‘वाइको का नाम Gopalaswamy है जोकि एक संस्कृत शब्द है” संस्कृत विश्वविद्यालय बिल का विरोध कर रहे नेता को स्वामी ने किया ट्रोल

सुब्रमण्यम स्वामी

देश में संस्कृत के तीन मानद विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार को राज्यसभा ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक-2019 पर अपनी मुहर लगा दी है। यह विधेयक लोक सभा में पहले ही पारित किया जा चुका है। दोनों सदनों से पास होने के बाद अब सिर्फ राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है, जिसके मिलते ही तीनों संस्कृत संस्थानों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाएगा। राज्य सभा में बहस के दौरान भाजपा के सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने भाषण में संविधान से लेकर Rick Briggs के रिसर्च पेपर तक कई महत्वपूर्ण चीजों को बताया।  इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि कैसे तमिल नेता अपने संस्कृत नाम बदल तमिल में रख लेते हैं और देश में संस्कृत और तमिल के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी ने MDMK के राज्यसभा सदस्य वायको का उदाहरण भी दिया कि कैसे उनका नाम  वास्तविक नाम V Gopalaswamy है लेकिन वो वायको नाम के पीछे छिप कर अपना तमिल और संस्कृत तथा आर्यन और द्रविड़ की विभाजनकारी राजनीति करते हैं।

बता दें कि वायको ने इससे पहले भी यह कह दिया था कि हिन्दी को जबरदस्ती थोपा जाता है। वायको का एक बयान सामने आया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि हिन्दी में क्या साहित्य है। हिन्दी की कोई जड़ नहीं है और संस्कृत एक मृत भाषा है। हिन्दी में चिल्लाने से कोई नहीं सुन सकता, भले ही (संसद में) कान में इयरफोन लगा हो। संसद में हो रही बहस का स्तर गिरा है। इसका मुख्य कारण हिन्दी को थोपा जाना है।

इसके बाद राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने चेयरमैन वेंकैया नायडू को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें वायको की सदस्यता को रद्द करने की मांग की थी। सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी चिट्ठी में लिखा था कि ‘वायको का कहना है हिन्दी विकसित भाषा नहीं है, ये सिर्फ एक किताब में ही है। उनका बयान भारतीयों का अपमान है।’ सुब्रमण्यम स्वामी ने बताया था कि संविधान के आर्टिकल 351 के तहत हिंदी को यूनियन ऑफ इंडिया की भाषा बताया गया है। स्वामी ने आरोप लगते हुए कहा कि वायको ने जिस संविधान की शपथ ली है वह उसी का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे में स्वामी ने मांग की है कि वायको की राज्यसभा सदस्यता को तुरंत रद्द कर दिया जाए।

सिर्फ वायको ही नहीं बल्कि DMK के संस्थापक करुणानिधि का भी नाम संस्कृत के मूल से ही निकला है। एक बार स्वामी ने कहा था कि अगर करुणानिधि को संस्कृत से इतनी ही चिढ़ है तो ये अपना नाम क्यों नहीं बदल लेते।

बता दें कि हमेशा से ही ऐसी धारणा है कि द्रविड़ भारत के मूल निवासी हैं और आर्यंस यूरोप से आए थे, जिन्होंने द्रविड़ियन को उत्तर भारत से भगा दिया। इसे ही आर्यन आक्रमण सिद्धान्त कहा जाता है। दक्षिण के करुणानिधि और वायको जैसे नेताओं ने पेरियार का अनुसरण करते हुए विभाजनकरी नीति को अपनाया और पूरे देशों आर्यन द्रविड़ में बांटने के बाद संस्कृत-तमिल में बाँट दिया है। पर अब इन सभी की पोल खुल चुकी है। जैसे-जैसे विज्ञान विकसित होता गया वैसे-वैसे हमारे इतिहास की सत्यता स्थापित होती गई। अब नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं जिससे संभावनाओं के नए द्वार खुलते जा रहे हैं और भ्रामक तथ्यों पर आधारित ‘आर्यन इंवेजन थ्योरी’ का सत्य अनावृत हो चुका है। द्रविड़ कोई तमिल शब्द नहीं है बल्कि यह एक संस्कृत शब्द है।

इसलिए यह सभी को समझना चाहिए कि संस्कृत एक देव भाषा है और इसे पुनर्जीवित करने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने तीन मानद विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा ने का फैसला किया है।

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