संजय-फडणवीस की बैठक के बाद हलचल में आए पवार और कांग्रेस; महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक संकट आने वाला है

महाराष्ट्र में फिर से शुरू होने वाला है सबसे बड़ा राजनीतिक ड्रामा!

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस की शिवसेना नेता संजय राउत से मुलाकात के बाद हलचलों का दौर शुरू हो गया है। जिसमें सबसे ज्यादा बेचैन महाविकास अघाड़ी गठबंधन दिख रहा है। ये बेचैनी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि एनसीपी नेता शरद पवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलने जाना पड़ा, जो ये जाहिर करता है कि गठबंधन को जितना सहज दिखाने की कोशिश हो रही है… असल में वो है नहीं। एक साधारण सी मुलाकात के बाद शुरू हुई हलचल साफ संदेश है कि पीछे कुछ तो चल रहा है।

मिलने पहुंच शरद पवार

दरअसल, देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत की दो घंटे चली मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की सियासत में कुछ यूं बेचैनियां बढ़ीं कि अगले दिन ही एनसीपी प्रमुख शरद पवार खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलने उनके सरकरी आवास वर्षा पहुंच गए। यही नहीं सुबह ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोराट भी मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे। इस मुलाकात का कोई विवरण तो सार्वजनिक नहीं किया गया। लेकिन इस राजनीतिक सरगर्मी की वजह संजय राउत की फडणवीस से मुलाकात ही है।

नाराज हैं गठबंधन के साथी

दरअसल विपक्षी नेता से संजय राउत की मुलाकात से महाराष्ट्र महाविकास अघाड़ी गठबंधन के घटक दल कांग्रेस, एनसीपी दोनों के ही नेता नाराज है। मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया है कि शिवसेना को गठबंधन धर्म की याद दिलाते हुए कांग्रेस और एनसीपी ने कहा कि ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे गठबंधन या सरकार पर किसी प्रकार का सवाल खड़ा हो। वहीं कांग्रेस नेता थोराट ने इस दौरान कहा कि कांग्रेस क़ृषि बिल का विरोध कर रही है। इसलिए इस बिल को महाराष्ट्र में लागू नहीं किया जाना चाहिए।

संजय राउत ने बताया औपचारिकता

शिवसेना नेता संजय राउत आए दिन चर्चा का विषय रहते हैं। गठबंधन में भी अब उनकी भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं। ऐसे में बीजेपी नेता से उनकी मुलाकात शिवसेना के लिए ही मुसीबत बन गई है। भले ही संजय राउत और बीजेपी दोनों ही इसे एक औपचारिक और इंटरव्यू के मसले पर बातचीत बता रहे हों लेकिन गठबंधन के दोनों घटक दलों के लिए ये एक खतरे की घंटी की तरह ही है।

गौरतलब है कि शिवसेना तीन दलों में मुख्यमंत्री पद के बावजूद काफी अलग-थलग पड़ गई है। कोरोनावायरस की रोकथाम और सुशांत केस से लेकर सभी मुद्दों पर सबसे ज्यादा किरकरी शिवसेना की ही हुई है और इसके चलते शिवसेना पर सबसे ज्यादा सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में जब फडणवीस की संजय राउत से मुलाकात हुई, जिसके कारण जानकारों का ये भी मानना है कि शिवसेना को अपनी छवि बिगड़ने पर भाजपा की याद आई है और वो पुनः एनडीए में घर वापसी भी कर सकती है।

अभी एनडीए में घर वापसी के कयास राजनीतिक गलियारों में चले ही थे कि एनसीपी-कांग्रेस घबराकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर अपनी सरकार बचाने पहुंच गए। जो ये साबित करता है कि गठबंधन में सबकुछ बेहतरीन दिखाने की कोशिश तो की जा रही है लेकिन असल में झोल बहुत हैं और इसमें अलग-थलग शिवसेना ही है। लेकिन जब वो कोई भी दांव चलती है तो दोनों घटक दल अपनी सहूलियत के अनुसार बात करते हैं, और बीजेपी नेता से एक मुलाकात के बाद शिवसेना को गठबंधन धर्म की याद दिलाना ये भी जाहिर करता है कि गठबंधन में सामंजस्य और संतुलन की भारी कमी है जिस कारण जानकार तो गठबंधन के भविष्य पर भी सवाल खड़े करने लगे हैं।

 

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