कोरोना जिहाद के बाद आया कोरोना आतंकवाद, 200 आतंकवादी नेपाल से बिहार में घुसकर कोरोना फैलाने वाले हैं

अब इन आतंकवादियों को हथियार की नहीं, बस कोरोना की ज़रूरत है

नेपाल

(This image has been used for representational purpose only)

तब्लीगी जमात द्वारा मचाया गया उत्पात मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि भारत के सामने एक और समस्या आ खड़ी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार सशस्त्र सीमा बल ने हाल ही में। एक बड़े षड्यंत्र को उजागर किया है, जिसमें भारत के पड़ोसी देशों के सहारे भारत में वुहान वायरस फैलाने की नापाक हरकतों को अंजाम दिया जा रहा है ।

एसएसबी के इंटेलिजेंस विंग ने पश्चिम चंपारण जिले के डीएम को पत्र लिखते हुए सूचित किया है कि कई ऐसे भारतीय मुसलमान हैं, जो शायद वुहान वायरस से संक्रमित हैं, और जल्द ही नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ कर सकते हैं।

इस पत्र में जमील मुखिया नामक एक व्यक्ति का भी उल्लेख है,  जो तस्करी और अवैध हथियारों की आवाजाही में लिप्त पाया गया है। इसके अलावा एसएसबी ने एक पाकिस्तानी एंगल भी ढूंढ निकाला है, क्योंकि नेपाल से भारत में घुसने वालों के साथ साथ कुछ पाकिस्तानी भी भारत में घुसना चाहते हैं।

इतना ही नहीं, इस पत्र से ये भी ज्ञात हुआ है कि ये संदिग्ध लोग अपनी तबीयत के बारे में ना सिर्फ सच्चाई छुपा सकते हैं, अपितु paracetamol का सेवन भी कर सकते हैं, ताकि वे संदिग्धों की सूची में ना आ सके।

लगता है अब कोरोना जिहाद के बाद अब कोरोना आतंकवाद ने भारत में दस्तक दे दी है। तभी उन्होंने उसी नेपाल को चुना है, जो कभी भारत में उत्पात मचाने वाले आतंकियों के लिए एक समय तक उनका प्रिय पिकनिक स्पॉट हुआ करता था, फिर चाहे वो अब्दुल करीम टुंडा हो, या फिर यासीन भटकल ही क्यों ना हो।

नेपाल से ये खबर भारत के लिए इसलिए और अधिक चिंताजनक हैं क्योंकि भारत और नेपाल के सीमा काफी porous हैं।  परन्तु यह कोई पहला मामला नहीं है, क्योंकि यह गतिविधियां कोरोना जिहाद का ही हिस्सा है।

पर कोरोना जिहाद आखिर है किस चिड़िया का नाम? इसे कई लोग तबलीगी जमात के खतरनाक मरकज़ सम्मेलन से जोड़कर देख रहे हैं, परंतु इसकी शुरुआत तो बहुत पहले से हो गयी थी। जब होली के आसपास भारत में वुहान वायरस के मामलों में बढ़ोत्तरी होने लगी, तो उस दौरान खबरें आने लगी कि कर्नाटक [जहां केरल के बाद भारत का पहला केस पाया गया था] में कुछ लड़के पुलिस वालों से हाथापाई करने पर उतर आए, क्योंकि वे विदेश से लौटे थे और आवश्यक टेस्ट कराने से मना कर रहे थे। इन लड़कों का मानना था कि उनका मजहब उन्हें टेस्ट कराने की इजाज़त नहीं देता

बात यहीं पर नहीं रुकती। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए देश के कई हिस्सों में भीड़ के जमावड़े पर रोक लगाई जाने लगी। कई धार्मिक संस्थाओं ने स्वयं ही बड़े बड़े जलसो और समारोह स्थगित करने लगे। परंतु कट्टरपंथियों को इससे क्या? उन्हें लगा कि ये सारी व्यवस्था उनके मजहब को समाप्त करने के लिए की जा रही है। शायद यही कारण है कि शाहीन बाग में लाख अनुरोध के बाद भी अराजकतावादी अड़े रहे, और जब जनता कर्फ़्यू के एक दिन बाद इन्हें खदेड़ा गया, तो उस इलाके में भीड़ इकट्ठा होनी शुरू हो गई।

परंतु इतने से भी उनका मन नहीं भरा। टिक टॉक एप्प पर समुदाय विशेष के लोग तो ऐसे वीडियो बनाने लगे, मानो हर मर्ज का इलाज उनके धर्म में ही है। यह वीडियो उसी समय वायरल होने लगी, जब ये साफ हो चुका था कि देश राष्ट्रव्यापी lockdown की ओर बढ़ रहा है।

पिछले कुछ दिनों में जो सामने आयां है, उससे स्पष्ट हो जाता है कि इन कट्टरपंथियों ने कैसे वुहान वायरस को एक शस्त्र की तरह प्रयोग में लाकर भारत के विरुद्ध इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसे ही दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र के मरकज़ भवन से पकड़े गए लोगों को quarantine सेंटर भेजा गया, तो इन लोगों द्वारा सड़कों पर, सुरक्षाकर्मियों पर और यहां तक कि quarantine सेंटर में स्थित स्वास्थ्य कर्मचारियों पर थूके जाने की खबरें सामने आने लगी।

पहले ही वुहान वायरस के प्रकोप से देश के कई राज्यों में जूझ रहे हैं, और अब कोढ़ में खाज की भांति नेपाल से इन जिहादियों के घुसपैठ की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में भारत के लिए आगे की राह इतनी भी आसान नहीं लग रही।

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