टेक के बाद, ट्रम्प का चीनी चाइनीज मीडिया पर हमला: ट्रम्प चीन के साथ सभी रिश्ते खत्म कर देना चाहते हैं

अमेरिका

(PC: The Indian Express)

अमेरिकी सरकार चीनी सरकार के खिलाफ तो शुरू से ही एक्शन लेती रही है। अब अमेरिका ने चीन को सबक सिखाने के लिए अपना नया टार्गेट चुन लिया है, और वह टार्गेट है अमेरिका में काम कर रही चीनी कंपनियाँ। दरअसल, अब अमेरिका चुन-चुन कर चीनी कंपनियों को अपने निशाने पर ले रहा है। पहले अमेरिका ने हुवावे के खिलाफ प्रतिबंधों को और भी ज़्यादा कडा किया, फिर Alibaba और Baidu को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्स्चेंज से हटाने के लिए एक बिल पास किया और अब अमेरिकी सरकार ने चीनी मीडिया कंपनियों को अपना निशाना बनाया है। दरअसल, हाल ही के आदेश में अमेरिकी सरकार ने चीनी मीडिया में काम कर रहे सभी कर्मचारियों की निजी जानकारी को मंगाया है। यह आदेश उन सभी 5 चीनी मीडिया संगठनों पर लागू होगा जो अमेरिका में ऑपरेट करते हैं। उन मीडिया संगठनों के नाम हैं- CGTN, Xinhua, China radio international, The China daily और The People’s daily।

बता दें कि अमेरिका में काम कर रही चीनी मीडिया ना सिर्फ खुलकर कम्युनिस्ट पार्टी के प्रोपेगैंडा को फैलाती है, बल्कि पश्चिमी देशों के खिलाफ भी जमकर रिपोर्टिंग करती है। अब अमेरिका में CGTN के सभी कर्मचारियों को 5 पन्नों का एक बेहद विस्तृत फॉर्म भरने को कहा गया है जिसमें निम्नलिखित जानकारी मांगी गयी है:

  1. कर्मचारियों की निजी जानकारी
  2. कर्मचारियों के पति/पत्नी की विस्तृत जानकारी
  3. कर्मचारियों के बच्चों की विस्तृत जानकारी
  4. कर्मचारियों के साथ रहने वालों की विस्तृत जानकारी
  5. कर्मचारियों के पूर्व काम करने की जगह की जानकारी

बता दें कि अमेरिका पहले ही चीनी मीडिया को चीनी दूतावास के समांतर स्वीकृति दे चुका है और चीनी मीडिया संगठनों पर कोई भी नई जगह खरीदने से पहले अमेरिकी सरकार की स्वीकृति की शर्तें लागू कर चुका है। हाल ही में जिस तरह चीन के अंदर न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंग्टन पोस्ट और अन्य अमेरिकी मीडिया समूहों के पत्रकारों की प्रताड़ना की गयी थी, और उन्हें देश छोड़ने के लिए कह दिया गया था, इसके बाद अब अमेरिका ने भी चीनी मीडिया कंपनियों को अपने निशाने पर लेना शुरू कर दिया है।

चीनी कंपनियों के खिलाफ अमेरिकी सरकार का रुख पिछले कुछ समय से बेहद कड़ा रहा है। हाल ही में अमेरिका ने हुवावे पर कुछ नए प्रतिबंध लगाए थे जिसके बाद हुवावे अमेरिका से प्रोसेसर चिप और सेमी-कंडक्टर का एक्सपोर्ट नहीं कर पाएगा। अमेरिका द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों के बाद हुवावे सकते में है। हुवावे ने एक बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका के इस फैसले से ना सिर्फ दुनियाभर के tech बाज़ार में खलबली मच जाएगी बल्कि इससे हुवावे पर अस्तित्व का खतरा मंडराना शुरू हो जाएगा। बता दें कि दुनिया के सेमीकंडक्टर संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले चिप डिजाइन और विनिर्माण उपकरण ज्यादातर अमेरिका में बनते हैं। ऐसे में अमेरिका द्वारा हुवावे पर लगाए गए इन प्रतिबंधों के बाद हुवावे का बर्बाद होना तय माना जा रहा है।

इसके अलावा 21 मई को अमेरिकी सीनेट में एक बिल पास किया गया था जिसके बाद अलीबाबा और बाईडु (Baidu) जैसी चीनी कंपनियों पर अमेरिकी स्टॉक एक्स्चेंज से delist होने का खतरा मंडराने लगा है। इन चीनी कंपनियों के delist होने के बाद इन्हें विदेशी पूंजी जुटाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि वह अब हर तरीके से चीन को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखेगा, और आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका चीन के साथ किसी सैन्य टकराव से भी नहीं हिचकिचाएगा।

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