिका इस वायरस का एपिसेंटर बनने की राह पर है। भारत में भी मामले बढ़ कर 720 से ऊपर हो चुके हैं।

चीन में खाने के साथ किए गए एक्सपरिमेंट को आज पूरा विश्व इस महामारी के रूप में भुगत रहा है, लेकिन लिबिरल मीडिया लगातार चीन को दोषी ठहराने के कतरा रहीं है। और चीन को दोष मुक्त साबित करने पर तुली हुई है।

विश्व के माहौल पर कल The Hindu ने एक कार्टून प्रकाशित किया जिसमें यह दिखाया गया था कि किस तरह पूरा विश्व चीन के इस वायरस से त्रस्त है और कई दिनों से रुका हुआ है। कोरोना वायरस को एक आतंकवादी रूप में दिखाया गया है जो पृथ्वी के तरफ बंदूक ताने खड़ा है। इस कार्टून को दीपक हरिचन्द्रन ने बनाया था।

इसके बाद तो कॉमेंट में इस्लामिस्टों ने हमला बोल दिया और इस अखबार को इस्लाम विरोधी बताने लगे। अब यह विडम्बना ही है कि कोई The Hindu जैसे अखबार को इस्लाम विरोधी कह रहा हो। इस कार्टून का विरोध करने वालों का कहना था कि वायरस ने बंदूक ले रखी है और उसे पठानी सूट पहने दिखाया गया है। बता दें कि अभी काबुल में एक सिख गुरुद्वारा पर LET और हक्कानी के हमले को दो दिन भी नहीं हुए लेकिन फिर भी इस कार्टून में दिखाये गए कपड़ों से विशेष वर्ग नाराज हो रहा है।

https://twitter.com/RazviAnas/status/1243110855333437446?s=19

 

 

इन ट्वीट्स को देख कर आप समझ सकते हैं कि किस तरह से The Hindu ने मुस्लिम वर्ग को नाराज कर दिया। हालांकि, The Hindu के एडिटोरियल पॉलिसी से सभी परिचित हैं लेकिन वे इतने भी बेवकूफ नहीं है कि सच्चाई न दिखायें।

अगर वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो आतंकवादी आखिर किस प्रकार के कपड़े पहनते हैं? यह सोचने वाली बात है। किसी भी संदेश को अधिक व्यापक रूप से पहुंचाने के लिए फोटो सबसे ताकतवर हथियार होता है उस कार्टून का भी यह संदेश था कि किस प्रकार विश्व अभी कोरोना के हाथों बंदी बना हुआ है। लेकिन यह आसान सा संदेश भी समझने में कई लोगों को परेशानी हुई और उन्होंने तुरंत अपना विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया।

The Hindu पर लगातार हमले किए गए जिसके कारण और शायद हिम्मत न होने के कारण The Hindu ने एक माफीनामा जारी कर दिया। इस माफी नामे में लिखा था,कुछ लोगों ने 26 मार्च को प्रकाशित कार्टून पर आपत्ति जताई थी और उसे इस्लाम विरोधी बताया था। इस कार्टून में मुस्लिम परिधान का होना बिल्कुल गैरइरादतन था। इस कार्टून का असली मकसद दुनिया को कोरोना की गिरफ्त में दिखाना था। आगे लिखा था कि हम इस कार्टून को हटा दे रहे हैं और इसकी जगह दूसरे कार्टून को लगा रहे हैं।

आतंकवाद की सच्चाई के ऊपर बोलने और चित्रित करने की हिम्मत रखने वालों को लगातार परेशान किया जाता है। यह गहरी चिंताजनक बात है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या यह अभिव्यक्ति की आज़ादी और मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला नहीं था तो क्या था ?

Exit mobile version