एक और वुहान लैब का पता चल गया- चीन Biological हथियार बनाकर पाकिस्तानियों पर इसकी टेस्टिंग कर रहा था

तो क्या अब पाकिस्तान से निकलेगा नया कोरोनावायरस?

जैविक

अगर पाकिस्तान और चीन पर लगाम न लगाया जाए तो ये दुनिया तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अब एक नए खुलासे में यह बात सामने आई है कि, ये दोनों देश मिलकर खतरनाक जैविक हथियार बनाने में लगे हैं। चीन की वुहान वायरोलॉजी लैब पाकिस्तान के साथ मिलकर पिछले पांच वर्षों से अपने वैज्ञानिक रिसर्च के नाम पर दुनिया को धोखा दे रही है और जैविक हथियार बनाने में लगी हुई है। इतना ही नहीं, अपनी इस घिनौनी योजना के परीक्षण के लिए उन्होंने हजारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के रक्त के नमूने भी लिए थे। इस बात का खुलासा एक ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट The Klaxon ने किया है।

चीन की वुहान लैब और पाकिस्तान की सेना ने पिछले महीने इस मसले पर तीन साल की डील की है। इस डील के तहत वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में संभावित जैविक हथियारों को विकसित करने का समझौता भी शामिल है। चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के प्रमुख वैज्ञानिकों की एक टीम पाकिस्तान की मदद से खतरनाक विषाणुओं के प्रयोग पर शोध कर रही है। यही नहीं, चीनी वैज्ञानिक पाकिस्तानी वैज्ञानिकों को इन विषाणुओं के इस्तेमाल और नियंत्रण की जानकारी के साथ ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने कथित तौर पर पाकिस्तानी सेना की Defence Science and Technology Organisation (DESTO) के साथ गुप्त रूप से तीन वर्ष का समझौता किया था। इस समझौते के तहत, “उभरती संक्रामक बीमारियों” और “संचरित रोगों के जैविक नियंत्रण” विषय पर अनुसंधान  के लिए सहमती बनाई गई थी।

अब मुख्य चिंता यह है कि, पाकिस्तान इस तकनीक का इस्तेमाल जैव हथियारों के तौर पर कर सकता है। इससे भी बड़ा डर यह है कि, जैविक रूप से संवेदनशील सामग्री के बेहतर रखरखाव के लिए पाकिस्तान के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, जिस कारण एक बार फिर वुहान जैसी स्थिति फैल सकती है।

पाकिस्तान सरकार ने अपनी सेना और वुहान लैब के बीच समझौते की पुष्टि भी की है। साथ में यह भी स्पष्ट किया है कि यह ऑपरेशन पाकिस्तान की धरती पर हो रहे हैं। यह सामने आया है कि चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिक कई वर्षों से पाकिस्तानी वैज्ञानिकों के साथ व्यापक शोध कार्य कर रहे हैं जिनमें से एक शोध साल 2015 में शुरू हुआ था।

चीनी और पाकिस्तानी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए पांच अध्ययनों के परिणामों को स्टडी पेपर में प्रकाशित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक में “zoonotic pathogens” का पता लगाना शामिल है। बता दें कि, Zoonotic pathogens की वजह से ऐसी संक्रामक बीमारियां होती हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं। उदाहरण के लिए शूकर से स्वाइन फ्लू का फैलना। यह रिसर्च दिसंबर 2017 से लेकर इस साल मार्च तक की गई।

इन पांच अध्ययनों में हजारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के खून के नमूने लिए गए थे; मुख्य रूप से उनके, जो शहरों से दूरदराज के इलाकों में रहते थे और जानवरों के साथ रहते थे। इन पांचों स्टडीज में कई घातक और संक्रामक बीमारियों के जीनोम सिक्वेंसिंग के बारे में भी लिखा है। रिसर्च में वेस्ट नील वायरस, मर्स-कोरोनावायरस, क्रीमिया-कॉन्गो हेमोरेजिक फीवर वायरस, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम वायरस और चिकनगुनिया के भी प्रयोग किए गए हैं।

इन सभी शोधों को ” International Cooperation on Key Technologies of Biosafety along the China-Pakistan Economic Corridor” के तहत वितपोषित किया गया था। गौरतलब है कि, अंतरराष्ट्रीय सहयोग वाले हिस्से को लेकर कभी भी पाकिस्तान या चीन ने सार्वजनिक घोषणा नहीं की। The Klaxon के अनुसार परियोजना में चीन की “गहरी दिलचस्पी” का कारण पाकिस्तान को भारत के खिलाफ युद्ध में शामिल करना है तथा अपनी जमीन और लोगों को जोखिम में डाले बिना “विदेशी धरती पर संभावित खतरनाक प्रयोगों का संचालन करना है।

यानि देखा जाए तो, चीन पाकिस्तान की धरती पर वुहान virology से भी खतरनाक शोध कर रहा है। अगर थोड़ी भी भूल चूक हुई तो जिस तरह से कोरोना ने पहले वुहान को और फिर पूरी दुनिया को अपने चपेट में लिया उसी तरह से और कई बीमारियाँ फैल जाएंगी। जिन Zoonotic pathogens पर रिसर्च का दावा किया गया है, उनमें से किसी भी एक की वैक्सीन या दवा नहीं है। पाकिस्तान की सेना अपने ही नागरिकों के साथ लैब के चूहे की तरह बर्ताव कर रही है। हालांकि अभी तक चीन और पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे जैविक हथियार की किसी को भनक नहीं थी, लेकिन अब यह रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है और इन दोनों देशों की अमानवीय चाल का पर्दाफाश हो चुका है।

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