ट्रम्प की अफगानिस्तान में बड़ी जीत – अमेरिकी चुनाव से पहले युद्ध से ग्रस्त देश में शांति स्थापित करने की योजना रंग ला रही

अब ट्रम्प की प्रचंड बहुमत से जीत लगभग पक्की

अफगानिस्तान

अफगानिस्तान में शांति स्थापित होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान के बीच भी समझौता होने के आसार बढ़ गए हैं। समझौते की सबसे बड़ी बाधा तालिबान द्वारा अफगानिस्तान की सरकार की कैद में बन्द उसके आतंकियों की रिहाई की मांग थी, जिसे अफगानिस्तान की सरकार ने मानने से इंकार कर दिया था। परंतु अब अफगानिस्तान सरकार इस पर राजी हो गई है। अभी अफगानिस्तान की कैद में 400 ऐसे आतंकी थे, जिनपर गंभीर मुकदमे चल रहे हैं या उन्हें सजा हो गई है। इनमें से 150 ऐसे हैं जिन्हें फांसी की सजा मिली है। अफगानिस्तान इन सभी के अतिरिक्त कुल 5000 कैदियों को रिहा करेगा। बदले में तालिबान भी अपनी कैद में बन्द अफगानिस्तान के 1000 सैन्यकर्मियों को रिहा करेगा।

अफगानिस्तान धरती का शायद एकमात्र देश है जो 1978 से आज तक युद्धरत है। 1978 में सोवियत रूस समर्थित पार्टी द्वारा तख्तापलट के बाद यह सब शुरू हुआ, इसके बाद सोवियत संघ ने प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया। उसके जवाब में मुस्लिम मुजाहिद्दीनों की फौज अमेरिका ने उतारी और तब से खून खराबे का कभी न खत्म होने वाला दौर शुरू हुआ। बाद में इन मुजाहिदीन आर्मी में सबसे प्रभावी तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और अफगानिस्तान आतंकियों का स्वर्ग बन गया।

इसी जगह छुपकर ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका पर 9/11 का हमला करवाया था। जब अमेरिका ने ओसामा को सौपने की बात की तो उसके पुराने साथी तालिबान ने मना कर दिया। इसी के बाद अमेरिका ने इस देश में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया और 7 oct 2001 से आज तक 19 साल बीत गए लेकिन इस युद्ध में न कोई विजयी होता दिख रहा है न पराजित होता दिख रहा है। शुरू के कुछ महीनों में अमेरिका ने अपना दबाव बनाया लेकिन आज तो तालिबान 19 साल की लड़ाई के इतिहास में सबसे अधिक क्षेत्र में प्रभावी है।

अब अमेरिका ने वापस जाने का फैसला किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका के लोगों में ऐसे ‘कभी न खत्म होने वाले युद्धों’ के प्रति बहुत असंतोष था। 2016 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ते समय ट्रम्प ने वादा किया था कि वे इन ‘ never ending wars ‘ का अंत करेंगे। अमेरिका ने सीरिया से पहले ही सेना वापस बुला ली है, और अब यदि ट्रम्प अफगानिस्तान में शांति स्थापित कराने में सफल हुए और अमेरिका के सैनिक घर वापस गए तो यह ट्रम्प की बड़ी उपलब्धि होगी।

उम्मीद की जा रही है कि इस डील से ट्रम्प को बड़ा चुनावी फायदा भी मिल सकता है क्योंकि यह चुनाव का एक बड़ा मुद्दा है और नवंबर में होने वाले चुनावों से पूर्व करीब 4 से 5 हजार सैनिक घर वापस जा चुके होंगे। अमेरिका में कोरोना के चलते ट्रम्प की दावेदारी कमजोर हो गई थी। परंतु चीन के प्रति उनकी आक्रामक कार्रवाई से तो उन्हें चुनाव में फायदा मिलना है ही,  कुछ लोगों का मानना है कि black life matters के आंदोलन में हुई हिंसा का कारण से भी फायदा मिल सकता है । ऐसे में यह डील ट्रम्प के लिए और भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका के चुनाव से हटकर बात करें तो भी अफगानिस्तान में शांति की स्थापना दक्षिण एशिया की शांति स्थापित करने मे मदद करेगी।

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